
इंदौर। अंधेरा, अकेलापन और उदासी। शहर का एक परिवार 6 साल से अपने ही घर में कैद है। परिवार का हर सदस्य मायूसीभरी जिंदगी जी रहा है। यहां न कोई आता है और न ही इस परिवार के सदस्य कहीं जाते हैं। एचआईवी पॉजीटिव का पता चलते ही समाज में उनकी जिंदगी निगेटिव हो गई है।
जंजीरवाला चौराहा के पास रहने वाले एक परिवार में माता-पिता और दो बच्चे हैं। 35 साल का रमेश है और 30 साल की प्रीति (दोनों नाम परिवर्तित)। दोनों एचआईवी एड्स से पीड़ित हैं। जब बड़ा बेटा भविष्य पेट में था तब प्रीति को पता चला कि उसे एड्स है।
पढ़ें : कर्ज चुकाने के लिए किसानों ने गड़रियों को बच्चे दिए किराए पर
आज वह छ: साल का है, चार साल की बेटी परी भी है। दोनों बच्चे एचआईवी निगेटिव हैं। बच्चे स्कूल जाने की उम्र में पहुंच चुके हैं, लेकिन माता-पिता की अंधेरी दुनिया की वजह से उनके पास शिक्षा की रोशनी नहीं है।
बस हमारे बच्चों की जिंदगी बच जाए
प्रीति कहती है कि हमसे कोई बात करना पसंद नहीं करता। मायके वालों ने भी रिश्ता ताेड लिया। कोई कार्यक्रमों में नहीं बुलाता। मुझे तो सालों हो गए घर से बाहर निकले हुए। अभी पति आठ दिन अस्पताल में भर्ती थे तो अकेले ही इलाज करवाया। हमें तो अंधेरे में जीने की आदत हो गई है, बस बच्चों की जिंदगी बच जाए, यहीं चाहते हैं।
पढ़ें : यू-ट्यूब पर कोरबा के फिजिक्स लेक्चरर की धूम, गूगल का बुलावा
पढ़ाई की व्यवस्था करवाएंगे
हमारे पास बच्चों की मदद का केस आया है। उनकी पढ़ाई-लिखाई का खर्च उठाने के लिए डोनर को तैयार करेंगे। किसी स्कूल में दोनों का एडमिशन करवाएंगे। दोनों बच्चे दिमागी रूप से तेज हैं और पढ़ना चाहते हैं। -अविनाश वर्मा, समन्वयक, चाइल्ड लाइन