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इंदौर की सफाई व्यवस्था होगी आधुनिक, आईआईएम के साथ मिलकर स्मार्ट वेस्ट मैनेजमेंट मॉडल बनाएगा नगर निगम

नगर निगम और भारतीय प्रबंधन संस्थान (आईआईएम) इंदौर मिलकर अगले दो साल तक जल, स्वच्छता और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के क्षेत्र में एक-दूसरे का अनुसंधान एवं तकन...और पढ़ें

By Kuldeep BhawsarEdited By: Ramnath Mutkule
Publish Date: Sat, 04 Jul 2026 09:02:34 AM (IST)Updated Date: Sat, 04 Jul 2026 09:02:34 AM (IST)
इंदौर की सफाई व्यवस्था होगी आधुनिक, आईआईएम के साथ मिलकर स्मार्ट वेस्ट मैनेजमेंट मॉडल बनाएगा नगर निगम
स्वच्छ इंदौर। (फाइल फोटो)

HighLights

  1. एआई और इंटरनेट ऑफ थिंग्स से होगी कचरा, सीवरेज और जल प्रबंधन की निगरानी
  2. महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने बताया कि महापौर परिषद बैठक में इसके प्रस्ताव को स्वीकृति दी जा चुकी है
  3. आईआईएम इंदौर का सेंटर आफ एक्सीलेंस और इंदौर नगर निगम चरणबद्ध तरीके से शहर की सफाई व्यवस्था का विज्ञानी तरीके से अध्ययन करेंगे

नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। देश का सबसे स्वच्छ यानी हमारा इंदौर अपनी सफाई व्यवस्था को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और इंटरनेट ऑफ थिंग्स जैसी आधुनिक तकनीकों से और अधिक मजबूत बनाएगा। नगर निगम और भारतीय प्रबंधन संस्थान (आईआईएम) इंदौर मिलकर अगले दो साल तक जल, स्वच्छता और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के क्षेत्र में एक-दूसरे का अनुसंधान एवं तकनीकी सहयोग करेंगे।

महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने बताया कि महापौर परिषद बैठक में इसके प्रस्ताव को स्वीकृति दी जा चुकी है। महापौर परिषद की बैठक में स्वीकृत स्कोप आफ वर्क प्रस्ताव के तहत आईआईएम इंदौर का सेंटर आफ एक्सीलेंस और इंदौर नगर निगम चरणबद्ध तरीके से शहर की सफाई व्यवस्था का विज्ञानी तरीके से अध्ययन करेंगे। इस अध्ययन का उद्देश्य इंदौर के स्वच्छता माडल को तकनीक आधारित, अधिक प्रभावी और भविष्य की जरूरतों के अनुरूप विकसित करना है। यह कार्य चरणबद्ध तरीके से किया जाएगा।


इस तरह होगा अध्ययन

  • पहला चरण - यह चरण अगस्त से दिसंबर 2026 के बीच रहेगा। इसमें ठोस अपशिष्ट प्रबंधन प्रणाली का विज्ञानी मूल्यांकन, डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण और परिवहन व्यवस्था की कार्य क्षमता का अध्ययन और उपचारित अपशिष्ट जल के पुनर्उपयोग की संभावनाओं का आकलन किया जाएगा।
  • दूसरा चरण - यह चरण सितंबर 2026 से मार्च 2027 तक चलेगा। इसमें सार्वजनिक शौचालयों के संचालन के लिए नए वित्तीय मॉडल तैयार किए जाएंगे। इसके साथ ही इंटरनेट आफ थिंग्स आधारित सीवरेज मॉनिटरिंग सिस्टम का परीक्षण किया जाएगा। इस चरण में अपशिष्ट प्रबंधन से जुड़े नवाचारों और नई तकनीकों का डेटाबेस भी विकसित किया जाएगा।

  • तीसरा चरण - अप्रैल से सितंबर 2027 तक यह चरण चलेगा। इसमें संस्थागत क्षमता विकास पर फोकस रहेगा। एआई आधारित पूर्वानुमान और निर्णय सहायता प्रणाली विकसित करने की संभावनाओं का अध्ययन किया जाएगा ताकि भविष्य की जरूरतों के अनुरूप जल, स्वच्छता और अपशिष्ट प्रबंधन की बेहतर योजना तैयार की जा सके।
  • तकनीक से स्वच्छता का अगला अध्याय लिखेगा इंदौर

    इंदौर ने स्वच्छता में देश का नेतृत्व किया है। अब हमारा लक्ष्य तकनीक, रिसर्च और इनोवेशन के जरिए इस माडल को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाना है। आइआइएम इंदौर के साथ यह साझेदारी एआई और आधारित स्मार्ट समाधान विकसित करेगी। इससे शहर की सफाई व्यवस्था अधिक विज्ञानी, पारदर्शी और टिकाऊ बनेगी। यहां विकसित होने वाला माडल देश के अन्य शहरों के लिए भी मार्गदर्शक सिद्ध होगा। -पुष्यमित्र भार्गव, महापौर, इंदौर

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