
विंध्य की पर्वत माला का जाम गेट से यह चित्र हमारे फोटो जर्नलिस्ट राजू पवार ने लिया है। जाम गेट इंदौर-मंडलेश्वर मार्ग पर बना है, ये वादियां किसी के भी सफर को यादगार बना सकती हैं।
- 18वीं सदी में देवी अहिल्या ने जाम गेट चौकी बनवाई थी।
- जाम गांव पर बना यह गेट मालवा का प्रवेश द्वार कहलाता है।
- होलकरों की राजधानी महेश्वर थी और इंदौर-महेश्वर के बीच में काफिले के आराम के लिए इसे बनाया गया था।
- गांव में किले के साथ तालाब और बावड़ी का भी निर्माण करवाया गया। ये सभी ऐतिहासिक धरोहरें आज भी मौजूद हैं।
- देवी अहिल्या ने तलहटी में शिव मंदिर और बावड़ी भी बनाई थी, जहां पहुंचना आज भी आसान नहीं है।
- गांव वाले बताते हैं, पहाड़ से गिरते पानी से शिवलिंग का अभिषेक होता था, जो कुंड में जाता था।
- धुंध न हो तो नर्मदा नदी पतले चांदी के तार सी दिखाई देती है।
- यहां से खरगोन जिले की सीमा नजर आती है। मार्ग को फोरलेन बनाया जाना है।
- 40 किमी दूर है इंदौर से जामघाट।
ऐसे पहुंचे : निजी वाहन से इंदौर से महू होते हुए बड़गोंदा पहुंचे। वहां से मेण होते हुए जाम गेट पहुंच सकते हैं।