यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Apr 03, 2024 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
Indore Gold Kulfi: इंदौर में एक ऐसी जगह यहां सोना बेचा, पहना ही नहीं बल्कि कुल्फी पर लपेटकर खाया भी जाता है
यहां सामान्य कुल्फी पर 24 कैरेट सोने की वरक इस तरह लगाकर ग्राहकों को दी जाती है कि सोने की वरक और डंडी ही नजर आती है।
By Sameer DeshpandeEdited By: Sameer Deshpande
Publish Date: Wed, 03 Apr 2024 01:16:40 PM (IST)Updated Date: Wed, 03 Apr 2024 01:24:45 PM (IST)
कुल्फी पर लपेटकर खाया भी जाता है सोनाHighLights
- शहर के सराफा बाजार में सामान्य कुल्फी पर 24 कैरेट सोने की वरक इस तरह लगाकर ग्राहकों को दी जाती है।
- अंदाज भी ऐसा कि कुल्फी भी शाही नजर आती है और उसे खाने वाला खुद को किसी राजा-महाराजा से कम नहीं समझता।
- शाही कुल्फी सहित करीब 18 तरह की कुल्फी सराफा में प्रकाश कुल्फी एंड फालुदा दुकान बंटी यादव परोस रहे हैं।
Indore Gold Kulfi: नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर । गर्मी के दिन और गली-मोहल्लों में घंटी बजाते हुए आने वाले ठेले जिनपर लाल कपड़े में लपेटे बड़े-बड़े मटके रखे रहते थे और उनमें बर्फ के बीच दबी टीन की छोटी-छोटी गोल डिब्बियां। इनमें जमी रहती थी कुल्फी और कुल्फी वाले के गली में आते ही बच्चों-बड़ों की टोली उसके चारों और खड़ी होकर अपनी-अपनी पसंद की कुल्फी की फरमाइश करना शुरू कर देती थी।
तेजी से बदलते शहर में बेशक कुल्फी बेचने के तरीके और फ्लेवर में भी बदलाव आ गया है, पर कुछ दुकानदार अभी भी उसे मटके में ही जमा रहे हैं और उसे अलहदा अंदाज में परोस रहे हैं। अंदाज भी ऐसा कि कुल्फी भी शाही नजर आती है और उसे खाने वाला खुद को किसी राजा-महाराजा से कम नहीं समझता। आखिर हो भी क्यों ना यह कुल्फी सोने की जो है।
शहर के
सराफा बाजार में रात को लगने वाली खानपान की दुकानों के बीच सोने की कुल्फी बरबस ही ध्यान खींच लेती है। सामान्य कुल्फी पर 24 कैरेट सोने की वरक इस तरह लगाकर ग्राहकों को दी जाती है कि
सोने की वरक और डंडी ही नजर आती है। इस शाही कुल्फी सहित करीब 18 तरह की कुल्फी सराफा में प्रकाश कुल्फी एंड फालुदा दुकान बंटी यादव परोस रहे हैं।
पहले केवल केसर की कुल्फी थी, अब कई फ्लेवर उपलब्ध
बंटी बताते हैं कि 1965 में यह दुकान उनके दादाजी ईश्वरीलाल ने शुरू की थी। तब वे केसर कुल्फी ही बनाते थे। जब पिताजी ने दुकान संभाली तो कुल्फी में काजू-केवड़ा, सीताफल और आम के फ्लेवर भी शामिल किए। अब जब मैं और मेरा भाई शिवा इसे संभाल रहे हैं तो हमने नवाचार करते हुए काजू-गुलकंद, पान, स्ट्राबेरी, जामुन, मलाई, चाकलेट, अंजीर-ड्रायफ्रूट आदि फ्लेवर की कुल्फी देना शुरू किया। चूंकि हमें सोना पहनने का शौक है इसलिए ग्राहकों की मांग पर सोने वाली कुल्फी देने का सोचा और इस तरह कुल्फी पर सोने की वरक लगाकर इसे परोस रहे हैं।
जहां तक कुल्फी तैयार करने की बात है इसके लिए दूध फतेहाबाद से मंगवाया जाता है और दूध को मद्धी आंच पर उबाला जाता है जिससे उसका स्वाद बढ़ जाता है। कुल्फी को पारंपरिक ढ़ंग से मटके में ही जमाया जाता है। मटके में डली बर्फ और खडे नमक के बीच कुल्फी की डब्बी डालकर मटके को करीब एक घंटे तक हिलाया जाता है ताकि कुल्फी अच्छे से जमे। अलग-अलग वैरायटी की कुल्फी होने और स्थानाभाव के चलते उसे सराफा में फ्रिज में रखा जाता है ताकि ग्राहक को उसकी पसंद की कुल्फी ही दी जाए।
खुद भी सोने से लदे रहते हैं
सोने के प्रति लगाव इतना है कि कुल्फी बेचने वाले दोनों भाई खुद भी दुकान पर सोने से लदे हुए बैठते हैं। गले में मोटी चैन, हाथों में कड़े व अंगूठियां पहनते हैं। कई बार लोगों के पूछने पर कहते हैं कि यह सभी नकली हैं। इनके सोने की कुल्फी के वीडियो सोशल मीडिया पर काफी वायरल हैं, जिन पर कई तरह के कमेंट्स भी हैं।