
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष जितेंद्र उर्फ जीतू पटवारी का छोटा भाई कुलभूषण उर्फ नाना पटवारी के खिलाफ तीन प्रकरणों में सीधा नाम जुड़ा लेकिन पुलिस 9 दिन बाद भी उसकी गिरफ्तारी नहीं कर पाई है। प्रक्रिया के दौरान पुलिस ने तीन बार पूछताछ की और केस दबाने के लिए जांच वित्तीय लेनदेन की तरफ मौड़ दी है।
पुलिस ने शुक्रवार को कॉलोनाइजर सुमित मंत्री और डॉक्टर दीपक बंसल को बुलाया था। सुमित ने गुरुवार को डॉक्टर द्वारा बनाया मेडिकल प्रमाण पत्र प्रस्तुत किया था, जिसमें बिमारी के कारण आराम करने की सलाह दी थी। शुक्रवार को सुमित ने डॉक्टर को थाने में देखा और बगैर बयान दिए गायब हो गए। डॉक्टर ने बताया सर्दी जुकाम होने के कारण घर रुकने के लिए प्रमाण पत्र बनाया था। सुमित ने उसका गलत इस्तेमाल किया है। डीसीपी के अनुसार सुमित से नाना पटवारी के संबंध में चर्चा करना शेष है।
बिजलपुर निवासी नाना का इरफान उर्फ गोलू और संजय कौशल उर्फ रौनी भाई ने ड्रग्स(ब्राउन शुगर) में नाम लिया। पुलिस ने पूराने ड्राइवर भुरु बैंड और फेजल को पकड़ा तो उसने भी नाना का जिक्र किया। आरोपितों के मेमोरेंडम में नाम दर्ज कर लिया लेकिन सहअभियुक्त नहीं बनाया। जबकि अन्य आरोपित अयान और रेहान को भी इसी बयान पर आरोपित बनाया गया है।
ऑनलाइन सट्टे के केस में भी नाना पटवारी की सीधे संलिप्तता मिली है। डीसीपी जोन-1 नरेंद्रसिंह रावत खुद मोबाइल में बैटिंग एप और बैंक ट्रांजेक्शन की पुष्टि कर चुके हैं। गुरुवार को संजय कौशल,मनीष जादौन,दिनेश उर्फ लल्ला चौहान और प्रितेश त्रिपाठी को आरोपित बनाया लेकिन नाना के नाम की जगह अन्य कर दिया। गिरफ्तार आरोपित भी नाना को सट्टे की आईडी देना स्वीकार कर चुके है।
धोखाधड़ी में तो पुलिस को दस्तावेजी सबूत मिल चुके हैं। पलसिकर कालोनी निवासी पायल साहनी की शिकायत पर पुलिस ने नाना द्वारा तैयार किया अनुबंध पत्र जब्त कर लिया और नाना के खिलाफ कथन भी हो गए। कॉलोनाइजर सुमित मंत्री ने अनुबंध से इनकार कर दिया लेकिन पुलिस नाना को आरोपित न बनाते हुए बैंक खातों की जांच में लगी है। जोन-1 के डीसीपी नरेंद्रसिंह रावत के मुताबिक नाना का नाम मेमोरेंडम में तो लिख लिया है। साक्ष्य जुटाने के बाद आगे कार्रवाई की जाएगी।