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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jun 08, 2022 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

Indore Ka Man: इंदौर अर्थात संस्कार, उद्यमशीलता, सपने और ऊंची उड़ान

Indore Ka Man: इंदौर जिद्दी है। जो ठानता है, वो कर दिखाता है। स्वच्छता में देश में पांच बार अव्वल आना इसका प्रमाण है।

By Sameer DeshpandeEdited By: Sameer Deshpande
Publish Date: Wed, 08 Jun 2022 02:59:32 PM (IST)Updated Date: Wed, 08 Jun 2022 02:59:32 PM (IST)
Indore Ka Man: इंदौर अर्थात संस्कार, उद्यमशीलता, सपने और ऊंची उड़ान

Indore Ka Man विनोद अग्रवाल, वरिष्ठ उद्यमी व समाजसेवी। इंदौर को देवी अहिल्याबाई ने संस्कार, न्याय, उद्यमशीलता व धर्म के जिन गुणों से सींचा था, वे गुण आज भी इंदौर की रग-रग में रमे हुए हैं। इन्हीं गुणों ने मां अहिल्या को महान बनाया था और इन्हीं गुणों ने इंदौर को देश में सम्मान दिलाया है। उद्यमशीलता तो इस शहर की धमनियों में रक्त की तरह प्रवाहित होती है। उद्यमिता की इस भावना के कारण ही इस शहर ने विकास के लिए सरकार का मुंह देखने के बजाय खुद पहल की और आगे बढ़ता गया।

इंदौर जिद्दी है। जो ठानता है, वो कर दिखाता है। स्वच्छता में देश में पांच बार अव्वल आना इसका प्रमाण है। सफाई अब यहां संस्कार, संस्कृति और सभ्यता है। होलकर युग में इंदौर की पहचान कपड़ा मिलों व व्यापार से थी। हालांकि 1970 के बाद कपड़ा मिलें बीमार होती गईं, लेकिन यहां के लोगों की मेहनत से इंदौर में रेडिमेड गारमेंट उद्योग फल-फूल गया। दो दशक पहले तक इंफ्रास्ट्रक्चर में इंदौर बहुत पीछे था, लेकिन अब ऐसा नहीं है। अब रेल, सड़क और हवाई यातायात में अभूतपूर्व प्रगति हुई है। मेट्रो का काम भी तेज गति से चल रहा है। पीथमपुर में एशिया का सबसे बड़ा आटो टेस्टिंग ट्रैक बनने के बाद इंदौर वैश्विक नक्शे पर आ गया है।


यह कहने में संकोच नहीं कि इंदौर की लाइफस्टाइल बहुत अच्छी है। यहां सब सुख-सुविधाएं उपलब्ध हैं, फिर भी महानगरों की तुलना में जीवन चलाने की लागत कम है। यह इंदौर का अद्भुत आकर्षण ही है कि अब यहां देश-विदेश के बड़े कार्पोरेट हाउस अपना हेड-क्वार्टर बना रहे हैं। अब तो अपने प्रदेश के अन्य शहरों के साथ दूसरे राज्यों के लोग भी यहां बसना चाहते हैं।

स्वच्छता में हमने देश में पांच बार आकर अपनी श्रेष्ठता साबित की है, किंतु अब हमें स्वच्छता से आगे बढ़कर बेहतर यातायात व जल संरक्षण में अव्वल बनना होगा। यातायात नियंत्रित करने के लिए कठोरता बरती जाए, इससे पहले हम स्वयं अपना दायित्व समझें। हमें शहर को पानीदार बनाए रखने के लिए बारिश का पानी धरती में उतारना होगा। आइआइटी, आइआइएम भी इसमें मदद करें, राह सुझाएं। इंदौर आइटी हब भी बन रहा है। हमें इसके मुताबिक अपने शहर को बेंगलुरु, हैदराबाद की तरह तैयार करना होगा। स्टार्टअप में अभी हम देश में 10वें क्रम पर हैं। तीन-चार साल में अव्वल पांच में आना है। हालांकि तरक्की की इस दौड़ में हमें अपनी संवेदनशीलता को भी नहीं भूलना है।

मेरे मन की याद गली

बचपन से मैंने इंदौर को देखा है। मुझे याद है यह ऐसी छोटी गलियों का शहर था, जिनमें अपनापन बसता था। मनोरंजन के आधुनिक साधन नहीं थे, लेकिन छुट्टी के दिन परिवार के साथ पिकनिक पर जाना और दाल-बाफले की पार्टी करना सबका प्रिय श्ागल था। यहां के उद्यमी लोगों ने देखते-देखते खानपान के शौक को इतनी ऊंचाई पर पहुंचा दिया कि इंदौर अब इस मामले में देश-दुनिया में पहचान रखता है। मुझे याद है अपने शहर में बहुत अपनेपन से मनाए जाने वाले वे उत्सव। वस्तुत: उत्सवप्रियता इंदौर की रगों में है।