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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jul 13, 2025 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

GST News: दवाओं के कच्चे माल पर जीएसटी घटाने की मांग, इनवर्टेड ड्यूटी में उलझ रहा व्यापार

दवा निर्माताओं ने मांग उठाई है कि दवाओं के कच्चे माल और तैयार दवाओं पर जीएसटी की दर समान होनी चाहिए। वर्तमान में कच्चे माल पर 18% जीएसटी लगता है, जबकि...और पढ़ें

By Prashant PandeyEdited By: Prashant Pandey
Publish Date: Sun, 13 Jul 2025 01:33:34 PM (IST)Updated Date: Sun, 13 Jul 2025 01:36:10 PM (IST)
GST News: दवाओं के कच्चे माल पर जीएसटी घटाने की मांग, इनवर्टेड ड्यूटी में उलझ रहा व्यापार

HighLights

  1. दवा बनाने के कच्चे माल पर 18 प्रतिशत जीएसटी लागू होता है।
  2. दवाओं और कच्चे माल दोनों पर ही दर 5 प्रतिशत करने की मांग।
  3. जीएसटी काउंसिल की बैठक में इस पर हो सकता है बड़ा बदलाव।

नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। दवाओं के निर्माण के लिए जो कच्चा माल खरीदना पड़ रहा है, उस पर (टैक्स) की दर ज्यादा है जबकि तैयार दवाओं की बिक्री पर जीएसटी की दर कम है। दवा निर्माताओं के संगठन ने मांग उठाई है कि कच्चे माल और दवा के बीच जीएसटी के अलग-अलग रेट का भेद खत्म किया जाना चाहिए।

साथ ही दवा बनाने के मटैरियल और तैयार दवा दोनों पर जीएसटी की दर घटाकर पांच प्रतिशत के स्लैब में लाना चाहिए। यह मांग ठीक ऐसे समय उठाई गई है जब आने वाले दिनों में जीएसटी काउंसिल की अहम बैठक होने जा रही है। इसमें जीएसटी की स्लैब व अन्य प्रविधानों में आठ वर्षों में सबसे बड़े बदलाव की उम्मीद है।


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बेसिक ड्रग डीलर्स एसोसिएशन मप्र ने सरकार को पत्र लिखकर दवाओं के कच्चे माल और तैयार दवाओं दोनों पर जीएसटी की दर पांच प्रतिशत करने की मांग की है। एसोसिएशन ने इस संबंध में पत्र लिखा है और मांग की है कि प्रदेश की ओर से जीएसटी काउंसिल को इस बारे में प्रस्ताव भेजा जाना चाहिए। बेसिक ड्रग डीलर्स एसोसिएशन के महासचिव जयप्रकाश मूलचंदानी कहते हैं कि वर्तमान में दवा बनाने के कच्चे माल पर 18 प्रतिशत जीएसटी लागू होता है।

ब्रिक्री पर 12 प्रतिशत जीएसटी लगता है

इस मटैरियल से जो दवा तैयार होती है, उसकी बिक्री पर 12 प्रतिशत जीएसटी लगता है। टैक्स की दर का यह अंतर व्यापार में व्यावहारिक परेशानी पैदा कर रहा है। टैक्स के रूप में दवा कारोबारियों का छह प्रतिशत जीएसटी विभाग के पास जमा रहता है। जबकि निर्माण लागत बढ़ने से उपभोक्ताओं के लिए दवाएं महंगी हो जाती हैं। एसोसिएशन ने मांग रखी है कि दवाओं और कच्चे माल दोनों पर ही जीएसटी की दर पांच प्रतिशत की जानी चाहिए।

इनवर्टेड ड्यूटी के अलग नियम

कर सलाहकार आरएस गोयल के अनुसार जीएसटी कर प्रणाली में कई वस्तुओं में कच्चे माल पर अधिक व तैयार उत्पाद पर कम टैक्स लागू है। इसके लिए एक इनवर्टेड ड्यूटी स्ट्रक्चर लागू होता है। इसमें सरकार ने प्रविधान किया है कि कच्चे माल पर अधिक टैक्स देकर तैयार माल कम टैक्स पर बेचा जाता है तो जो टैक्स का अंतर होता है, उसका रिफंड दिया जाए।

व्यापारी को अधिकार होता है कि वह रिफंड हासिल करे। दवाओं के मामले में भी रिफंड का यह नियम लागू है। हालांकि रिफंड लेने के लिए कागजी कार्रवाई तो करना ही होगी। काउंसिल व्यापारियों को राहत देने के लिए कागजी कार्रवाई का बोझ कम कर प्रक्रिया को आसान बना सकती है।