
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। भागीरथपुरा में दूषित पानी पीने से हुई 16 मौतों के बाद वहां से पानी के जो सैंपल लिए गए उनकी जांच अलग-अलग जगह की लैबोरेटरी में की गई। आश्चर्यजनक पहलू यह है कि दो सरकारी लैब में पानी में जानलेवा बैक्टीरिया होने की पुष्टि हुई लेकिन एक निजी लैब को पानी में कोई बैक्टीरिया नहीं मिला। भागीरथपुरा में सप्लाई हुए पानी की जांच एमजीएम मेडिकल कॉलेज और नगर निगम की लैब के साथ एक निजी मेडिकल कॉलेज में हुई।
इनमें से एमजीएम और निगम की लैब में हुई जांच में बैक्टीरिया पाया गया, लेकिन निजी मेडिकल कॉलेज की लैब की रिपोर्ट में पानी को शुद्ध बताया गया। इससे पहले सीएमएचओ डॉ. माधव हासानी ने स्वयं पुष्टि की थी कि पानी दूषित है और इसमें जानलेवा बैक्टीरिया भी पाया गया है। निजी लैब में सैंपल भेजने के संबंध में कलेक्टर शिवम वर्मा का कहना है कि सैंपल स्वास्थ्य विभाग द्वारा भेजे गए है। वहीं, सीएमएचओ डॉ. हासानी ने कहा कि सैंपल हमने नहीं भेजे।
एमजीएम मेडिकल कॉलेज लैब (1 जनवरी 2025)
माइक्रोबायोलॉजी लैब में एक जनवरी को पानी की रिपोर्ट में ई-कोलाई, शिगेला आदि बैक्टीरिया की पुष्टि हुई।
नगर निगम लैब (4 जनवरी 2025)
मूसाखेड़ी स्थित लैब की रिपोर्ट चार जनवरी को आई, इसमें बोरिंग का पानी भी दूषित पाया गया। पानी में फीकल कोलिफार्म बैक्टीरिया की मौजूदगी सामने आई है।
अरबिंदो अस्पताल लैब (4 जनवरी 2025)
लैब की जांच रिपोर्ट चार जनवरी को आई है, इसमें किसी भी बैक्टीरिया के होने की पुष्टि नहीं हुई है। यानी यह पानी को शुद्ध बता रहे हैं।