Green Corridor in Indore: इंदौर (नईदुनिया प्रतिनिधि)। इंदौर शहर में तीन दिन में दूसरी बार ग्रीन कारिडोर बना। पार्श्वनाथ नगर में रहने वाली 37 वर्षीय नेहा चौधरी की ब्रेनडेथ के बाद रविवार दोपहर 1.29 बजे उनकी किडनी और लिवर के ट्रांसप्लांट की प्रक्रिया शुरू हुई। चोइथराम अस्पताल से सात मिनट में एक किडनी सीएचएल अस्पताल और दूसरी किडनी नौ मिनट में बांबे अस्पताल तक पहुंचाई गई। लिवर चोइथराम अस्पताल में ही भर्ती मरीज को प्रत्यारोपित किया गया। यह 41वां ग्रीन कारिडोर था। एक सप्ताह पहले ब्रेन हेमरेज के कारण नेहा को अस्पताल में भर्ती किया गया था। उनकी न्यूरो सर्जरी भी हुई लेकिन हार्ट अटैक के कारण ब्रेनडेथ हो गई।

नेहा ने कहा था 'मेरा निधन हो जाए तो अंगदान कर देना'

पति पंकज चौधरी के मुताबिक, नेहा को बहुत पहले से हृदय के वाल्व में समस्या थी। 12 सितंबर को नेहा सिरदर्द के बाद बेहोश हो गई। उसे अस्पताल लाए तो डाक्टरों ने ब्रेन हेमरेज होना बताया। नेहा ने मुझसे कई बार कहा था कि शहर में इतने लोगों के अंगदान होते हैं। मेरा निधन हो जाए तो अंगदान कर देना। उसकी इच्छा को ध्यान रखते हुए किडनी और लिवर दान करने का निर्णय लिया गया।

मासूम को मां के घर लौटने का इंतजार : नेहा की साढ़े तीन साल की बेटी हिरण्या पिता से कई दिन से पूछ रही है कि मम्मी आंखें बंद करके अस्पताल गई थीं, वो घर कब आएंगी। रविवार को भी घर में भीड़ देख पूछ रही थी कि इतने लोग क्यों आ रहे ह

खुशी है, बार-बार डायलिसिस नहीं करना पड़ेगा

- स्कीम 140 निवासी 60 वर्षीय महिला छह साल से किडनी की बीमारी से ग्रसित थीं। उन्हें डायलिसिस करवाना पड़ता था। उन्हें बांबे अस्पताल में किडनी प्रत्यारोपित की गई। बेटे ने कहा, इस बात की खुशी है कि मां को अब बार-बार डायलिसिस नहीं करवाना पड़ेगा।

- माणिकबाग क्षेत्र में रहने वाली 35 वर्षीय महिला चार साल से किडनी की बीमारी से ग्रस्त थीं। उन्हें सप्ताह में तीन बार डायलिसिस करवाना पड़ता था। रविवार को सीएचएल में किडनी प्रत्यारोपण किया गया। पति का कहना है कि जिस महिला की किडनी मेरी पत्नी को मिली, उनका बहुत बड़ा उपकार है।

फेफड़ों के लिए नहीं मिल सकी स्वीकृति

लिवर ट्रांसप्लांट की प्रक्रिया के लिए चोइथराम अस्पताल में दिल्ली के फोर्टीस अस्पताल के डा. आरिफ, डा. आशीष सिंघल और डा. अनिल अग्रवाल इंदौर आए थे। इनके साथ में चोइथराम अस्पताल के डा. सुदेश सारडा, डा. नीरज गुप्ता, डा. नितिन शर्मा की टीम मौजूद थी। ब्रेनडेड महिला की किडनी और लिवर के अलावा दोनों आंखों और त्वचा का भी दान किया गया। एमजीएम मेडिकल कालेज के डीन डा. संजय दीक्षित के मुताबिक नोटो के माध्यम से हमने देशभर के अस्पतालों में महिला के फेफड़े दान करने के लिए अलर्ट जारी किया था। दक्षिण भारत के कुछ अस्पतालों से चर्चा भी हो रही थी। महिला एक सप्ताह से वेंटिलेटर पर थी। तकनीकी कारणों से फेफड़े ट्रांसप्लांट के लिए किसी अस्पताल ने स्वीकृति नहीं दी।

Posted By: Prashant Pandey

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