By Sameer DeshpandeEdited By: Sameer Deshpande
Publish Date: Fri, 09 Feb 2024 08:16:55 AM (IST)Updated Date: Fri, 09 Feb 2024 09:56:57 AM (IST)
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर Indore News। कहने को तो उनकी उम्र महज 25 वर्ष है, परंतु हौसला और हिम्मत पहाड़ जैसी। ये हैं आशुतोष पांडे, जो 22 दिसबंर 2022 को पर्यावरण संरक्षण के लिए पैदल ही भारत यात्रा पर निकल पड़े। उत्तर प्रदेश से चलकर ये बिहार, छत्तीसगढ़, ओडिशा, आंध्रप्रदेश, तमिलनाडु, केरल, कर्नाटक, महाराष्ट्र समेत 13 राज्यों से होते हुए इंदौर पहुंचे हैं। इन दिनों इनका ठिकाना इंदौर है। अब तक आशुतोष 21 राज्य, 75 जिले, 1700 गांवों से लोगों को जागरूक करते हुए जा रहे हैं। पर्यावरण और प्रकृति के प्रति इनका जुनून ऐसा है कि ये 90 हजार रुपये प्रतिमाह वेतन वाली नौकरी छोड़कर भारत दर्शन यात्रा पर निकले हैं।
आशुतोष के मन में
प्रकृति संरक्षण का संदेश देने का यह विचार कहां से आया? यह पूछने पर वे नईदुनिया से बातचीत में कहते हैं- कोरोना काल में आक्सीजन की पूर्ति न होने से मेरे एक प्रिय मित्र की मृत्यु हो गई थी। उस क्षण लगा कि यदि आक्सीजन नहीं, प्रकृति नहीं,
पर्यावरण नहीं है तो फिर हम सबका जीवन क्षणभंगुर है। यही विचार मन को मथता रहा और एक दिन ऐसा भी आया जब 10.80 लाख रुपये सालाना की नौकरी छोड़कर पर्यावरण बचाने के लिए लोगों को जागरूक करने का प्रण लिया और पैदल भारत यात्रा शुरू कर दी।
आशुतोष 'सेव द इन्वायरमेंट' लिखा बोर्ड लेकर अपने बैग में तिरंगा लगाए लोगों को पर्यावरण संरक्षण के लिए जागरूक कर रहे हैं। बोर्ड में पैदल 16,000 किमी चलने का लक्ष्य भी लिखा है। आशुतोष प्रतिदिन करीब 30 किमी चलते हैं। मप्र के बाद वे राजस्थान, दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, कश्मीर, लद्दाख, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश होते हुए अयोध्या पहुंचेंगे।
परिवार ने पहले की चिंता, फिर साथ दिया
आशुतोष ने बताया कि जब नौकरी छोड़कर पैदल भारत यात्रा की ठानी, तो परिवार के लोग सन्न रह गए। पहले सबने विरोध किया और चिंता जताई। कुछ रिश्तेदार तो मुझे मानसिक रूप से विचलित बताकर डाक्टर को दिखाने तक की बातें करने लगे थे। किंतु मैं अपने संकल्प से डिगा नहीं। परिवार ने जब मेरा जुनून देखा तो मेरा यह संकल्प पूरा करने में साथ दिया।
अभी नहीं तो कभी नहीं
आशुतोष ने बताया कि आए दिन आए शोध बताते हैं कि प्रदूषण की वजह से दिल्ली में रहने वालों की उम्र कम होती जा रही है। फिर भी हम नहीं सुधर रहे हैं। पर्यावरण संरक्षण के लिए कोई ठोस प्रयास नहीं हो रहे हैं। इसके लिए हम सब भारतवासियों, खासकर युवाओं को पर्यावरण संरक्षण के लिए आगे आना चाहिए। अगर कुछ वर्षों तक हमने और लापरवाही की, तो जलवायु परिवर्तन से मनुष्यों का ही नहीं बल्कि प्रत्येक प्राणी का बहुत नुकसान होगा। यह अभी नहीं जागे तो फिर कभी नहीं वाली स्थिति है।
वर्ष 2026 में पहुंचेंगे अयोध्या
आशुतोष ने पैदल भारत यात्रा का अंतिम पड़ाव श्रीराम की नगरी अयोध्या को रखा है। वे अगले वर्ष अर्थात जनवरी 2026 में अयोध्या पहुंचने का लक्ष्य बनाकर चल रहे हैं। तब अयोध्या में एक लाख पौधों का रोपण किया जाएगा, जिसे श्रीराम वाटिका नाम दिया जाएगा। आशुतोष बाद में अपनी टीम के साथ उस वाटिका का संरक्षण भी करेंगे।
बच्चे खेती नहीं जानते, इसकी चिंता
आशुतोष ने बताया कि वह जब स्कूली बच्चों से पूछते हैं कि किसे-किसे खेती के बारे में जानकारी है, तो कोई भी बच्चा हां में हाथ नहीं उठाता। यह बहुत चिंता की बात है। भविष्य में यदि कोई भी खेती नहीं करेगा, तो हम मनुष्य खाएंगे क्या? राज्य सरकारों को हर जिले में एक निश्चित भूमि आरक्षित करनी चाहिए, जहां बच्चों को खेती-बाड़ी का प्रायोगिक ज्ञान दिया जाए। अगर ऐसा नहीं किया गया, तो वर्ष 2040 की पीढ़ियां फार्मिंग से अनजान हो जाएंगी और हम अन्न से वंचित हो जाएंगे। खेती-बाड़ी से न केवल मन और शरीर स्वस्थ रहता है, बल्कि मिट्टी से भावनात्मक जुड़ाव भी बनता है।
शिकायत कर गणगौर घाट की कराई सफाई
आशुतोष इंदौर पहुंचते ही सबसे पहले राजवाड़ा गए। वहां से कृष्णपुरा छत्री के पास पहुंचे। यहां जब घाटों पर गंदगी देखी तो उन्होंने नगर निगम को शिकायत की, तथा कलेक्टर को ज्ञापन भी सौंपा। उन्होंने आग्रह किया कि घाट पर सीसीटीवी कैमरे लगें और गार्ड की तैनाती हो। कलेक्टर ने पूरे घाट की सफाई का आश्वासन भी दिया। इसके बाद आशुतोष ने पितृ पर्वत पर जाकर पौधारोपण किया।
20 करोड़ लोगों को जागरूक करने का लक्ष्य
अब तक की यात्रा में आशुतोष 133 स्कूलों के 70 हजार बच्चों को सेमिनार के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण के उपायों की जानकारी दे चुके हैं। उनका मानना है कि वह पूरे सफर में करीब 20 करोड़ लोगों को पर्यावरण के प्रति जागरूक करेंगे।