
लोकेश सोलंकी, नईदुनिया, इंदौर। अधिकारी संतुष्ट नहीं हैं तो व्यापारी अपना जीएसटी रिटर्न दाखिल नहीं कर सकेंगे। जीएसटी एक्ट के नियमों से अलग स्टेट जीएसटी ने ये नियम लागू कर दिया है। स्टेट जीएसटी (एसजीएसटी) में रिटर्न में देरी करने पर जीएसटी पंजीयन निलंबित होते हैं। नियमानुसार इस निलंबन को बकाया टैक्स, पेनाल्टी, ब्याज चुकाने पर बहाल होना चाहिए।
स्टेट जीएसटी में सर्कल के अधिकारी इस नियम को ताक पर रख व्यवसायियों को मिलने बुला रहे हैं। इसके बाद संतुष्ट नहीं होने का बहाना देकर पंजीयन बहाल करने से रोक भी रहे हैं। व्यापारी ऊपर के अधिकारियों को शिकायत कर रहे हैं तो इसे विशेषाधिकार बता कर पल्ला झाड़ा जा रहा है।
बीते महीनों से लगातार व्यवसायी जीएसटी में लागू अधिकारियों के इस मनमाने रवैये की शिकायत कर रहे हैं। जीएसटी एक्ट के नियम कायदों के अनुसार कर प्रणाली में पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन होती है और किसी अधिकारी के दखल का प्रावधान नहीं है। इस बारे में विभाग के दफ्तर में दीवार पर सूचना देते पोस्टर चिपका रखे हैं। हालांकि व्यापारी के प्रक्रिया पूरी करने के बाद भी अधिकारी उसका पंजीयन बहाल नहीं करते।
नईदुनिया ने खुद मौके पर जाकर इसे परखा तो व्यापारियों की शिकायत सही निकली। सर्कल 15 में दो महीने से ज्यादा माह के रिटर्न दाखिल नहीं करने व्यवसायियों के पंजीयन निलंबित किए गए। इसके बाद लगातार सर्कल टैक्स अधिकारी व्यापारियों को दफ्तर आने के संदेश देते। मांग पूरी नहीं करने वाले व्यापारियों के पंजीयन बहाल नहीं किए जाते।
पिछले रिटर्न दाखिल नहीं करने पर नवंबर माह के मध्य में शिवसाईं एजेंसी नामक फर्म का पंजीयन निलंबित किया गया। पुराने रिटर्न के साथ टैक्स और पेनाल्टी जमा करने के बाद व्यापारी ने 19 जनवरी को पंजीयन बहाली का आवेदन विभाग में दिया। इसके बाद व्यापारी ने कई चक्कर स्टेट जीएसटी के दफ्तर के लगा दिए। आखिरकार 10 फरवरी को व्यापारी को नोटिस जारी कर रिटर्न में देरी का स्पष्टीकरण मांगा गया।
व्यापारी ने उसी दिन ऑनलाइन जवाब दाखिल किया। हालांकि व्यापारी अधिकारी से मिलने नहीं पहुंचा तो 25 फरवरी को व्यापारी को ऑनलाइन नोटिस मिला कि उसका पंजीयन निरस्त किया जाता है। कारण बताया गया कि जवाब संतुष्टिप्रद नहीं है। जबकि ऐसी कार्रवाई सिर्फ बोगस पंजीयन पर की जा सकती है, वह भी सात दिन के भीतर नोटिस जारी कर और भौतिक सत्यापन के बाद।
नईदुनिया प्रतिनिधि व्यापारी का साथी बनकर सर्कल 15 के सहायक आयुक्त अजय मुजाल्दे के पास पहुंचा। व्यापारी बनकर पंजीयन निरस्त करने की बात की। इस पर मुजाल्दे ने कहा कि आप तो कंपोजिशन डीलर हो। व्यापारी ने कहा कि नहीं, नियमित पंजीयन है। इसके बाद मुजाल्दे से जब पूछा गया कि टैक्स, पेनाल्टी चुकाने और कारण बताओ नोटिस का जवाब देने पर भी आपने पंजीयन निरस्त कर दिया।
मुजाल्दे ने कहा कि हम जवाब से संतुष्ट नहीं हैं। ऐसे तो आप छह-छह महीने शासन को टैक्स नहीं चुकाओगे। इसे आदत बना लोगे, इसलिए हम पंजीयन बहाल नहीं कर सकते। व्यापारी ने पूछा, रास्ता क्या है। इस पर मुजाल्दे ने कहा कि आप अपील करो और मैडम से मिल लेना।
यदि जवाब से अधिकारी संतुष्ट नहीं हैं तो वह पंजीयन बहाल नहीं करेगा। यह उसके क्षेत्राधिकार में है। इस बारे में बात मिलकर करिए, फोन पर जानकारी नहीं दे सकता। - धूलसिंह चौहान, उपायुक्त स्टेट जीएसटी