
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। निपानिया में सड़क चौड़ीकरण को लेकर नगर निगम को पेड़ की छंटाई करना भारी पड़ गया है। पेड़ की जिस शाखा को कटा गया। वह बगुलों का निवास था। शाखा काटे जाने से बगुले के घोंसलों में रखे अंडे नष्ट हो गए। यहां तक कि 50 से ज्यादा बगुले घायल हो गए।
पक्षियों को लेकर नगर निगम की इस लापरवाही पर इंदौर वनमंडल ने नाराजगी जताई है। पत्र लिखकर घटना की जानकारी और जिम्मेदारों के बारे में भी पूछा है। हालांकि इस तरह की भविष्य में घटना न हो इसके लिए वन विभाग ने बिजली कंपनी को भी सावधानी बरतने को कहा है।
सड़क चौड़ीकरण के दौरान बाधक पेड़ों को हटाया जा रहा है। बुधवार को निपानिया क्षेत्र के एक निजी अस्पताल के पास निगम ने पेड़ों की छंटाई कर दी। जिम्मेदारों ने यह नहीं दिखा कि पेड़ की शाखा पर बगुलों के आशियाने है। शाखा पर घोंसले भी बने थे, जो काटते हुए जमीन पर गिर पड़े। वहीं बगुलों के जोड़े आसमान में लगातार चक्कर लगाते रहे और अपने बच्चों तक पहुंचने की कोशिश करते रहे। लेकिन सड़क पर वाहनों की आवाजाही और लोगों की भीड़ के कारण वे अपने चूजों के पास नहीं जा सके।
सड़क पर घायल और असहाय पड़े बगुलों के बच्चों को देखकर राहगीरों ने तुरंत उनकी मदद की। स्थानीय लोगों ने घायल चूजों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया। सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम भी पहुंची। यहां से इन्हें रेस्क्यू कर चिड़ियाघर लाया गया। अधिकांश बगुलों के बच्चों की हालात नाजुक बनी थी। इनका चिड़ियाघर में इलाज करवाया गया। जबकि स्वस्थ व बड़े बगुलों को गुरुवार को उमेरीखेड़ा में छोड़ दिया।
रेंजर संगीता ठाकुर का कहना है कि बगुला भारतीय वन्यजीव संरक्षण अधिनियम की अनुसूची-4 में संरक्षित पक्षी है। इसके घोंसलों को नुकसान पहुंचाना या पक्षियों को हानि पहुंचाना कानूनन दंडनीय अपराध है। इसे लेकर नगर निगम और बिजली कंपनी को पत्र लिखा है। वहीं नगर निगम के अतिरिक्त आयुक्त अभय राजनगांवकर के मुताबिक संबंधित ठेकेदार को भविष्य में पेड़ों की छंटाई से पहले पक्षियों के घोंसलों को सुरक्षित स्थान पर स्थानांतरित करने के निर्देश दिए गए हैं।
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