उज्जैन के सेवाधाम आश्रम में मौतों पर इंदौर हाईकोर्ट सख्त, सरकार को दो सप्ताह में डॉक्टर-नर्सिंग यूनिट लगाने के निर्देश
उज्जैन के सेवाधाम आश्रम में रह रहे एक हजार से ज्यादा दिव्यांग और मानसिक रूप से बीमार लोगों को लेकर सोमवार को हाईकोर्ट का आदेश आ गया। कोर्ट ने कहा कि स...और पढ़ें
Publish Date: Tue, 29 Sep 2026 03:38:40 PM (IST)Updated Date: Tue, 29 Sep 2026 03:38:40 PM (IST)
इंदौर हाईकोर्ट ने दिए निर्देश। (प्रतीकात्मक तस्वीर)HighLights
- कोर्ट बोला- 1000 से ज्यादा दिव्यांगों की सेहत को नजरअंदाज नहीं कर सकते
- कोर्ट ने कहा- यह शासन की भी जिम्मेदारी
- हाईकोर्ट ने स्वत: संज्ञान लेते हुए जनहित याचिका दायर की है
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर : उज्जैन के सेवाधाम आश्रम में रह रहे एक हजार से ज्यादा दिव्यांग और मानसिक रूप से बीमार लोगों को लेकर सोमवार को हाईकोर्ट का आदेश आ गया। कोर्ट ने कहा कि समाज के सबसे कमजोर वर्ग से आने वाले इन लोगों को लगातार चिकित्सा निगरानी और उपचार की आवश्यकता है।
राज्य शासन की भी इनके प्रति जिम्मेदारी है। शासन सेवाधाम आश्रम में कम से कम एक डॉक्टर और नर्सिंग केयर यूनिट स्थापित करे। कोर्ट ने इसके लिए शासन को दो सप्ताह का समय देते हुए 21 अक्टूबर को होने वाली सुनवाई में कार्रवाई की रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए कहा है।
सेवाधाम का दौरा करने के बाद कोर्ट में रिपोर्ट पेश की थी
सेवाधाम आश्रम में एक वर्ष में 17 बच्चों की मौत की जानकारी सामने आने के बाद हाईकोर्ट ने स्वत: संज्ञान लेते हुए जनहित याचिका दायर की है। कोर्ट ने सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता अमित एस. अग्रवाल को न्याय मित्र नियुक्त किया है। उन्होंने सेवाधाम का दौरा करने के बाद कोर्ट में रिपोर्ट पेश की थी। इसमें यह बात सामने आई थी कि आश्रम में कोई नियमित डॉक्टर नहीं है।
आश्रम में रहने वालों में बड़ी संख्या दिव्यांग और मानसिक रूप से बीमार लोगों की है
डॉक्टर आते हैं तो उनकी मौजूदगी में उनकी पर्ची पर लिखी दवाएं मरीजों को दी जाती हैं। आश्रम में रहने वालों में बड़ी संख्या दिव्यांग और मानसिक रूप से बीमार लोगों की है। इन्हें सतत निगरानी और उपचार की आवश्यकता होती है।
सेवाधाम आश्रम का पंजीयन वृद्धाश्रम के रूप में है
शासन ने भी अपने जवाब में यह बात मानी थी कि सेवाधाम आश्रम का पंजीयन वृद्धाश्रम के रूप में है, मेडिकल सेंटर के रूप में नहीं। इसी वजह से वहां नियमित डाक्टर और नर्सिंग केयर यूनिट नहीं है। कोर्ट ने सोमवार को जारी आदेश में कहा कि जब आश्रम में एक समय में एक हजार से ज्यादा लोग रहते हैं, तो उनकी चिकित्सा जरूरतों को नजरअंदाज कैसे किया जा सकता है।
कोर्ट ने सेवाधाम द्वारा दिव्यांग और मानसिक रूप से चुनौतीपूर्ण लोगों की सेवा को सराहनीय माना और कहा कि गरीब और असहाय मरीजों की जिंदगी केवल किसी व्यक्ति की दया पर निर्भर नहीं हो सकती। उनकी चिकित्सा सुविधा सुनिश्चित करना सरकार की भी जिम्मेदारी है।