
IIM Indore: आदर्श कुमार सिंह, इंदौर। भारतीय प्रबंध संस्थान (आइआइएम) इंदौर आज अपना 27वां स्थापना दिवस मना रहा है। इस संस्थान की स्थापना 1996 में हुई थी। इन 27 वर्षों में आइआइएम इंदौर ने देश और दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाई है। देश में रोजगार की समस्या से लेकर स्वच्छता को बढ़ावा देने तक के प्रयास यहां किए गए हैं। दिल्ली, मुंबई और बेंगलुरू जैसे महानगरों को पछाड़कर इंदौर स्वच्छता में शीर्ष पर है तो उसके पीछे सक्रिय सरकारी मशीनरी व जनसहभागिता के अलावा आइआइएम इंदौर का योगदान भी कम नहीं है। अब आइआइएम इंदौर स्वच्छता का पाठ दूसरे शहरों को भी पढ़ा रहा है।
कानून व्यवस्था में सुधार, ट्रैफिक मैनेजमेंट और स्थानीय कला को प्रमोट करने के लिए संस्थान ने कई एमओयू साइन किए हैं। इससे आने वाले समय में बड़े बदलाव भी देखने को मिलेंगे। पर्यावरण की बेहतरी के लिए भी संस्थान लगातार प्रयासरत है। ऐसे विभिन्न प्रयोगों से आइआइएम इंदौर मध्य प्रदेश के गौरव में चार चांद लगा रहा है।
बिजनेस स्कूलों में दूसरे स्थान पर आइआइएम इंदौर
आइआइएम इंदौर ने महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय प्रभाव वाले शीर्ष बिजनेस स्कूल के तहत एडुनिवर्सल 4 पाल्म्स रैंकिंग 2022 में भारत के सभी बी-स्कूलों में दूसरा स्थान प्राप्त किया है। संस्थान ने इस श्रेणी में सभी आइआइएम की सूची में भी दूसरा स्थान हासिल किया है। हर वर्ष एडुनिवर्सल रैंकिंग के अंतर्गत नौ भौगोलिक क्षेत्रों से शीर्ष बिजनेस स्कूलों को पुरस्कृत किया जाता है।
इनमें अफ्रीका, मध्य एशिया, पूर्वी यूरोप, यूरेशिया, मध्य पूर्व, सुदूर पूर्व एशिया, लैटिन अमेरिका, उत्तरी अमेरिका, पश्चिमी यूरोप और ओशनिया शामिल हैं। इसके अलावा शिक्षा मंत्रालय द्वारा जारी नेशनल इंस्टीट्यूशनल फ्रेम वर्क रैंकिंग (एनआइआरएफ) 2023 में आइआइएम इंदौर को आठवां स्थान मिला था। वहीं संस्थान को प्रतिष्ठित फाइनेंशियल टाइम्स (एफटी) रैंकिंग 2023 में 89वां स्थान मिला है।
सस्टेनेबिलिटी को बढ़ावा दे रहा संस्थान
आइआइएम इंदौर ने पर्यावरण की बेहतरी के लिए अपने 193 एकड़ परिसर के विभिन्न भवनों की छत पर सोलर पैनल स्थापित किए हैं। इससे बिजली की खपत में कमी आई है। इसके चलते संस्थान ने अपने पुराने आडिटोरियम, प्रशासनिक ब्लाक, विद्यार्थियों के पांच छात्रावास, मेस और एकेडमिक ब्लाक में 4600 वर्ग मीटर के रूफटाफ पर पैनल लगाए हैं। इससे छह महीने में संस्थान को बिजली की खपत में 11.8 फीसदी की बचत हुई है।
प्लास्टिक मुक्त कैंपस, ढाई लाख लीटर पानी की बचत
आइआइएम इंदौर ने कैंपस में प्लास्टिक की सभी प्रकार की बोतलों के उपयोग पर रोक लगा रखी है। संस्थान ने पानी की खपत कम करने के लिए परिसर में खास तरह की टोटियां लगाई गई हैं। इनकी मदद से रोजाना करीब दो से ढाई लाख लीटर पानी की बचत करने में मदद मिलती है। साथ ही संस्थान में अपने रसोई के कचरे का दोबारा उपयोग किया जाता है। यहीं पर खाद का उत्पादन होता है, जिसे उद्यान में सब्जी की खेती के लिए उपयोग किया जाता है।
आर्गेनिक गार्डन में तैयार हो रहीं 12 टन सब्जियां
आइआइएम इंदौर ने अपना आर्गेनिक गार्डन तैयार किया है। यहां कम जमीन पर ज्यादा मात्रा में सब्जियां फल उगाने का अनोखा रिकार्ड भी स्थापित किया गया है। यहां 25 हजार वर्ग फीट जमीन पर सब्जियां उगाई जा रही हैं। इसमें औषधि भी उगाई जाती है। यहां करीब 10 से 12 टन फल और जैविक सब्जियों का उत्पादन हर वर्ष किया जाता है। इसे संस्थान के सदस्यों को निश्शुल्क वितरण किया जाता है। इन्हें तैयार करने में कोई भी केमिकल और पेस्टीसाइड का उपयोग नहीं किया जाता है।
स्वच्छता की जागरूकता के लिए अन्वेषण की शुरुआत
आइआइएम इंदौर में सेंटर आफ एक्सीलेंस अन्वेषण की शुरुआत की गई। इस पहल से देशभर में स्वच्छता के लिए जागरूकता बढ़ाई जाएगी। अन्वेषण आइआइएम द्वारा चलाया जा रहा कोर्स है, जिससे देशभर के निगम आयुक्त और वरिष्ठ अधिकारी स्वच्छता से जुड़ी ट्रेनिंग लेते हैं। अपशिष्ट प्रबंधन और वाश (जल, स्वच्छता और सफाई) पर केंद्रित अन्वेषण की पहली बैच का समापन भी हो चुका है।
100 प्रतिशत प्लेसमेंट, विदेशों में चल रहे स्पेशलाइज्ड प्रोग्राम
आइआइएम इंदौर में 100 प्रतिशत विद्यार्थियों का प्लेसमेंट हर वर्ष होता है। यहां पिछले वर्ष 12 विद्यार्थियों को 1.14 करोड़ रुपये का सर्वाधिक पैकेज मिला था। साथ ही संस्थान द्वारा जीसीसी और यूएई के लिए कई एग्जीक्यूटिव प्रोग्राम भी चलाए जा रहे हैं। इन स्पेशलाइज्ड प्रोग्राम में संस्थान के 700 से अधिक एलुमनाई हैं।
आइआइएम इंदौर का होगा विस्तार, पांच बड़ी समस्याओं पर करेंगे काम
आने वाले वर्षों में हम कैंपस का विस्तार करेंगे। नया अकादमिक ब्लाक, क्लासरूम, एमडीपी बिल्डिंग और होस्टल का निर्माण करेंगे। अन्य देशों में भी हमारे एग्जीक्यूटिव एजुकेशन प्रोग्राम पेश करने की योजना बनाएंगे। इसके साथ ही हम देश की पांच विकट समस्याओं – असमानता, ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों की समस्याएं, पर्यावरण की समस्याओं के समाधान खोजने और उद्यमिता को प्रोत्साहित कर राष्ट्र निर्माण में योगदान देने के लिए कार्य करेंगे।
अपशिष्ट प्रबंधन और पानी के प्रबंधन, सफाई और स्वच्छता प्रबंधन पर केंद्रित हमारे सेंटर आफ एक्सीलेंस अन्वेषण के अंतर्गत एसिंक्रोनस सर्टिफिकेट प्रोग्राम्स बनाएंगे। अभी आइआइएम इंदौर विश्व के शीर्ष सौ प्रबंधन संस्थानों में सूचित है। मेरा प्रयास रहेगा कि संस्थान आने वाले समय में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शीर्ष पचास संस्थानों में आ जाए।
- प्रो. हिमांशु राय, निदेशक, आइआइएम इंदौर