
डिजिटल डेस्क, इंदौर। यात्रियों की सुविधा के लिए स्पेशल ट्रेन चलाने वाले रेलवे की प्रक्रिया ही यात्रियों के लिए परेशानी का कारण बन गई। लक्ष्मीबाईनगर-श्रीगंगानगर सहित सात स्पेशल ट्रेनों के फेरे बढ़ाने का प्रस्ताव नॉर्थ वेस्टर्न रेलवे ने पश्चिम रेलवे को भेजा था, लेकिन अनुमति मिलने में 27 दिन लग गए। तब तक ट्रेन के मौजूदा फेरे खत्म होकर संचालन बंद हो चुका था।
नॉर्थ वेस्टर्न रेलवे ने सात ट्रेनों के फेरे बढ़ाने के लिए 11 अगस्त को पश्चिम रेलवे से अनुमति मांगी थी। पश्चिम रेलवे ने इसकी अनुमति 7 सितंबर को दी। इस देरी के बीच श्रीगंगानगर से ट्रेन का संचालन 27 अगस्त और लक्ष्मीबाईनगर से 28 अगस्त को बंद हो चुका था।
फेरे आगे नहीं बढ़ने के कारण ट्रेन बंद हो गई। रेलवे स्तर पर फेरे बढ़ाने की प्रक्रिया चलती रही, लेकिन यात्रियों के लिए उपलब्ध ट्रेन इस दौरान बंद हो गई। अब रेलवे बोर्ड की अनुमति मिलने के बाद ट्रेन का संचालन दोबारा शुरू होगा। इस मामले में रेलवे अधिकारी बोलने से बचते रहे। अधिकारियों ने कहा कि मामला पश्चिम रेलवे, मुंबई से जुड़ा है।
श्रीगंगानगर-लक्ष्मीबाईनगर साप्ताहिक स्पेशल (04735): इसे श्रीगंगानगर से प्रत्येक गुरुवार को 26 नवंबर तक चलाने का प्रस्ताव था। लक्ष्मीबाईनगर-श्रीगंगानगर साप्ताहिक स्पेशल (04736): इसे लक्ष्मीबाईनगर से प्रत्येक शुक्रवार को 27 नवंबर तक चलाने का प्रस्ताव था।
रेलवे एक्सपर्ट नागेश नामजोशी ने रेलवे की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि नॉर्थ वेस्टर्न रेलवे ने समय पर फेरे बढ़ाने के लिए अनुमति मांगी थी। यदि पश्चिम रेलवे ने समय रहते अनुमति दे दी होती तो ट्रेन 27 अगस्त के बाद से अब तक बंद नहीं होती। उन्होंने कहा कि ट्रेन लगातार चलती रहती तो यात्रियों को इसका फायदा मिलता। अनुमति प्रक्रिया में हुई देरी का सीधा असर यात्रियों पर पड़ा।
ट्रेन चलाने का फैसला होने के बावजूद कागजी प्रक्रिया पूरी होने में देरी हुई और यात्रियों को ट्रेन की सुविधा से वंचित रहना पड़ा। उन्होंने यह भी कहा कि देशभर से चलने वाली कई ट्रेनों को नियमित किया गया, लेकिन इंदौर की एक भी ट्रेन को नियमित नहीं किया गया।