यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Apr 20, 2024 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
History Of Indore: इंदौर में इस तरह हुई थी बैंक की शुरुआत
इंदौर स्थित ब्रिटिश रेसीडेंसी तथा रिजेंसी काउंसिल के सदस्यों ने इस बैंक को स्थापित करने में अहम भूमिका अदा की थी।
By Nai Dunia News NetworkEdited By: Nai Dunia News Network
Publish Date: Sat, 20 Apr 2024 12:53:33 PM (IST)Updated Date: Sat, 20 Apr 2024 12:53:32 PM (IST)
इंदौर में बैंक की शुरुआत History Of Indore: नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। प्रदेश की आर्थिक राजधानी बन चुके इंदौर में बेशक आज कई बैंक हैं, लेकिन एक दौर ऐसा भी था जब यहां बैंक खोले जाने की कल्पना भी लोगों ने नहीं की थी। इंदौर में वर्ष 1908 में सर्वप्रथम रेसीडेंसी क्षेत्र में बैंक आफ बाम्बे की शाखा शुरू हुई थी। इसी बैंक को शहर में बैंकिंग क्रांति का आरंभ-बिंदु माना जाता है। यह बैंक इंदौर राज्य प्रशासन, ब्रिटिश प्रशासन, स्थानीय बैंकर्स तथा शहर के प्रमुख व्यापारी वर्ग द्वारा जनता के लिए शुरू की गई थी।
इतिहासकार उमेश कुमार नीमा ने बताया कि
इंदौर स्थित ब्रिटिश रेसीडेंसी तथा रिजेंसी काउंसिल के सदस्यों ने इस बैंक को स्थापित करने में अहम भूमिका अदा की थी। वर्ष 1920 तक इंदौर शहर में औद्योगिक व वाणिज्यिक समृद्धि ने तेजी पकड़ना आरंभ दी थी।
दरअसल, वर्ष 1920 में इंदौर में उद्योग, व्यापार और व्यवसाय की वृद्धि होने पर उनके लिए अर्थ का प्रबंध करने के लिए एक बैंक की आवश्यकता महसूस की गई। तब यहां केवल बैंक आफ बाम्बे की शाखा कार्यरत थी। वर्ष 1920 में देश में तीन प्रेसीडेंसी बैंक प्रमुखता से कार्य कर रही थीं- बैंक आफ बंगाल, बैंक आफ बाम्बे तथा बैंक आफ मद्रास। कालांतर में इन तीनों बैंकों का विलय कर इंपीरियल बैंक आफ इंडिया बनाई गई।
1920 में खुली पहली शाखा
वर्ष 1920 में शहर के रेसीडेंसी क्षेत्र में इसकी पहली शाखा खोली गई। बैंक आफ बाम्बे को तब इंपीरियल बैंक आफ इंडिया (वर्तमान जीपीओ शाखा) के रूप में पहचाना जाने लगा। वर्ष 1955 में यह बैंक स्टेट बैंक आफ इंडिया बनकर देश का प्रथम राष्ट्रीयकृत बैंक कहलाया। 23 मार्च 1920 को इंदौर के 11 पंचों ने तत्कालीन इंदौर राज्य के प्रशासन से एक करोड़ की पूंजी के साथ एक बैंक खोलने का अनुरोध किया, जिसे स्वीकृत कर लिया गया। यह 11 पंच एक संस्था के रूप में कार्यरत थे और इनके निर्णय को उच्च व अंतिम माना जाता था।
इस अधिकृत पूंजी में इंदौर प्रशासन (होलकर प्रशासन) ने बैंक आफ इंदौर लिमिटेड की शुरुआत की। बैंक के संचालन के लिए यूरोपियन मैनेजर तथा बोर्ड आफ डायरेक्टर की नियुक्ति की गई। पहले बैंक की शाखाओं का क्षेत्र मालवा के प्रमुख कस्बे थे, परंतु मध्य प्रदेश राज्य का गठन होने तथा देश में लोकतंत्र लागू होने के बाद सिंधिया घराने के क्षेत्र में भी शाखाएं खोली गईं।
वर्ष 1955 में इंपीरियल बैंक का राष्ट्रीयकरण होकर यह स्टेट बैंक आफ इंडिया बन गया। वर्ष 1959 में स्टेट बैंक आफ इंडिया सब्सीडियरी एक्ट बना और तब इंदौर बैंक भी स्टेट बैंक आफ इंदौर बन गया। 15 जुलाई 2020 को तत्कालीन केंद्र सरकार ने इसका विलय स्टेट बैंक आफ इंडिया के साथ किया और इंदौर का 100 वर्ष पुराना बैंक इतिहास की कहानी बनकर विलीन हो गया।