
इंदौर। इंदौर के बृजेश्वरी(एनएक्स) में हुए अग्निकांड में मनोज पुगलिया सहित 8 लोगों की मौत हो गई है। घटना के बाद उनका आखिरी वॉट्सएप स्टेटस वायरल हो रहा है, जिसमें लिखा है 'वक्त सबकुछ छीन सकता है, मगर हुनर और मेहनत से मिली पहचान नहीं छीन सकता।'
उनका यह स्टेटस परिवार वालों ने स्क्रीनशॉट लेकर खुद के पास सुरक्षित रख लिया है। परिवार से जुड़े लोगों का मानना है कि वे आखिरी समय में अपने परिजनों को हौसला बढ़ाने वाले संदेश छोड़ गए।
पुलिस और फोरेंसिक एक्सपर्ट ने मौके का नक्शा बनाया है। पूरे घर में फर्नीचर, पीओपी और पर्दे थे। नीचे किचन, डायनिंग हाल और मनोज का बेडरूम भी था। घर में गैस गीजर, फ्रिज, एसी भी बहुत सारे थे। रिश्तेदारों के अनुसार मनोज और उनकी पत्नी सुनीता और साले विजय व सुमन नीचे ही सो रहे थे। आग लगने पर सबसे पहले मनोज उठे थे। उन्होंने बाइक का टायर फूटने की आवाज सुनी थी।
जैसे ही दरवाजा खोला, लपटें अंदर की तरफ आईं। उन्होंने सुनीता को बालकनी में भेज दिया। बेटा, सौरभ, सौमिल और हर्षित जाली तोड़कर निकल गए थे। उसी वक्त रुचिका की बेटी राशि (11) और बेटा तनय (8) भी उठे। वह 65 वर्षीय नाना विजय व नानी को बचाने के लिए नीचे आया और आग में घिर गया। सिमरन भी सौरभ के साथ निकलना चाहती थी लेकिन निकल नहीं पाई। बाद में उसका शव मिला।
सौरभ ने नईदुनिया को बताया कि मैं मां और भाइयों के साथ बाहर आ गया, लेकिन पापा और बाकी सभी लोग अंदर अटक गए। मम्मी और भाइयों को निकालने के बाद पापा को लेने गया लेकिन धुएं की वजह से जा नहीं पाया। मैं बाहर से आवाज लगाता रहा पापा, सिमरन, कार्तिक बाहर आ जाओ। टीनू का पूरा परिवार ही खत्म हो गया।
दो महीने पहले छोटे भाई की शादी हुई है। इसलिए कुछ व्यावसायिक टंकियां बच गई थी। होली पर भी नई बहू के लिए एक प्रोग्राम हुआ था। लोगों ने 10-12 टंकियों की बात फैला दी। तीन-चार टंकियों की बात मैं मान सकता हूं। मेरे घर में तो वैसे ही गैस लाइन है। गीजर की टंकी, एसी, फ्रिज सब फट गए थे। मेरे घर में इलेक्ट्रिक लाक नहीं था। मेरी पत्नी गर्भवती भी नहीं थी। लोग जो मन में आए, वो अफवाह फैला रहे हैं।