• Jagran.com
  • Jagran Josh
  • Her Zindagi
  • Onlymyhealth
  • Jagran TV
  • Vishvas News
  • Inextlive
मेरी खबरें
  • होम
  • ताजा खबरें
  • मध्यप्रदेश
  • छत्तीसगढ़
  • उत्तर प्रदेश
  • देश
  • धर्म
  • मनोरंजन
  • राशिफल
  • लाइफस्टाइल
  • अन्य
    • बिज़नेस
    • बड़ी खबरें
    • खेल
    • विदेश
    • करियर
    • टॉपिक्स
    • टेक्नोलॉजी
    • शिक्षा
  • राज्य चुनें
  • ई-पेपर
  • राशिफल
  • राज्य चुनें
  • ई-पेपर
  • फटाफट
  • राशिफल
  • वेब स्टोरीज
नईदुनिया ट्रेंडिंग
  • बढ़ता यूपी
  • समृद्ध उत्तराखंड
  • Mutual Funds मास्टरी
  • होम
  • मध्य प्रदेश
  • इंदौर

यह एक आर्काइव लेख है, जिसे May 01, 2024 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

Indore Nagar Nigam Scam: ठेकेदारों के खातों से जिन अलग-अलग खातों में ट्रांसफर होता था पैसा उनकी भी होगी जांच

इंदौर नगर निगम से करोड़ों रुपये का भुगतान प्राप्त करने वाले ठेकेदार निगम से बिल की राशि अपने खातों में लेते थे। राशि को अलग-अलग खातों में ट्रांसफर किय...और पढ़ें

By Neeraj PandeyEdited By: Neeraj Pandey
Publish Date: Wed, 01 May 2024 09:39:04 PM (IST)Updated Date: Thu, 02 May 2024 08:48:16 AM (IST)
Indore Nagar Nigam Scam: ठेकेदारों के खातों से जिन अलग-अलग खातों में ट्रांसफर होता था पैसा उनकी भी होगी जांच
जिन अलग-अलग खातों में ट्रांसफर होता था पैसा उनकी भी होगी जांच

HighLights

  1. जिन अलग-अलग खातों में ट्रांसफर होता था पैसा उनकी भी होगी जांच
  2. 188 फाइलों की जांच की इनमें से 178 सिर्फ ड्रेनेज विभाग की
  3. निगम की कमेटी सौंप देगी शासन को जांच रिपोर्ट

नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर : फर्जी बिलों के जरिए नगर निगम से करोड़ों रुपये का भुगतान प्राप्त करने वाले ठेकेदार निगम से बिल की राशि अपने खातों में लेते थे। इसके बाद इस राशि को अलग-अलग खातों में ट्रांसफर किया जाता था। जिन खातों में इस राशि को ट्रांसफर किया जाता था वहां से यह राशि नकद के रूप में निकाल ली जाती थी।

निगम की जांच कमेटी ने 20 फाइलों की जांच शुरू की थी लेकिन यह धीरे-धीरे 188 फाइलों तक पहुंच गई। इनमें से 178 फाइलें ड्रेनेज विभाग से जुड़ी हैं। नगर निगम अब ठेकेदारों द्वारा निगम से हड़पी गई करोड़ों रुपये की राशि की वसूली के लिए कानून के जानकारों से सलाह ले रहा है। जांच कमेटी संभवत: गुरुवार को अपनी रिपोर्ट शासन को सौंप देगी।


इधर, निगमायुक्त शिवम वर्मा ने बताया कि फर्जीवाड़े में लिप्त पाए गए तीन कर्मचारियों की सेवाएं समाप्त कर दी गई हैं। इनमें लिपिक राजकुमार सालवी और लेखा विभाग के वे दो कर्मचारी शामिल हैं, जिन्हें लिप्तता पाए जाने के बाद ट्रेंचिंग ग्राउंड भेजा गया था। बुधवार को सेवा समाप्ति के आदेश जारी कर दिए गए।

छोटा-छोटा काम कर जमाते थे विश्वास

समिति की जांच में यह बात भी सामने आई है कि आरोपित ठेकेदारों ने पहले निगम के अन्य विभागों में छोटा-मोटा काम कर विश्वास जमाया। विश्वास जमने के बाद वे खुद ही फाइलें लाने-ले-जाने लगे और फर्जीवाड़े को अंजाम देने लगे। आरोपितों ने ड्रेनेज विभाग के अलावा ट्रेंचिंग ग्राउंड, उद्यान विभाग में भी ऐसा ही फर्जीवाड़ा किया है।

पहले बर्खास्त हो चुका है आरोपित

फर्जीवाडे़ का मास्टर माइंड एक्जीक्यूटिव इंजीनियर अभय राठौर इसके पहले भी फर्जीवाड़े में पकड़ाने पर निलंबित हो चुका है। इसी तरह बर्खास्त किए गए चेतन भदौरिया की सेवाएं भी पूर्व निगमायुक्त के समय में समाप्त की जा चुकी हैं, लेकिन वह दोबारा निगम में आ गया। अब इस बात की भी जांच की जाएगी कि उसे दोबारा निगम में किसने रखा। वसूली के रास्ते निकालने की कोशिश में जुटा निगम इस बीच ठेकेदारों द्वारा फर्जी बिलों के जरिए निगम से हड़पे गए करोड़ों रुपये की वसूली के प्रयास भी शुरू हो गए हैं।

निगमायुक्त शिवम वर्मा ने बताया कि हम अधिवक्ताओं से इस संबंध में चर्चा कर रहे हैं ताकि कानूनी प्रविधानों के मुताबिक कार्रवाई कर सकें। हमने आरोपितों की संपत्ति की जानकारी भी निकाली है।

जलकार्य विभाग में भी गड़बड़ी की आशंका

जांच के दौरान सामने आईं 188 फाइलों में से 178 फाइलें ड्रेनेज विभाग की हैं। शेष फाइलें जनकार्य विभाग, उद्यान व अन्य विभागों की हैं। इस बात की आशंका भी जताई जा रही है कि ड्रेनेज विभाग की तरह ही जलकार्य विभाग में भी गड़बड़ी हुई है। गौरतलब है कि कुछ वर्ष पहले शहर में बड़े पैमाने पर जल वितरण लाइनें बिछाई गई थीं।

संभवत: गुरुवार को सौंप देंगे रिपोर्ट

हमारी जांच लगभग 90 प्रतिशत पूरी हो गई है। उम्मीद है हम गुरुवार को रिपोर्ट शासन को सौंप देंगे।सिद्धार्थ जैन, अपर आयुक्त निगम इंदौर