
अरविंद दुबे, नईदुनिया, इंदौर। बंगाली चौराहे के पास ब्रजेश्वरी एनएक्स सुखशांति नगर में आठ मौतें हुईं… और इंदौर का ‘स्मार्ट सिटी’ तंत्र उतनी ही फुर्ती से जाग उठा, जितनी फुर्ती से वह हमेशा जागता है… हादसे के बाद। समिति बनेगी, एसओपी आएगी, जांच होगी।
अग्निशमन सेवाओं को लेकर 400 करोड़ का प्लान पहले से तैयार है - बस कागज पर। आग बुझाने वाले स्मार्ट रोबोट का प्रेजेंटेशन हो चुका है - बस खरीद नहीं हुई। फायर स्टेशन बनना है - बस जमीन पड़ी है। विभाग का मुखिया चाहिए - बस कुर्सी खाली है। स्मार्ट सिटी में सब कुछ है - सिर्फ तैयारी नहीं।
देश के सबसे स्वच्छ शहर की अग्निशमन सेवा पिछले छह महीने से बिना किसी वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसपी) के चल रही है। एसपी शशिकांत कनकने के जाने के बाद पद खाली पड़ा है और कोई नियुक्ति नहीं हुई। विभाग को नगर निगम के अधीन तो कर दिया गया, लेकिन न नेतृत्व दिया, न संसाधन।
स्टाफ आधा रह गया है और नई भर्ती बंद है। जो कर्मचारी हैं, वे दोहरे बोझ तले दबे हैं। ऊपर से जो सुविधाएं पुलिस विभाग में थीं, जैसे - अप्रैल और दिवाली पर मिलने वाला अतिरिक्त वेतन, वह भी नगर निगम ने बंद कर दिया। जिन हाथों पर शहर की आग बुझाने की जिम्मेदारी है, उन हाथों का उत्साह खुद ठंडा पड़ता जा रहा है।
इंदौर में अभी सात फायर स्टेशन हैं - लक्ष्मीबाई नगर, मांगलिया, पीथमपुर, मोती तबेला, जीएनटी मार्केट, सांवेर रोड और मालनपुर। लेकिन शहर की आबादी 35 लाख को पार कर चुकी है और नई बसाहटें तेजी से फैल रही हैं। नए इलाकों की दूरी और ट्रैफिक के कारण दमकल गाड़ियां तय समय पर नहीं पहुंच पातीं।
एमआर-10 क्षेत्र में नया फायर स्टेशन बनाने की योजना है, 40 हजार वर्गफुट जमीन भी आवंटित है, लेकिन यह स्टेशन अभी कागज पर ही है। इस बीच संकरी गलियों वाले पुराने शहरी इलाकों में बड़ी दमकल गाड़ियां पहुंच ही नहीं पातीं। यह समस्या पुरानी है और समाधान अभी तक नहीं।
संकरी गलियों की इस पुरानी समस्या का हल खोजा गया था - रोबोटिक फायर मशीन। महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने खुद प्रेजेंटेशन देखी और एलान किया कि इन्हें खरीदा जाएगा, लेकिन एलान से आगे बात नहीं बढ़ी। रोबोट नहीं आए। गलियां वैसी ही रहीं।
नवंबर 2024 में मप्र सरकार ने प्रदेशभर की अग्निशमन सेवाओं को दुरुस्त करने के लिए 400 करोड़ रुपये का एक्शन प्लान तैयार किया। इसमें 70 मीटर ऊंचाई - यानी 25 मंजिल - तक आग बुझाने वाले हाइड्रालिक प्लेटफार्म खरीदने की बात है।
प्रति प्लेटफार्म 15 करोड़ रुपये की लागत। 75 प्रतिशत राशि केंद्र देगा, 25 प्रतिशत राज्य। इंदौर, भोपाल, जबलपुर और ग्वालियर एयरपोर्ट के लिए सात-सात करोड़ रुपये के क्रैश फायर टेंडर भी इसमें शामिल हैं। लेकिन मार्च 2026 आ गया - इस योजना का क्रियान्वयन अभी शुरू नहीं हुआ।
माडल फायर एक्ट यानी 'अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवा अधिनियम 2022' कानून वर्षों से अटका है। 2023 के विधानसभा चुनाव ने इसे ठंडे बस्ते में डाल दिया। नगरीय विभाग ने इसे दोबारा शासन को भेजा है, लेकिन अभी तक लागू नहीं हुआ। इस एक्ट के आने के बाद तहसील स्तर पर फायर स्टेशन खुलते, अग्निशमन अधिकारियों को जांच और कार्रवाई का अधिकार मिलता, फायर एनओसी की बाध्यता होती। लेकिन यह सब 'जब लागू हो तब की बात' है।
ईवी चार्जिंग की आग से आठ लोगों की मौत के बाद नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने एलान किया कि ईवी चार्जिंग के लिए एसओपी बनाई जाएगी और विशेषज्ञ समिति जांच करेगी। सवाल यह है कि जब शहर में ईवी वाहनों की संख्या हर महीने बढ़ रही थी, तब यह एसओपी पहले क्यों नहीं बनी।
फायर ब्रिगेड की व्यवस्थाओं का आधुनिकीकरण जरूरी है। हम इस बारे में काम कर रहे हैं। देवगुराडिया क्षेत्र में नए फायर स्टेशन का काम चल रहा है। पांच अन्य फायर स्टेशन के लिए भी प्रस्ताव शासन को भेजा है। आधुनिकीकरण को लेकर भी लगातार प्रयास कर रहे हैं। हाईराइज के लिए नए फायर वाहन का वर्कआर्डर जारी किया जा चुका है। हालांकि इसे आने में समय लगेगा। प्रयास कर रहे हैं कि जल्द से जल्द फायर ब्रिगेड का आधुनिकीकरण पूरा कर लिया जाए। -क्षितिज सिंघल, निगमायुक्त इंदौर
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