
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। शहर में सड़कों और फुटपाथों को अतिक्रमण मुक्त कराने के लिए नगर निगम लगातार कार्रवाई का दावा कर रहा है। अलग-अलग क्षेत्रों में निगम का अमला पहुंचकर कब्जे हटाता है और रास्तों को खाली करवाता है। कभी पाटनीपुरा तो कभी राजबाड़ा-खजूरी बाजार सहित प्रमुख इलाकों में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई दिखाई देती है, लेकिन शहर में कुछ ऐसे हिस्से भी हैं। जहां वर्षों से कब्जे होने के बावजूद कार्रवाई नजर नहीं आती।
विजय नगर स्थित शहीद चंद्रशेखर आजाद जोन क्रमांक-8 क्षेत्र इसका बड़ा उदाहरण है। यहां सर्विस रोड के फुटपाथ पर कई दुकानें बनी हुई हैं। फुटपाथ जो पैदल चलने वालों की सुविधा के लिए बनाया गया था। अब दुकानों के इस्तेमाल में आ रहा है। विजय नगर चौराहे से लेकर सयाजी पेट्रोल पंप तक करीब 10 से 15 दुकानें लंबे समय से संचालित हो रही हैं। यहां तक कि सुबह के समय नाश्तें की दुकानें भी नजर आती है। इसके कारण फुटपाथ का उपयोग करने वाले लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ता है।
लोगों का कहना है कि ये कब्जे कोई नए नहीं हैं। बल्कि लंबे समय से यहां बने हुए हैं। इसके बावजूद इन्हें हटाने के लिए निगम की ओर से अब तक कोई बड़ी कार्रवाई नहीं की गई। शहर के दूसरे इलाकों में छोटी-छोटी दुकानों और ठेलों पर कार्रवाई करने वाला निगम इस क्षेत्र में बने स्थायी कब्जों पर चुप दिखाई देता है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर निगम के अधिकारियों और कर्मचारियों की नजर इन दुकानों पर क्यों नहीं पड़ती? रोजाना इसी क्षेत्र से निगम के अधिकारी-कर्मचारी गुजरते हैं, कार्यालय आते-जाते हैं, लेकिन फुटपाथ पर हुए कब्जे उन्हें दिखाई नहीं देते। इससे लोगों के बीच यह चर्चा भी है कि क्या कुछ स्थानों पर कार्रवाई करने से पहले प्रभाव और दबाव देखा जाता है। लोगों का कहना है कि नगर निगम की अतिक्रमण मुहिम तभी सफल मानी जाएगी। जब कार्रवाई सभी क्षेत्रों में समान रूप से हो। शहर की सुंदरता और व्यवस्था बनाए रखने के लिए जरूरी है कि जहां भी सार्वजनिक स्थानों पर कब्जे हैं।