
Hukamchand Mill Indore: इंदौर (नईदुनिया प्रतिनिधि)। इंदौर की हुकमचंद मिल के 5895 मजदूर और उनके स्वजन पिछले 31 वर्षों से न्याय के लिए भटक रहे हैं। 12 दिसंबर 1991 को मिल प्रबंधन ने मिल बंद कर दी थी। इसके बाद से ये लोग न्याय की उम्मीद में दर-बदर भटक रहे हैं। हर रविवार ये मजदूर मिल के गेट पर जमा होते हैं। अपना दुख एक-दूसरे से साझा करते हैं और एक-दूसरे को सांत्वना देते हुए रवाना हो जाते हैं कि आज नहीं तो कल न्याय मिलेगा जरूर।
पिछले तीन दशक से हर रविवार को होने वाली यह बैठक नियमित रूप से जारी है। 11 दिसंबर रविवार को भी हर बार की तरह बैठक हुई। मजदूर और उनके स्वजन ने मृतक मजदूरों को श्रद्धांजलि अर्पित की। एक दिवंगत मजदूर की पुत्री पिता के कपड़ों के साथ श्रद्धांजलि सभा में शामिल हुई कि मेरे पिता कहा करते थे कि अगर मैं न रहूं तो भी मिल के हर संघर्ष में मेरे कपड़े ले जाकर मेरी उपस्थिति दर्ज कराना। यह सुनकर बैठक में मौजूद हर व्यक्ति भावुक हो उठा।
तीन दशकों से कोर्ट में चल रहा मामला - हुकमचंद मिल का मामला करीब तीन दशकों से न्यायालय में चल रहा है। वर्ष 2007 में हाई कोर्ट ने मिल मजदूरों के पक्ष में 229 करोड़ रुपये का मुआवजा स्वीकृत किया था। मजदूरों को यह रकम मिल की जमीन बेचकर दी जानी थी, लेकिन जमीन बिक नहीं पा रही है। जमीन आसानी से बिक सके, इसके लिए मिल की जमीन का लैंड यूज भी बदल दिया गया लेकिन कुछ नहीं हुआ।
अब नगर निगम से जागी आस - हाल ही में नगर निगम परिषद ने मिल की जमीन को विकसित करने का संकल्प पास किया है जिसके बाद मजदूरों को उम्मीद है कि जल्दी ही उन्हें मुआवजा मिल जाएगा। हालांकि, अब तक इसकी कोई अधिकृत घोषणा नहीं हुई है। मजदूर नेता नरेंद्र श्रीवंश, हरनामसिंह धालीवाल ने बताया कि रविवार को भी पांच सौ से ज्यादा मजदूर बैठक में शामिल हुए। मिल के करीब 2200 मजदूरों की अब तक मृत्यु हो चुकी है। बैठक में उन सभी को श्रद्धांजलि अर्पित की गई।
मिल एक नजर में -