
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। इंदौर विकास प्राधिकरण (आईडीए) ने अपनी कार्यप्रणाली को पारदर्शी बनाते हुए डिजिटलाइजेशन किया गया था। इसमें आवेदन से लेकर निराकरण तक की प्रक्रिया आनलाइन करने और नए पोर्टल के जरिए लीज रिन्यूअल, फ्री होल्ड व नामांतरण जैसे कार्य घर बैठे करने की सुविधा देने का दावा किया गया, लेकिन जमीनी हकीकत इन दावों से बिल्कुल उलट नजर आ रही है।
ऑनलाइन सिस्टम शुरू होने के बावजूद हजारों आवेदक अब भी कार्यालयों के चक्कर काटने को मजबूर हैं। आइडीए ने बीते वर्ष लीज प्रबंधन प्रणाली को ऑनलाइन कर इसे सुविधाजनक और पारदर्शी बताया था। पोर्टल तैयार किया गया, फाइल ट्रैकिंग सिस्टम शुरू हुआ और एकल विंडो सिस्टम के तहत आवेदन प्रक्रिया को सरल बनाने की बात कही गई।
यहां तक कि जो लोग ऑनलाइन आवेदन नहीं कर सकते, उनके लिए कार्यालय परिसर में सहायता केंद्र भी बनाया गया। इसके बावजूद स्थिति यह है कि आवेदकों को आवेदन जमा करने से लेकर उसके निराकरण तक कई बार कार्यालय पहुंचना पड़ रहा है।
सबसे अधिक परेशानी लीज रिन्यूअल, फ्री होल्ड और नामांतरण के मामलों में सामने आ रही है। आवेदकों का कहना है कि पोर्टल पर आवेदन करने के बाद भी दस्तावेज सत्यापन, आपत्तियों और फाइल की प्रगति जानने के लिए दफ्तर के चक्कर लगाने पड़ते हैं।
कई मामलों में एक टेबल से दूसरी टेबल तक फाइल पहुंचने में कई दिन लग जाते हैं, जिससे प्रकरण महीनों तक लंबित बने रहते हैं जबकि दावा था कि आनलाइन व्यवस्था से वरिष्ठ अधिकारी भी फाइलों की निगरानी कर सकेंगे।
आइडीए के करीब 40 हजार लीजधारी हैं, जिनकी संपत्तियों की लीज अवधि पूरी होने पर नवीनीकरण या नामांतरण जैसी प्रक्रियाएं जरूरी होती हैं, लेकिन धीमी प्रशासनिक प्रक्रिया और फाइलों की सुस्त रफ्तार लोगों की परेशानी बढ़ा रही है। डिजिटलाइजेशन सुविधाओं से लैस होने का दावा करने वाला आइडीए अपनी कार्यप्रणाली में सुधार नहीं कर पा रहा, जिससे लोगों में नाराजगी बढ़ रही है।
स्टाफ कम होने के कारण आवेदन ऑनलाइन करने की प्रक्रिया रुकी है। कोशिश कर रहे हैं कि स्केनिंग फिर से शुरू की जाए, ताकि आवेदकों को परेशान नहीं होना पड़े। - डॉ. परीक्षित झाड़े, सीईओ आईडीए