Health Tips : इंदौर (नईदुनिया प्रतिनिधि)। स्वस्थ रहने के लिए जितना आवश्यक व्यायाम और आहार है, उतना ही महत्वपूर्ण पाचनतंत्र का बेहतर होना भी है। पाचनतंत्र बेहतर रहे इसलिए आहार-विहार के साथ योग को भी अपनाना चाहिए। योग की धारणा के अनुसार मानव का अस्तित्व पांच भागों में बंटा हुआ है। इन्हें हम पंचकोष कहते हैं। योग में पंचकोष का विशेष महत्व है इसलिए योग से जुड़े विद्यार्थियों को इसकी जानकारी अवश्य होना चाहिए।
योग विशेषज्ञ डा. हेमंत शर्मा ने बताया कि अन्नमय कोष अन्न और भोजन से निर्मित होता है। इसका प्रभाव शरीर, मन और मसि्तष्क पर भी पड़ता है। यदि जीवनशैली अनियमित हो, आहार-विहार उचित नहीं रहे तो अन्नमय कोष बिगड़ जाता है। यदि अन्नमय कोष बिगड़ चुका है तो उसे सुधारा भी जा सकता है। इसे बेहतर बनाने के लिए उचित आसन और बेहतर व संयमित खानपान से संतुलित कर सकते हैं। दूसरा कोष प्राणमय कोष होता है। यह प्राणों से बना होता है। गलत तरीके से सांस लेने से इसमें परेशानी उत्पन्न हो जाती है।
मनोमय कोष बिगड़ने से चिड़चिड़ापन होता है - योग विशेषज्ञ डा. शर्मा ने बताया कि तीसरा कोष मनोमय कोष है। इसके बिगड़ने से चिड़चिड़ापन और तनाव होता है। इसे योग के यम और नियम से ठीक कर सकते हैं। इसके बाद विज्ञानमय कोष का क्रम आता है। यह अंतर्ज्ञान या सहज ज्ञान से बना हुआ है। आखिरी कोष आनंदमय कोष होता है। यह आनंदानुभूति से बना होता है। यह अगर अनियमित होता है तो ध्यान के माध्यम से इसे ठीक कर सकते हैं। आसन, प्राणायाम और ध्यान के जरिए सभी कोषों को बेहतर बनाया जा सकता है। पाचनतंत्र बेहतर बनाने के लिए वज्रासन उपयुक्त आसन है। नौकासन और धनुरासन भी लाभकारी आसन हैं। यह दोनों आसन पेट के बल किए जाते हैं। इसका फायदा मोटापा, पाचन और भूख न लगने वाली समस्या में मिलता है।
सरल आसनों से करेंगे शुरुआत - आसनों का अभ्यास करने से पहले सूक्ष्म व्यायाम करना चाहिए। इसके बाद प्राणायाम लाभकारी होता है। यदि उम्र ज्यादा है या पहले कभी योगाभ्यास नहीं किया तो वे लोग योग की शुरुआत सरल आसनों से करें। शुरुआत में जोड़ों का संचालन और श्वसन का अभ्यास करना चाहिए। इसके बाद रीढ़ की हड्डी से जुड़े और अन्य सामान्य आसन करने चाहिए। 60 वर्ष से ज्यादा उम्र वालों को खाना भी आधा कर देना चाहिए। इसकी जगह फल और अन्य सुपाच्य आहार बढ़ाना चाहिए। हास्य और प्रसन्नता को भी बनाए रखना चाहिए।