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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Sep 02, 2024 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

खुशखबरी: इंदौर-मनमाड़ के बीच नई रेल लाइन को केंद्रीय कैबिनेट ने दी मंजूरी, 4 साल में बनेगा 309 किमी लंबी ट्रैक

इंदौर और मनमाड़ के बीच आखिर रेल लाइन को मंजूरी मिल ही गई। हाल ही में 27 अगस्त को नईदुनिया ने सांसद शंकर लालवानी को जनता का घोषणा पत्र सौंपा था, जिसमें पहली मांग ही इंदौर-मनमाड़ परियोजना स्वीकृति की थी, जो अब पूरी हो गई है। यह रेल लाइन 2028-29 तक पूरी होगी।

By Navodit SaktawatEdited By: Navodit Saktawat
Publish Date: Mon, 02 Sep 2024 03:57:39 PM (IST)Updated Date: Mon, 02 Sep 2024 10:14:49 PM (IST)
खुशखबरी: इंदौर-मनमाड़ के बीच नई रेल लाइन को केंद्रीय कैबिनेट ने दी मंजूरी, 4 साल में बनेगा 309 किमी लंबी ट्रैक
मनमाड इंदौर के बीच न्यू रेल लाइन को मिली मंजूरी। यह 2028-29 तक पूरी हो जाएगी।

HighLights

  1. 30 लाख आबादी का रेल सेवा से सीधा संपर्क जुड़ेगा।
  2. परियोजना की कुल लागत 18,036 करोड़ रुपये है।
  3. चार जिलों से गुजरेगी रेल लाइन, 30 स्‍टेशन बनेंगे।

नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। इंदौर निवासियों के लिए खुशखबरी है। मनमाड इंदौर के बीच न्यू रेल लाइन को मंजूरी मिल गई है। केंद्रीय कैबिनेट ने 309 किलोमीटर की योजना को मंजूरी दी। यह 18036 करोड़ का प्रोजेक्ट है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (सीसीईए) ने सोमवार को रेल मंत्रालय के तहत बहुप्रतिक्षित इंदौर-मनमाड़ नई रेल लाइन परियोजना को आखिर मंजूरी दे दी है।

इंदौर-मनमाड़ नई रेल लाइन प्रोजेक्ट वर्षों बाद अब जमीन पर आ रहा है। प्रोजेक्ट में 18 करोड 36 रुपये की लागत से 309 किलोमीटर लंबी नई रेल लाइन बिछाई जाएगी। धार, खरगोन और बड़वानी के आदिवासी अंचल से पहली बार रेल लाइन गुजरेगी।


इस परियोजना से लगभग एक हजार गांवों और 30 लाख आबादी का रेल सेवाओं से सीधा संपर्क जुड़ेगा। परियोजना से पीथमपुर ऑटो क्लस्टर की 90 बड़ी इकाइयां और 700 छोटे और मध्यम उद्योग को जेएनपीए के गेटवे पोर्ट से कनेक्टिविटी हो जाएगी। इससे माल परिवहन की लागत में भी कमी आएगी।

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1918 में होलकर काल में बनी थी इंदौर-मनमाड़ रेल लाइन योजना, बहुत रोचक है इस प्रोजेक्‍ट का इतिहास

पहली बार इन शहरों से गुजरेगी रेल लाइन

  • नई रेल लाइन महू से धार जिले के धरमपुरी, ठीकरी, राजपुर, सेंधवा, सिरपुर, शिखंडी, धुले, मालेगांव से होकर मनमाड़ पहुंचेगी।
  • पूरी परियोजना में 30 नए रेलवे स्टेशन भी बनाए जाएंगे।
  • 309 किमी लंबी लाइन लाइन बिछेगी।
  • 18 हजार 36 करोड़ रुपये आएगी लागत।
  • इंदौर-मुंबई के बीच सबसे छोटा रेल मार्ग बनेगा।
  • मप्र के चार जिलों से होकर गुजरेगी रेल लाइन।
  • महाराष्ट्र के दो जिले शामिल।
  • पांच वर्ष में पूरी होगी परियोजना।
  • पीथमपुर औद्योगिक क्षेत्र के हजार से अधिक छोटे-बड़े उद्योगों को होगा सीधा फायदा।
  • लाजिस्टिक सेक्टर को फायदा।

इस मंजूरी से दो राज्‍यों को होंगे फायदे

  • कैबिनेट ने 309 किलोमीटर लंबी नई लाइन परियोजना को मंजूरी दी।
  • दो प्रमुख वाणिज्यिक केंद्रों - मुंबई और इंदौर के बीच सबसे छोटी रेल कनेक्टिविटी प्रदान करने के लिए यह काम करेगी।
  • स्वीकृत परियोजना वाणिज्यिक केंद्रों मुंबई और इंदौर को सबसे छोटे रेल मार्ग से जोड़ेगी।
  • इसके अलावा यह रेलवे लाइन महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश के असंबद्ध क्षेत्रों को भी जोड़ेगी।
  • यह रेलवे लाइन महाराष्ट्र के 2 जिलों और मध्य प्रदेश के 4 जिलों से होकर गुजरेगी।
  • परियोजना की कुल लागत ₹ 18,036 करोड़ है और इसे 2028-29 तक पूरा किया जाएगा।
  • परियोजना निर्माण के दौरान लगभग 102 लाख मानव-दिवसों के लिए प्रत्यक्ष रोजगार भी पैदा करेगी।

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परियोजना मंजूर होने के मायने

  • यह परियोजना प्रधानमंत्री मोदी के नए भारत के विजन के अनुरूप है, जो क्षेत्र में व्यापक विकास के माध्यम से क्षेत्र के लोगों को "आत्मनिर्भर" बनाएगा, जिससे उनके रोजगार/स्वरोजगार के अवसर बढ़ेंगे।
  • यह परियोजना मल्टी-मॉडल कनेक्टिविटी के लिए पीएम-गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान का परिणाम है, जो एकीकृत योजना के माध्यम से संभव हुआ है।
  • यह लोगों, वस्तुओं और सेवाओं की आवाजाही के लिए निर्बाध कनेक्टिविटी प्रदान करेगा।
  • यह परियोजना 2 राज्यों यानी महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश के 6 जिलों को कवर करती है 1,000 गांव और करीब 30 लाख की आबादी को लाभ मिलेगा।
  • परियोजना देश के पश्चिमी/दक्षिण-पश्चिमी हिस्से को मध्य भारत से जोड़ने वाला छोटा रास्ता उपलब्ध कराकर इस क्षेत्र में पर्यटन को बढ़ावा देगी।
  • इससे महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर सहित उज्जैन-इंदौर क्षेत्र के विभिन्न पर्यटन/धार्मिक स्थलों पर पर्यटकों की आवाजाही बढ़ेगी।
  • परियोजना मध्य प्रदेश के बाजरा उत्पादक जिलों और महाराष्ट्र के प्याज उत्पादक जिलों को भी सीधी कनेक्टिविटी प्रदान करेगी, जिससे देश के उत्तरी और दक्षिणी हिस्सों में इसके वितरण में सुविधा होगी।
  • यह कृषि उत्पादों, उर्वरक, कंटेनर, लौह अयस्क, स्टील, सीमेंट, पीओएल आदि जैसी वस्तुओं के परिवहन के लिए एक आवश्यक मार्ग है।
  • क्षमता वृद्धि कार्य के परिणामस्वरूप लगभग 26 एमटीपीए (मिलियन टन प्रति वर्ष) की अतिरिक्त माल ढुलाई होगी।

268 किमी है रेल लाइन की लंबाई

इसके लिए 2200 हेक्टेयर भूमि भी अधिगृहीत करने की आवश्यकता होगी। छह साल की देरी होने से इस परियोजना की अनुमानित लागत साढ़े नौ हजार करोड़ से बढ़कर 22 हजार करोड़ रुपये से अधिक हो गई है। इंदौर-मनमाड़ रेल लाइन की कुल लंबाई 268 किमी है।

9 सुरंगें भी बनेगी

इसमें 50 किमी मनमाड़ से धुले तक काम चल रहा है। अब धुले से इंदौर के महू तक लाइन बिछाने के लिए डीपीआर तैयार है। सांसद शंकर लालवानी ने बताया कि इंदौर-मनमाड़ रेल लाइन पर ठोस प्रगति हुई है। इस ट्रैक के बनने से इंदौर की मुंबई व दक्षिण के राज्यों के बीच संपर्क सुगम होगा। 218 किमी हिस्से में लाइन बिछाई जानी है, उसमें 9 सुरंगें बनेंगी।

इंदौर-मनमाड़ रेल लाइन को स्वीकृति मिलने पर बांटी मिठाई, की आतिशबाजी

सेंधवा/बड़वानी। बहुप्रतीक्षित इंदौर-मनमाड़ रेललाइन को आखिरकार केंद्र से स्वीकृति मिल ही गई। इसकी स्वीकृति मिलने का समाचार मिलते ही पश्चिम निमाड़ क्षेत्र के लोगों में खुशी छा गई। जगह-जगह आतिशबाजी कर मिठाई बांटी गई। बड़वानी जिले के सेंधवा में भी भाजपा कार्यकर्ताओं ने मिठाई बांटकर खुशी जताई।

गौरतलब है कि इस परियोजना में 309 किलोमीटर लंबाई में रेल लाइन बिछाई जाएगी। 18 हजार करोड़ रुपये की वित्तीय स्वीकृति मोदी सरकार की कैबिनेट ने दी मंजूरी। आठ वर्ष में योजना पूरी होगी।

इस संबंध में जानकारी देते हुए भाजपा प्रवक्ता सुनील अग्रवाल ने बताया कि मोदी सरकार की कैबिनेट की बैठक में इंदौर-मनमाड़ रेल परियोजना को स्वीकृति दी गई। इस परियोजना की स्वीकृति में सभी जनप्रतिनिधियों का सहयोग प्रदान किया गया था। निमाड़ में रेल की मांग 1960 से उठती आई है।

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इसके लिए लोकसभा चुनाव में इंदौर-मनमाड रेल का मुद्दा हमेशा बना रहा। केंद्र में भाजपा की सरकार आने के बाद रेल लाइन के लिए क्षेत्र के दोनों लोकसभा सांसद गजेंद्रसिंह पटेल, राज्यसभा सदस्य सुमेरसिंह सोलंकी, इंदौर सांसद शंकरलाल लालवानी, धार सांसद व केंद्रीय मंत्री सावित्री ठाकुर ने संसद में कई बार रेललाइन का मुद्दा उठाया।

अनुसूचित जनजाति आयोग के राष्ट्रीय अध्यक्ष अंतरसिंह आर्य जब मप्र शासन में मंत्री थे, उन्होंने तत्कालीन सांसद सुमित्रा महाजन के साथ रेल लाइन का मुद्दा उठाया गया था।

आज मोदी सरकार ने इंदौर-मनमाड़ परियोजना को स्वीकृति देने से क्षेत्र में हर्ष का वातावरण निर्मित होकर भाजपा कार्यकर्ताओं ने नपा जनसंपर्क कार्यालय पर पटाखे फोड़कर मिटाई खिलाकर मुंह मीठा कर जश्न बनाया गया।

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Chaired by PM Shri @narendramodi Ji, the Union Cabinet has sanctioned a 309 km long new rail line project, establishing the shortest route between Mumbai and Indore, two key commercial hubs.

This project will traverse 2 districts in Maharashtra and 4 in Madhya Pradesh,… pic.twitter.com/KXhm5Lf0H0

— Nitin Gadkari (@nitin_gadkari) September 2, 2024

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