
Historical Places in MP टीम नईदुनिया, मालवा-निमाड़। मध्य प्रदेश का मालवा-निमाड़ पुरातात्विक महत्व की विपुल संपदाओं से भरा समृद्ध क्षेत्र है। यह देश के सबसे पुराने, सबसे प्राचीन हिस्सों में से एक है। यह क्षेत्र प्राचीन सभ्यता का प्रत्यक्ष गवाह रहा है। इतिहास के नजरिये से यह पाया गया है कि यहां पाषाणकालीन व्यवस्था से लेकर वर्तमान इतिहास तक का शृंखलाबद्ध जुड़ाव रहा है।
वर्तमान समय में ये अमूल्य धरोहर उपेक्षित हो रही है। पुरातात्विक और ऐतिहासिक तथ्यों को भी नजरअंदाज ही किया जा रहा है। चित्रकला, प्राचीन गुफाओं और प्राचीन मूर्तियों के मामले में धार जिले का बाग, मांडू, ओंकारेश्वर, उज्जैन क्षेत्र अधिक समृद्ध हैं। इन प्राचीन धरोहरों की उचित रखरखाव और प्रचार-प्रसार के लिए शासन ने योजनाएं बनाई हैं। काम चल रहा है, लेकिन कई जगह अपेक्षित परिणाम अभी तक प्राप्त नहीं हुए हैं तो कई जगह पहुंच मार्ग जर्जर हैं। जनप्रतिनिधियों की उदासीनता इनके संरक्षण के आड़े आ रही है। इस इस संदर्भ में नईदुनिया की पड़ताल
उज्जैन में कई प्राचीन मंदिर और धरोहरें हैं। ज्योतिर्लिंग परिसर में श्री महाकाल महालोक के साथ ही अन्य प्राचीन मंदिरों और धरोहरों के सुंदरीकरण आदि के लिए योजना बनाई है। हालांकि प्रमुख मंदिरों को छोड़ अन्य कुछ देवस्थानों पर योजनाओं के अनुसार काम नहीं हो पाए हैं। गया कोठा तीर्थ, 84 महादेव मंदिर आदि इसके उदाहरण हैं। सांसद अनिल फिरोजिया का कहना है कि मंदिरों के लिए योजनाएं हैं। इसके अनुसार काम भी हो रहे हैं। अन्य देवस्थानों व धरोहरों के लिए भी योजनाएं बनाकर काम कराएंगे।
खरगोन जिला पुरातात्विक धरोहर है। यहां 11वीं शताब्दी के मंदिर, शिवालय और अन्य पौराणिक धार्मिक स्थल है। कई जगह मंदिर जीर्ण-शीर्ण है। ऊन स्थित मंदिरों में 15 साल पहले जीर्णोद्धार किया था। चोली, सिरवेल महादेव, बिजागढ़, नन्हेश्वर महादेव आदि जगह मंदिर जीर्ण शीर्ण है। पुरातत्व विभाग व कलेक्टर को इनका जीर्णोद्धार करवाना चाहिए। सांसद गजेंद्र सिंह पटेल का कहना है कि इन धरोहरों को संवारा जाएगा।
मंदसौर पुरातात्विक संपदा से समृद्ध जिले में जगह-जगह धरोहरें बिखरी पड़ी हैं। जिले में केंद्र सरकार द्वारा संरक्षित चार स्मारक एवं राज्य सरकार द्वारा संरक्षित 11 स्मारक हैं। इनमें से कुछ स्थानों को पुरातत्व व धार्मिक पर्यटन के रूप में जोड़ने की कुछ कोशिशें शुरू हुई हैं। पहले चरण में गांधीसागर अभयारण्य क्षेत्र में हिंगलाजगढ़ किला, होलकर छतरी भानपुरा व धर्मराजेश्वर चंदवासा की सुध पुरातत्व विभाग ने ली है। सौंधनी, खिलचीपुरा के सूर्य मंदिर सहित अन्य स्थानों को अभी भी अनुरक्षण की दरकार है। संरक्षित घोषित होने के बाद भी कई धरोहरें नष्ट हो रही हैं। अधिकांश जगह पहुंचने के लिए आवागमन के साधन नहीं होने से पर्यटन को भी बढ़ावा नहीं मिल रहा है।
शाजापुर जिले में कई पुरातत्व धरोहर हैं, किंतु देखरेख के अभाव में इनकी उपेक्षा रही हैं। वहीं प्रचार-प्रसार नही होने से कई लोगों को इन धरोहरों के बारे में जानकारी नहीं है। शाजापुर में गांधी हाल के पीछे कक्ष में संचालित जिला पुरातत्व संग्रहालय में पाषाण प्रतिमाएं व अन्य प्राचीन कलाकृतियां रखी हुई हैं। यहां 10वीं शताब्दी की भगवान सूर्य की प्राचीन प्रतिमा भी मौजूद है, शुजालपुर क्षेत्र से खुदाई में मिली थी। बीजानगरी से मिली ब्रह्मा, पिपलिया नगर से मिली हरगौरी, चायनी सुंदरसी और अन्य स्थानों से मिली प्राचीन प्रतिमा भी यहां मौजूद हैं। इसके अलावा भी जिले में कई पुरात्व धरोहर हैं।