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इंदौर में एक आरोपी के पास खातों का पूरा ‘किट’, 3 करोड़ रुपये के फ्रॉड से जुड़े नेटवर्क का हुआ खुलासा

साइबर ठगी करने वालों को बैंक खाते उपलब्ध कराने के नेटवर्क में क्राइम ब्रांच को बड़ी जानकारी हाथ लगी है। एक आरोपित के पास से 21 बैंक पासबुक, 20 चेकबुक,...और पढ़ें

By Mukesh MangalEdited By: Ramnath Mutkule
Publish Date: Sun, 13 Sep 2026 06:25:35 PM (IST)Updated Date: Sun, 13 Sep 2026 06:25:35 PM (IST)
इंदौर में एक आरोपी के पास खातों का पूरा ‘किट’, 3 करोड़ रुपये के फ्रॉड से जुड़े नेटवर्क का हुआ खुलासा
आरोपी के पास खातों का पूरा ‘किट’ मिला। (एआई इमेज)

HighLights

  1. क्राइम ब्रांच की घेराबंदी कर ललित उर्फ ऋषि को पकड़ा
  2. 21 पासबुक, 20 चेकबुक, 8 एटीएम कार्ड और 7 क्यूआर कोड मिले
  3. 50 से ज्यादा साइबर ठगी की शिकायतों में खातों का इस्तेमाल

नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर : साइबर ठगी करने वालों को बैंक खाते उपलब्ध कराने के नेटवर्क में क्राइम ब्रांच को बड़ी जानकारी हाथ लगी है। एक आरोपित के पास से 21 बैंक पासबुक, 20 चेकबुक, आठ एटीएम कार्ड और सात क्यूआर कोड मिले हैं।

इन बैंक खातों की जांच की गई तो देशभर में दर्ज 50 से ज्यादा साइबर अपराध की शिकायतों से इनका लिंक मिला। प्रारंभिक जांच में इन खातों के जरिए करीब तीन करोड़ रुपये से अधिक की साइबर धोखाधड़ी से संबंधित लेन-देन सामने आया है।


बड़ी संख्या में बैंकिंग दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक सामग्री मिली

क्राइम ब्रांच ने मुखबिर की सूचना पर घेराबंदी कर ललित उर्फ ऋषि सुतार को मोटरसाइकिल सहित पकड़ा। तलाशी के दौरान उसके पास से बड़ी संख्या में बैंकिंग दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक सामग्री मिली। इतनी बड़ी संख्या में अलग-अलग खातों की पासबुक, चेकबुक और एटीएम कार्ड मिलने के बाद पुलिस ने इनके संबंध में पूछताछ की, लेकिन आरोपी कोई संतोषजनक जानकारी नहीं दे सका।

आरोपित के कब्जे से बरामद सामग्री में 21 बैंक पासबुक, 20 चेकबुक, 8 एटीएम कार्ड, 7 क्यूआर कोड और एचपी कंपनी का एक लैपटाप शामिल है। पुलिस जांच कर रही है कि आरोपित के नाम पर हैं और कितने दूसरे लोगों के नाम पर संचालित हो रहे थे।

धोखाधड़ी की 50 से अधिक शिकायतें सामने आईं

क्राइम ब्रांच ने बरामद बैंक खातों की जानकारी एनसीआरपी (नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल) पर जांची। यहां अलग-अलग खातों से जुड़ी साइबर अपराध और वित्तीय धोखाधड़ी की 50 से अधिक शिकायतें सामने आईं। इसके बाद पुलिस का शक और गहरा गया कि इन खातों का इस्तेमाल सामान्य बैंकिंग के बजाय साइबर ठगी की रकम को प्राप्त करने और आगे ट्रांसफर करने के लिए किया जा रहा था।

जांच में सामने आई शिकायतों का लिंक सिर्फ इंदौर या मध्य प्रदेश तक सीमित नहीं है बल्कि महाराष्ट्र, कर्नाटक, राजस्थान, अंडमान-निकोबार, पश्चिम बंगाल, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, पंजाब, बिहार, गुजरात और छत्तीसगढ़ सहित कई राज्यों में दर्ज साइबर अपराधों से मिला है।

इनमें निवेश के नाम पर ठगी, एपीके आधारित फ्रॉड, ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी और साइबर अपराध के अन्य तरीके शामिल हैं।

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