यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Sep 02, 2021 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
IIT Indore: स्वदेशी माइक्रो प्रोसेसर चैलेंज प्रतियोगिता में आइआइटी इंदौर शीर्ष 30 में
स्वेदशी माइक्रोप्रोसेसर बनाने पर काम कर रहे हैं आइआइटी इंदौर के विद्यार्थी, सफल होने पर फाइनल राउंड में मिलेगी जगह।
By gajendra.nagarEdited By: gajendra.nagar
Publish Date: Thu, 02 Sep 2021 02:18:34 PM (IST)Updated Date: Thu, 02 Sep 2021 02:18:34 PM (IST)

इंदौर, नईदुनिया प्रतिनिधि, IIT Indore। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आइआइटी) इंदौर ने भारत सरकार के आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत हो रहे स्वदेशी माइक्रोप्रोसेसर चैलेंज प्रतियोगिता में बाजी मार ली है। इसमें देशभर की 6169 टीमों में से टाप 30 फाइनलिस्ट में आइआइटी की टीम ने जगह बनाई है। अब आइआइटी की टीम स्वदेशी माइक्रो प्रोफेसरों का उपयोग करके अपने हार्डवेयर प्रोटोटाइप को और विकसित करेगी ताकि प्रतियोगिता के अंतिम दौर में बेहतर प्रदर्शन किया जा सके। आइआइटी से टीम में गोपाल राउत, पीएचडी छात्र और टीम के सदस्य सौरभ करकुन, शावेज मलिक, जोगेश कुमार, रिभु दास पुरकायस्थ, सुधीर रेड्डी शामिल है।
आइआइटी इंदौर के कार्यवाहक निदेशक प्रो. नीलेश कुमार जैन के मुताबिक संस्थान के लिए गर्व का क्षण है कि हमें स्वदेशी माइक्रो प्रोसेसर चैलेंज के लिए फाइनल टीम में सूचीबद्ध किया गया है। हमें उम्मीद है कि आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत हम स्वदेशी कंप्यूटर हार्डवेयर की आवश्यकता को पूरा करने में सक्षम होंगे जो कि विभिन्ना डोमेन में तैनात हर स्मार्ट डिवाइस का हिस्सा होगा। इसमें सार्वजनिक उपयोगिता सेवाओं के लिए इलेक्ट्रानिक्स से लेकर कमोडिटी उपकरण तक शामिल है।
आइआइटी इंदौर के एनएसडीसीएस लैब के प्रमुख डा. संतोष विश्वकर्मा का कहना है कि प्रतियोगिता को नवाचार और उद्यमिता की संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए एमईआइटीवाई द्वारा कई लाभ हार्डवेयर तथा साफ्टवेयर संसाधनों की पेशकश की जाती है। यह देश में जटिल डिजाइनों को अपनाकर वैश्विक और घरेलू दोनों आवश्यकताओं को पूरा करने वाले घरेलू माइक्रोप्रोसेसर पारिस्थितिकी तंत्र के आसपास मितव्ययी समाधानों को नया रूप देकर किया जाता है।