
- अपहरण गैंग का नया खुलासा : फर्जी मार्कशीट से बनवाए आधार और पासपोर्ट, तीन सहयोगी भी गिरफ्तार
इंदौर (नईदुनिया प्रतिनिधि)। स्कूलकर्मी का अपहरण कर फिरौती मांगने वाले गिरोह ने चौंकाने वाला खुलासा किया है। गिरोह की सरगना बांग्लादेशी महिला है। वह 10 साल पूर्व देह व्यापार के इरादे से मुंबई आई थी। उसने बांग्लादेश और भारत में अलग-अलग पासपोर्ट बनवा लिए थे। उसने एक ड्राइवर से प्रेम विवाह कर लिया और जाली नोट भी छापने लगी। पुलिस ने मामले में तीन सहयोगियों को भी गिरफ्तार किया है जिसमें एक आरटीओ एजेंट है। आरोपितों से नकली सीलें, मार्कशीट, जाली नोट, प्रिंटर, फोटो कॉपी मशीन बरामद हुई हैं।
डीआईजी रुचि वर्धन मिश्र के मुताबिक, 5 फरवरी को गौरीनगर निवासी अनिल पाल का आरोपित किशोर उत्तम खंडारे निवासी दत्तनगर, उसकी पत्नी मेघा खंडारे, साथी रोनी रोहित शेख और उसकी प्रेमिका लीमा हैदर हलधर ने अपहरण कर लिया था। पूछताछ में खुलासा हुआ कि गिरोह की सरगना मेघा और किशोर हैं। उसका असली नाम बेगम खातून अब्दुल शेख है और मूलतः धूलिया सतखिला बांग्लादेश की रहने वाली है। करीब 10 साल पूर्व वह मुंबई आई थी। यहां सपना नामक महिला से मिली और देह व्यापार में लिप्त हो गई। तीन साल पूर्व उसकी मुलाकात नासिक में किशोर (ड्राइवर) से हुई और दोनों ने शादी कर ली। इसके बाद वह दोबारा बांग्लादेश गई और बेगम खातून के नाम से पासपोर्ट बनवाकर वीसा लेकर भारत आ गई। वर्ष 2017 में दोनों इंदौर आ गए और अलग-अलग क्षेत्रों में एस्कोर्ट सर्विस के माध्यम से देह व्यापार शुरू कर दिया। इनकी मुलाकात रोनी शेख व लीमा से हुई और उन्हें भी देह व्यापार से जोड़ लिया। रोनी और लीमा भी मूलतः कठुआ जिला बागेरहट बांग्लादेश के हैं।
मकान मालिक से अनुबंध करवा आधार-पासपोर्ट बनवाया
एएसपी (पूर्वी-3) डॉ. प्रशांत चौबे के मुताबिक, बांग्लादेश से बने पासपोर्ट की वैधता समाप्त होने पर बेगम खातून ने मेघा के नाम से नया पासपोर्ट बनवा लिया। उसने मकान मालिक से अनुबंध करवाया और आधार कार्ड में इंदौर का पता अपडेट करवा लिया। इसी दौरान मरीमाता स्थित कम्प्यूटर दुकान चलाने वाले शिवकुमार बृजभानसिंह यादव व अशोक तोताराम अग्रवाल से संपर्क हुआ और आठवीं की फर्जी मार्कशीट बनवा ली। पुलिस ने यादव और अग्रवाल को भी फर्जी मार्कशीट बनाने के आरोप में गिरफ्तार कर लिया।
फोटो कॉपी मशीन पर छापे जाली नोट, पीथमपुर-महू में खपाए
एएसपी के मुताबिक, आरोपित अग्रवाल और यादव ने यह भी कबूला कि वे सालों से जाली मार्कशीट बना रहे हैं। उनका आरटीओ एजेंट बाबूलाल नारायण गौड़ से संपर्क है। गौड़ अशिक्षित लोगों का लाइसेंस बनवाने के लिए फर्जी मार्कशीट खरीदता था। आरोपित किशोर व मेघा ने बताया कि वर्ष 2018 में विश्वास नगर में रहते थे। इस दौरान दोनों कलर प्रिंटर और फोटो कॉपी मशीन के माध्यम से 100, 200, 500 के जाली नोट छाप चुके हैं। ज्यादातर नोट महू व पीथमपुर क्षेत्र में खपाए थे।