नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर Indore News। 'संडे'... यह शब्द सुनते ही हर बच्चे के मन में खुशी की लहर दौड़ जाती है। खुशी होगी भी क्यूं नहीं, पूरे सप्ताह पढ़ाई के बाद यही वह दिन होता है, जो बच्चों को तरोताजा कर देता है। मगर लालबाग के आसपास बसी बस्तियों के बच्चों के लिए यह दृश्य एकदम उलट है। यहां पूरे सप्ताह मस्ती के बाद बच्चों के लिए रविवार का दिन पाठशाला के लिए होता है।
दरअसल, यहां उसी रविवार को निश्शुल्क पाठशाला लगती है, जब सारे जमाने के स्कूलों की छुट्टी होती है। इस पाठशाला में पुलिस और आर्मी के जवान पढ़ाते हैं। यहां पढ़ने वाले बच्चों का पास में स्थित सरकारी स्कूलों में दाखिला भी करवाया गया है। पाठशाला का शुभारंभ वर्ष 2016 में पुलिस जवान संजय सांवरे ने तीन बच्चों को पढ़ाने से की थी, अब यहां 63 बच्चे पढ़ते हैं।
दरअसल, संजय ने वर्ष 2018 में
मप्र पुलिस सेवा को ज्वाइन किया था। परंतु पुलिस की नौकरी से पहले ही संजय ने मलीन बस्तियों के बच्चों को पढ़ाने का सिलसिला शुरू कर दिया था। उस समय संजय परिवहन विभाग से संबंधित कामों के लिए एजेंट के रूप में कार्य करते थे। फिलहाल ये जोन चार के एडीसीपी कार्यालय में तैनात हैं। संजय ने बताया कि वह कालेज के दिनों में
लालबाग जाया करते थे। वहां बस्ती के बच्चे पूरे दिन यहां-वहां भटकते रहते या फिर गाली-गलौज करते और बेजा कामों में लगे रहते थे। उन्हें शिक्षित करने के उद्देश्य से संजय ने पढ़ाना शुरू किया। शुरुआत में बस्ती के तीन बच्चे पहुंचे। जब उनमें सकारात्मक बदलाव दिखाई देने लगा, तो अन्य बच्चे भी आने लगे।
अब महू से आने लगे कुछ जवान भी
पाठशाला में पहली कक्षा से लेकर 12वीं तक के बच्चों को पढ़ाया जाता है। संजय को पुलिस की ड्यूटी के चलते समय कम मिल पाता है, इस वजह से सप्ताह में केवल एक दिन रविवार को पाठशाला लगाई जाती है। अब महू कैंट से कुछ आर्मी के जवान भी समय निकालकर बच्चों को पढ़ाने आते हैं। 5 से 7 जवान रेगुलर कक्षाएं लेकर पढ़ाने लगे हैं। इसके अलावा समय मिलने के अनुसार अन्य जवान भी पाठशाला में अध्यापन के लिए आते रहते हैं। यहां सफेद बोर्ड पर मार्कर से बच्चों को विषय पढ़ाए जाते हैं। वर्ष 2016 में संजय ने जिन बच्चों को पढ़ाना शुरू किया था, अब कुछ वर्षों में इनका उज्ज्वल भविष्य समाज को दिखने लगेगा।
भिक्षा नहीं शिक्षा पर करेंगे काम
संजय अब भविष्य के लिए और बेहतर योजना बना रहे हैं। नईदुनिया से बातचीत में वे बताते हैं कि अब 'भिक्षा नहीं शिक्षा' अभियान पर काम करेंगे। इसमें लोगों से भी अपील करेंगे कि बच्चों को भिक्षा न दें, इससे ये लोग नशे की तरफ ज्यादा आकर्षित होते हैं। इसकी बजाय इनकी शिक्षा के प्रबंध करें। लालबाग के अलावा इंदौर की सभी बस्तियों में बच्चों को शिक्षा देने का प्रयास करेंगे।
2019 में सब ए ग्रेड से हुए पास
संजय ने बताया कि जो बच्चे पहले बस्ती में यहां-वहां भटका करते थे, वे जब पाठशाला में पढ़ने लगे तो वर्ष 2019 में ज्यादातर बच्चे ए ग्रेड से पास हुए। इनमें कक्षा 6 से 10 तक के सभी विद्यार्थी शामिल थे। ऐसे परिणामों के बाद बच्चों के परिजन काफी भावुक हो गए थे। कुछ ने तो हरसंभव तरीके से बच्चों को आगे पढ़ाने की शपथ ली। वहीं एक बच्ची ने पिछले साल 12वीं की परीक्षा दी और अच्छे नंबरों से पास हुई।
अब पढ़ रहे 63 बच्चे
पाठशाला की शुरुआत केवल तीन बच्चों के साथ हुई थी। संजय ने बताया कि शुरुआत में बच्चों को पढ़ाना बेहद मुश्किल था, क्योंकि न तो बच्चे पढ़ना चाहते थे और न ही उनके अभिभावक पढ़ाना चाहते थे। बाद में पैरेंट्स को जागरूक किया, उन्हें शिक्षा के महत्व के बारे में विस्तार से बताया। देश-दुनिया के बहुतायत सफल लोगों के उदाहरण दिए, तब कुछ बच्चे पढ़ने आए। जब पढ़ाई से बच्चों का व्यवहार बदला, उनकी जानकारी बढ़ी, तो धीरे-धीरे अन्य बच्चे भी आने लगे। अब कुल 63 बच्चे पाठशाला में पढ़ रहे हैं।
स्वयं के वेतन से दिलाई किताबें-कापी
पाठशाला को संजय अपने वेतन से ही चला रहे हैं। इसके पीछे की वजह बताते हुए वे कहते हैं- बच्चों के घर वाले शिक्षा को महत्वपूर्ण नहीं समझते। वैसे भी ये लोग आर्थिक रूप से कमजोर हैं, इसलिए शिक्षा पर खर्च नहीं करना चाहते। ऐसे में बच्चों में रुचि जगाने और उनमें शिक्षा के प्रति जागरूक करने के लिए उन्हें किताबें, कापी, पेन, पेंसिल आदि शिक्षण सामग्री दिलाई। तब जाकर बच्चों में पढ़ाई के प्रति रुचि पैदा हुई और वे पाठशाला में आने लगे।
आइएएस-आइपीएस भी पढ़ाने आ चुके
पाठशाला में बच्चों को 12वीं तक की निश्शुल्क शिक्षा दी जाती है। इस पाठशाला के प्रति बड़े अधिकारियों में भी रुचि और समर्थन का भाव है, इसीलिए पूर्व कलेक्टर टी इलैयाराजा, पूर्व पुलिस कमिश्नर मकरंद देऊस्कर समेत कई अधिकारी यहां पहुंचकर बच्चों पढ़ा चुके हैं। ये अधिकारी बच्चों को औपचारिक शिक्षा के साथ ही अपने अनुभव, करियर गाइडेंस, व्यवहार परिवर्तन, आधुनिकता समेत कई विषयों की जानकारी देते हैं।