
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। घरेलू महिला का काम भी विशेषज्ञता और जिम्मेदारी से भरा होता है। सड़क दुर्घटना में किसी गृहिणी की मृत्यु होने पर उसकी आय का आकलन कम नहीं किया जा सकता। इंदौर जिला कोर्ट ने एक मामले में घरेलू महिला की मासिक आय 30 हजार रुपये मानते हुए उसके आश्रितों को 58 लाख रुपये की क्षतिपूर्ति देने के आदेश दिए हैं।
बीमा कंपनी को इस राशि पर छह प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देना होगा। मामला राऊ निवासी पूजा का है। उनके पति की पहले ही मृत्यु हो चुकी थी। आठ जुलाई 2021 को पूजा अपने रिश्तेदार के साथ मोटरसाइकिल से ओंकारेश्वर जा रही थी। इसी दौरान पीछे से आए एक ट्रक ने बाइक को टक्कर मार दी।
हादसे में पूजा की मौके पर ही मौत हो गई। इसके बाद उनके आश्रितों ने एडवोकेट सुरेंद्र एस. वर्मा, एडवोकेट विक्रम बारोड़ और एडवोकेट शुभम एस. वर्मा के माध्यम से ट्रक का बीमा करने वाली कंपनी के विरुद्ध क्षतिपूर्ति का प्रकरण प्रस्तुत किया। सुनवाई के दौरान बीमा कंपनी ने यह तर्क देते हुए दायित्व से बचने का प्रयास किया कि ट्रक ड्राइवर के पास वैध ड्राइविंग लाइसेंस नहीं था।
कोर्ट ने बीमा कंपनी का यह तर्क स्वीकार नहीं किया। एडवोकेट वर्मा ने बताया कि कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों का उल्लेख करते हुए कहा कि गृहिणी भले ही बाहर जाकर नौकरी या व्यवसाय न करती हो, लेकिन घर संभालने, परिवार की देखभाल और घरेलू जिम्मेदारियों में उसका महत्वपूर्ण योगदान होता है। उसका काम आर्थिक मूल्य वाला है।
यह भी पढ़ें- सड़क किनारे बैठी महिला को ट्रक ने कुचला, सागर में कोर्ट का बड़ा फैसला- बीमा कंपनी परिवार को देगी 51.42 लाख रुपये