
Hukamchand Mill Indore: नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। हुकमचंद मिल के 5895 मजदूर और स्वजन का 32 वर्ष का इंतजार मंगलवार को खत्म हो गया। मंगलवार दोपहर मुख्यमंत्री डा. मोहन यादव ने मजदूरों और मिल के अन्य देनदारों के भुगतान के प्रस्ताव पर हस्ताक्षर किए और देर शाम ही सभी देनदारों के खाते में पैसा पहुंचा दिया गया।
बड़े ही हर्ष का विषय है कि यशस्वी मुख्यमंत्री @DrMohanYadav51 जी द्वारा हुकुमचंद मिल मजदूर बंधुओं को मिलने वाली राशि को औपचारिक स्वीकृति प्रदान कर दी गई है। शीघ्र ही सिंगल क्लिक के माध्यम से हुकुमचंद मिल के मजदूर बंधुओं की राशि का वितरण माननीय मुख्यमंत्री जी द्वारा किया जाएगा।… pic.twitter.com/LnXSkEGh3k
— Pushyamitra Bhargav (@advpushyamitra) December 19, 2023
मजदूरों के भुगतान के लिए परिसमापक के खाते में 217 करोड़ 89 लाख रुपये का भुगतान पहुंच चुका है। अब यह पैसा वहां से खातों की जांच के बाद मजदूरों के खाते में पहुंचेगा। बुधवार को हुकमचंद मिल मामले में हाई कोर्ट में होने वाली सुनवाई में इस पूरे घटनाक्रम की जानकारी शासन कोर्ट को देगा। हाउसिंग बोर्ड ने करीब डेढ़ सप्ताह पहले ही मिल के देनदारों के लिए 425 करोड़ 89 लाख रुपये स्टेट बैंक आफ इंडिया (एसबीआइ) की भोपाल शाखा में जमा करा दिए थे।
मजदूरों के खाते में पहुंचने का सिलसिला संभवत: 26 दिसंबर को मुख्यमंत्री की उपस्थिति में होगा। 32 वर्ष पहले 12 दिसंबर 1991 को हुकमचंद मिल बंद हुई थी। हाई कोर्ट ने 6 अगस्त 2007 को मजदूरों के पक्ष में मुआवजा तय किया था, लेकिन इस राशि का पूरा भुगतान मजदूरों को नहीं हो सका। वर्ष 2017 में कोर्ट के आदेश पर शासन ने मजदूरों के लिए 50 करोड़ रुपये जारी किए थे।
मजदूरों का भुगतान मिल की जमीन को बेचकर होना था, लेकिन जमीन बिक नहीं सकी। हाल ही में मप्र गृह निर्माण मंडल ने नगर निगम के साथ मिलकर मिल की जमीन पर व्यावसायिक और आवासीय प्रोजेक्ट लाने को लेकर सहमति जताते हुए समझौता किया है। कोर्ट के आदेश के बाद गृह निर्माण मंडल ने मिल के देनदारों को देने के लिए 425 करोड़ 89 लाख रुपये की राशि बैंक में जमा भी करा भी दी।
महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने मिल की जमीन पर आइटी पार्क लाकर, जमीन बेचकर मजदूरों के भुगतान की योजना बनाई थी। बाद में शासन स्तर पर तय हुआ कि जमीन हाउसिंग बोर्ड की दी जाए और वह वहां प्रोजेक्ट लाएगा। हाई कोर्ट ने मंडल को बकाया राशि भुगतान के आदेश भी दे दिए। आचार संहिता के कारण यह मामला अटक गया था। बाद में हाई कोर्ट की फटकार और चुनाव आयोग की मंजूरी के बाद मप्र गृह निर्माण मंडल ने यह राशि बैंक में जमा करा दी थी। आचार संहिता समाप्त होते प्रस्ताव पर मुहर लग गई। इसके बाद मंगलवार को सीएम डा. यादव ने फाइल पर स्वीकृति की मुहर लगाई।
हम लगातार इस मामले के समाधान के प्रयास में लगे थे। हमारा उद्देश्य था कि श्रमिकों को उनका हक मिले। संतोष है कि श्रमिकों को उनका अधिकार आखिरकार मिलना सुलभ हुआ। - पुष्यमित्र भार्गव, महापौर
करीब 32 वर्ष पहले 12 दिसंबर 1991 को हुकमचंद मिल बंद हुआ था। इसके बाद से मिल के 5895 मजदूर और उनके स्वजन अपने बकाया भुगतान के लिए भटक रहे थे। हाई कोर्ट ने 6 अगस्त 2007 को हाई कोर्ट ने मिल के मजदूरों के पक्ष में 228 करोड़ 79 लाख 79 हजार 208 रुपये मुआवाज तय किया था, लेकिन इस रकम का पूरा भुगतान मजदूरों को नहीं हो सका। वर्ष 2017 में जरूर कोर्ट के आदेश पर शासन ने मजदूरों के लिए 50 करोड़ रुपये जारी किए थे। मजदूरों का भुगतान मिल की जमीन को बेचकर होना था, लेकिन जमीन बिक नहीं सकी।
हुकुमचंद मिल के मजदूरों को मिलेगी बकाया राशि।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इंदौर की हुकुमचंद मिल के मजदूरों को मिलने वाली ₹464 करोड़ की बकाया राशि से संबंधित फाइल पर हस्ताक्षर कर अपनी स्वीकृति प्रदान की।@DrMohanYadav51 pic.twitter.com/4AJTk0ZtEL
— Chief Minister, MP (@CMMadhyaPradesh) December 19, 2023
हाउसिंग बोर्ड बैंक खाते में जमा कर चुका है राशि
हाल ही में मप्र गृह निर्माण मंडल ने नगर निगम के साथ मिलकर मिल की जमीन पर व्यावसायिक और आवासीय प्रोजेक्ट लाने को लेकर सहमति जताते हुए समझौता किया है। कोर्ट के आदेश के बाद गृह निर्माण मंडल ने मिल के देनदारों को देने के लिए 425 करोड़ 89 लाख रुपये की रकम बैंक में जमा भी करा भी दी है। इस रकम में से 217.86 करोड़ रुपये मजदूरों को दिए जाने हैं, जबकि शेष रकम मिल के अन्य देनदार जिनमें कई बैंक आदि शामिल हैं, को देना हैं। मुख्यमंत्री के हस्ताक्षर के बाद यह रकम मिल के देनदारों के खाते में भेजी जाएगी।
कमल निशान
गरीब कल्याण...!!!
भारतीय जनता पार्टी की सरकार ने मध्य प्रदेश में हर ओर खुशहाली पहुंचाने का काम किया है।
इसी क्रम में अब इंदौर के हुकुमचंद मिल के कामगार भाईयों के लिए राहत भरी खबर आई है। आज भोपाल में मुख्यमंत्री डॉ.मोहन यादव जी ने कामगारों के बकाया भुगतान के लिए 464… pic.twitter.com/5xnjgHKX3E
— Kailash Vijayvargiya (@KailashOnline) December 19, 2023
आचार संहिता ने अटकाया था रोड़ा
महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने मिल की जमीन पर आइटी पार्क लाकर, जमीन बेचकर मजदूरों के भुगतान की योजना बनाई थी। बाद में शासन स्तर पर तय हुआ कि जमीन हाउसिंग बोर्ड को दी जाए और वह वहां प्रोजेक्ट लाएगा। नगर निगम ने भी इसे सैद्धांतिक मंजूरी दी। हाई कोर्ट ने मंडल को बकाया राशि भुगतान के आदेश भी दे दिए। आचार संहिता के कारण यह मामला अटक गया था। बाद में हाई कोर्ट की फटकार और चुनाव आयोग की मंजूरी के बाद मप्र गृह निर्माण मंडल ने यह राशि बैंक में जमा करा दी।
अब हो सकेगा मिल की जमीन का उपयोग
आचार संहिता समाप्त होते ही परिषद सम्मेलन बुलाया गया और प्रस्ताव पर मुहर लग गई। इसके बाद मंगलवार को मुख्यमंत्री ने फाइल पर स्वीकृति की मुहर लगा दी। सीए संतोष मुछाल ने बताया कि मजदूर के अलावा बैंक और अन्य देनदार पांच हजार करोड़ से ज्यादा का क्लेम कर रहे थे, लेकिन अब समझौते के बाद मिल की जमीन का उपयोग हो सकेगा