
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पानी के कारण बीमार होने वाले लोगों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। अब तक 2456 मरीजों की पहचान की जा चुकी है, जिनमें से 162 मरीज अस्पताल में भर्ती हैं। इनमें से 26 मरीज जिंदगी और मौत के बीच आईसीयू में संघर्ष कर रहे हैं। गुरुवार सुबह मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने चार मृतकों के परिजनों को दो-दो लाख रुपये के चेक दिए।
भागीरथपुरा के घरों से लगातार नए मरीज सामने आ रहे हैं। शहर के 14 सरकारी और निजी अस्पतालों में इलाज किया जा रहा है। एमजीएम मेडिकल कॉलेज के चाचा नेहरू अस्पताल में 11 बच्चे भर्ती हैं, जिनमें से पांच बच्चों को बुधवार को तबीयत बिगड़ने के बाद भर्ती किया गया। इन बच्चों में एक माह की बच्ची से लेकर 14 वर्ष तक के बच्चे शामिल हैं। दूषित पानी के कारण अब तक 13 लोगों की मौत हो चुकी है, जो सभी भागीरथपुरा के निवासी हैं।
हालांकि, प्रशासन केवल चार मौतों की पुष्टि कर रहा है। इस गंभीर स्थिति के बावजूद, जिन परिवारों ने अपने प्रियजन को खोया है, उन्हें कोई सहायता नहीं मिल रही है और प्रशासन की टीम भी उनसे चर्चा करने नहीं पहुंची है।
भागीरथपुरा से लगे अन्य क्षेत्रों में भी संक्रमण फैलने की सूचना पर स्वास्थ्य विभाग ने 21 टीमें बनाई हैं, जिसमें डाक्टर, पैरामेडिकल स्टाफ, एएनएम और आशा कार्यकर्ता शामिल हैं। इसके अलावा, 11 एंबुलेंस भी तैनात की गई हैं। प्रशासन ने निजी चिकित्सालयों में स्वास्थ्य विभाग के चिकित्सकों के साथ-साथ राजस्व अधिकारियों को समन्वय के लिए तैनात किया है। अब तक 7992 घरों का सर्वेक्षण किया गया है।
यह पहली बार नहीं है जब इंदौर में दूषित पानी पीने से लोग बीमार हुए हैं। इससे पहले जुलाई 2023 में क्लर्क कॉलोनी और सुभाष नगर क्षेत्र में हैजा फैल चुका है, जिसमें बड़ी संख्या में लोग प्रभावित हुए थे। जिला सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रयोगशाला द्वारा परीक्षण किए गए पानी के नमूनों की प्रारंभिक रिपोर्ट में बैक्टीरिया और अन्य प्रदूषक पाए गए थे। यहां पानी में दो बैक्टीरिया पाए गए थे, जिनमें से एक बैक्टीरिया हैजा का कारण बनता है। तब भी स्वास्थ्य विभाग और नगर निगम की टीम ने सक्रियता दिखाई थी और घरों में सर्वेक्षण किया था।