इंदौर में दूषित जल कांड : मंत्री कैलाश विजयवर्गीय को दिल्ली बुलाया, महापौर पुष्यमित्र भार्गव को चेताया
इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी सप्लाई से बिगड़े हालात पर शहर के भाजपा नेताओं द्वारा की गई बयानबाजी पर भाजपा संगठन सख्त हो गया है। नगरीय प्रशासन मं ...और पढ़ें
Publish Date: Sun, 04 Jan 2026 07:41:55 AM (IST)Updated Date: Sun, 04 Jan 2026 08:24:33 AM (IST)
मंत्री कैलाश विजयवर्गीय और इंदौर के महापौर पुष्यमित्र भार्गव। - फाइल फोटोHighLights
- दूषित जल कांड पर बयानबाजी से भाजपा संगठन नाराज
- प्रदेश संगठन महामंत्री हितानंद शर्मा भी शनिवार को इंदौर आए
- महापौर ने कहा था अधिकारी उनकी बात नहीं सुनते
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। भागीरथपुरा दूषित जल कांड को लेकर स्थानीय भाजपा नेताओं की बयानबाजी और मीडिया में आए वक्तव्यों पर संगठन ने सख्त रुख अपनाया है। पार्टी नेतृत्व ने इस पूरे घटनाक्रम को राजनीतिक रूप से संवेदनशील मानते हुए स्पष्ट संदेश दिया है कि सार्वजनिक मंचों पर असंयमित बयानबाजी से पार्टी की छवि को नुकसान पहुंच रहा है। इसी क्रम में नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय को शनिवार को दिल्ली तलब किया गया। वहां उन्होंने पार्टी के शीर्ष नेताओं को भागीरथपुरा मामले पर विस्तृत जानकारी दी।
शीर्ष नेतृत्व ने विजयवर्गीय का पक्ष भी सुना। बैठक के बाद विजयवर्गीय शनिवार को ही इंदौर लौट आए और देर शाम स्थानीय भाजपा नेताओं के साथ बैठक की। विजयवर्गीय का कहना है कि वे दिल्ली राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की बैठक में शामिल होने गए थे।
उधर भाजपा के प्रदेश संगठन महामंत्री हितानंद शर्मा भी शनिवार को इंदौर आए। भाजपा कार्यालय में हुई बैठक में महापौर पुष्यमित्र भार्गव, नगर अध्यक्ष सुमित मिश्रा, उपाध्यक्ष डॉ. निशांत खरे और महामंत्री गौरव रणदिवे मौजूद थे। सूत्रों के अनुसार संगठन महामंत्री ने भागीरथपुरा प्रकरण में सार्वजनिक बयानबाजी पर नाराजगी जताई।
महापौर के ‘न सुनने’ संबंधी बयान पर कड़ा ऐतराज
संगठन महामंत्री ने महापौर पुष्यमित्र भार्गव द्वारा अधिकारियों के ‘न सुनने’ संबंधी बयान पर कड़ा ऐतराज जताया। उन्होंने कहा कि ऐसे वक्तव्य पार्टी की छवि को धूमिल करते हैं और अनुशासन के विपरीत हैं। उल्लेखनीय है कि हाल ही में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और एसीएस संजय दुबे की मौजूदगी में हुई बैठक में महापौर ने अधिकारियों पर निर्देशों की अनदेखी का आरोप लगाया था। उन्होंने कहा था कि अधिकारी उनकी बात नहीं सुनते, ऐसी स्थिति में काम करना मुश्किल है। यह संदेश मुख्यमंत्री तक पहुंचा दें।