• Jagran.com
  • Jagran Josh
  • Her Zindagi
  • Onlymyhealth
  • Jagran TV
  • Vishvas News
  • Inextlive
मेरी खबरें
  • होम
  • ताजा खबरें
  • मध्यप्रदेश
  • छत्तीसगढ़
  • उत्तर प्रदेश
  • देश
  • धर्म
  • मनोरंजन
  • राशिफल
  • लाइफस्टाइल
  • अन्य
    • बिज़नेस
    • बड़ी खबरें
    • खेल
    • विदेश
    • करियर
    • टॉपिक्स
    • टेक्नोलॉजी
    • शिक्षा
  • राज्य चुनें
  • ई-पेपर
  • राशिफल
  • राज्य चुनें
  • ई-पेपर
  • फटाफट
  • राशिफल
  • वेब स्टोरीज
नईदुनिया ट्रेंडिंग
  • बढ़ता यूपी
  • समृद्ध उत्तराखंड
  • Mutual Funds मास्टरी
  • होम
  • मध्य प्रदेश
  • इंदौर

यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Dec 12, 2022 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

Hukamchand Mill Indore: 31 वर्ष पहले आज ही के दिन बंद हुई थी इंदौर की हुकमचंद मिल

Hukamchand Mill Indore: मुआवजे के लिए खत्म नहीं हो रहा हुकमचंद मिल के मजदूरों का इंतजार, न्यायालयों के चक्कर काटते-काटते दो हजार से ज्यादा मजदूरों की ...और पढ़ें

By Hemraj YadavEdited By: Hemraj Yadav
Publish Date: Mon, 12 Dec 2022 04:36:31 PM (IST)Updated Date: Mon, 12 Dec 2022 04:36:31 PM (IST)
Hukamchand Mill Indore: 31 वर्ष पहले आज ही के दिन बंद हुई थी इंदौर की हुकमचंद मिल

Hukamchand Mill Indore: इंदौर (नईदुनिया प्रतिनिधि)। इंदौर की हुकमचंद मिल के 5895 मजदूर और उनके स्वजन पिछले 31 वर्षों से न्याय के लिए भटक रहे हैं। 12 दिसंबर 1991 को मिल प्रबंधन ने मिल बंद कर दी थी। इसके बाद से ये लोग न्याय की उम्मीद में दर-बदर भटक रहे हैं। हर रविवार ये मजदूर मिल के गेट पर जमा होते हैं। अपना दुख एक-दूसरे से साझा करते हैं और एक-दूसरे को सांत्वना देते हुए रवाना हो जाते हैं कि आज नहीं तो कल न्याय मिलेगा जरूर।

पिछले तीन दशक से हर रविवार को होने वाली यह बैठक नियमित रूप से जारी है। 11 दिसंबर रविवार को भी हर बार की तरह बैठक हुई। मजदूर और उनके स्वजन ने मृतक मजदूरों को श्रद्धांजलि अर्पित की। एक दिवंगत मजदूर की पुत्री पिता के कपड़ों के साथ श्रद्धांजलि सभा में शामिल हुई कि मेरे पिता कहा करते थे कि अगर मैं न रहूं तो भी मिल के हर संघर्ष में मेरे कपड़े ले जाकर मेरी उपस्थिति दर्ज कराना। यह सुनकर बैठक में मौजूद हर व्यक्ति भावुक हो उठा।


तीन दशकों से कोर्ट में चल रहा मामला - हुकमचंद मिल का मामला करीब तीन दशकों से न्यायालय में चल रहा है। वर्ष 2007 में हाई कोर्ट ने मिल मजदूरों के पक्ष में 229 करोड़ रुपये का मुआवजा स्वीकृत किया था। मजदूरों को यह रकम मिल की जमीन बेचकर दी जानी थी, लेकिन जमीन बिक नहीं पा रही है। जमीन आसानी से बिक सके, इसके लिए मिल की जमीन का लैंड यूज भी बदल दिया गया लेकिन कुछ नहीं हुआ।

अब नगर निगम से जागी आस - हाल ही में नगर निगम परिषद ने मिल की जमीन को विकसित करने का संकल्प पास किया है जिसके बाद मजदूरों को उम्मीद है कि जल्दी ही उन्हें मुआवजा मिल जाएगा। हालांकि, अब तक इसकी कोई अधिकृत घोषणा नहीं हुई है। मजदूर नेता नरेंद्र श्रीवंश, हरनामसिंह धालीवाल ने बताया कि रविवार को भी पांच सौ से ज्यादा मजदूर बैठक में शामिल हुए। मिल के करीब 2200 मजदूरों की अब तक मृत्यु हो चुकी है। बैठक में उन सभी को श्रद्धांजलि अर्पित की गई।

मिल एक नजर में -

  • 12 दिसंबर 1991 को बंद हुई थी मिल
  • 5895 मजदूर काम करते थे उस वक्त
  • 2200 से ज्यादा मजदूरों का निधन हो चुका है
  • 69 मजदूर कर चुके हैं आत्महत्या
  • 575 मृत मजदूरों की पत्नियों की भी मृत्यु हो चुकी है
  • 300 मजदूर गंभीर बीमारी के चलते बिस्तरों में हैं
  • 50 मजदूर भिक्षावृत्ति कर गुजर-बसर कर रहे हैं
  • 20 जुलाई 2001 को कोर्ट ने परिसमापक की नियुक्ति की थी
  • 6 अगस्त 2007 को कोर्ट ने मजदूरों का दावा स्वीकारते हुए करीब 229 करोड़ का मुआवजा स्वीकारा था
  • 4 बार मिल की जमीन की नीलामी निकल चुकी है
  • 50 करोड़ मुआवजा मार्च 2017 में कोर्ट ने दिलवाया था मजदूरों को