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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Mar 20, 2024 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

Indore News: मिस यूनिवर्स सुष्मिता सेन को पसंद आया इंदौर का स्वागत, दिल खोलकर की महिलाओं से चर्चा

Indore News: सुष्मिता कहती हैं कि मैं 48 वर्ष की हो चुकी हूं और 30 वर्षों से चर्चा के केंद्र में हूं। 1994 वर्ष पहला अवसर था जब भारत को दो बड़े खिताब ...और पढ़ें

By Sameer DeshpandeEdited By: Sameer Deshpande
Publish Date: Wed, 20 Mar 2024 09:22:08 AM (IST)Updated Date: Thu, 21 Mar 2024 08:35:22 AM (IST)
Indore News: मिस यूनिवर्स सुष्मिता सेन को पसंद आया इंदौर का स्वागत, दिल खोलकर की महिलाओं से चर्चा
बालीवुड अभिनेत्री सुष्मिता सेन इंदौर पहुंची।

HighLights

  1. यह ध्यान रखना चाहिए कि हम बच्चों को जो सिखाते हैं, उसे वे समय के साथ भूल जाते हैं।
  2. मिस यूनिवर्स बनने के बाद मुझे हर दिन खूबसूरत ही लगता होता था।
  3. मैंने अपने जीवन में हर पल की खुशी मनाई है, चाहे वह जीत हो, हार हो, दुख-दर्द हो।

Indore News: नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। करीब 30 वर्ष पहले मिस यूनिवर्स का खिताब जीतकर सुष्मिता सेन ने देश का नाम रोशन किया था। वह पहली भारतीय महिला थी, जिसने यह खिताब जीता था। उस दौरान उनकी उम्र महज 18 वर्ष थी। 1994 में सुष्मिता और ऐश्वर्या राय ने भारत के नाम दो बड़े खिताब जीते थे। यह एक बहुत बड़ी उपलब्धि थी।

सुष्मिता ने इसके बाद बालीवुड करियर की शुरुआत, जहां उन्हें अलग पहचान मिली। सुष्मिता सेन ने शादी तो नहीं की लेकिन उनकी दो बच्चियां हैं। दरअसल, उन्होंने दो बच्चियों को गोद लिया था। आज हम उनके बारे में इसलिए बात कर रहे हैं, क्योंकि वह बुधवार को इंदौर में महिलाओं से चर्चा करने के लिए मौजूद थी। फिक्की फ्लो इंदौर द्वारा होटल शेरेटन ग्रैंड पैलेस में आयोजित कार्यक्रम में सुष्मिता सेन ने वुमन एंपावरमेंट विषय पर महिलाओं के सवालों के दिलचस्प उत्तर दिए।


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इस दौरान उनसे चर्चा कर रही थी फिक्की फ्लो की चैयरपर्सन ममता बाकलीवाल। बतां दे कि इस दौरान सुष्मिता ने इंदौर के स्वागत व यहां के डाक्टरों की तारीफ भी की। सुष्मिता के हाल में पहुंचते ही महिलाओं ने शोर मचाना शुरू कर दिया, महिलाओं ने सुष्मिता को देखते ही आई लव यू चिल्लाना शुरू कर दिया।

इसके जवाब में सुष्मिता ने भी मुस्कुरा कर जवाब दिया। हर कोई उनके साथ सेल्फी लेने के लिए बेताब था। हाल में बड़ी संख्या में महिलाएं एकत्रित थी। आगे पढ़िए महिलाओं से सुष्मिता की चर्चा के कुश अंश।

भीतर की खूबसूरती को पहचाने

सुष्मिता कहती हैं कि मैं 48 वर्ष की हो चुकी हूं और 30 वर्षों से चर्चा के केंद्र में हूं। 1994 वर्ष पहला अवसर था जब भारत को दो बड़े खिताब एक साथ मिले। साल 1994 में ऐश्वर्या राय ने जहां 'मिस वर्ल्ड' का ताज जीता, वहीं मुझे मिस यूनिवर्स का खिताब मिला। मेरी उम्र उस दौरान सिर्फ 18 वर्ष की थी। कुछ ही वर्षों बाद मैंने बालीवुड में डेब्यू किया। फिर दो बच्चियों की मां बनीं और इस बीच ओटीटी पर भी फिल्म की।

अब तक का मेरा सफर काफी खूबसूरत रहा। उन्होंने आगे कहा कि मिस यूनिवर्स बनने के बाद मुझे हर दिन खूबसूरत ही लगता होता था। हालांकि काफी समय बाद मुझे अहसास हुआ कि खूबसूरती सिर्फ बाहर से नहीं होती क्योंकि बाहर की खूबसूरती समय के साथ ढल जाती है। आपको वह ढूंढना चाहिए, जिससे समय के साथ आपकी खूबसूरती बढ़ती जाए। ये चीजें आपके व्यक्तित्व में होती हैं। आपको खुदको पहचानना होगा।

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पेट से नहीं बल्कि दिल से दिया बच्चे को जन्म

मैंने अपने जीवन में हर पल की खुशी मनाई है। चाहे वह जीत हो, हार हो, दुख-दर्द हो, या फिल्म फ्लाप हुई हो या हिट हुई हो। मैंने हर पल सिर्फ खुशी मनाई है। मुझे बचपन से बच्चे बहुत पसंद थे। एक बार मैं किसी काम के चलते अनाथालय गई, तो वहां बच्चों को देखा। उन्हें देखकर मुझे अहसास हुआ कि दुनिया में अभी बहुत अंतर है।

अनाथालय में जो बच्चे हैं, उन्हें एक मां की जरूरत है। मेरा मानना है कि बच्चा पेट से ही बच्चे को जन्म दिया जाए, यह जरूरी नहीं। अगर दिल से जन्म देने की ताकत आप में है, तो बच्चा गोद ले लो। मैंने जब घर पर पिता जी से यह बताया तो उन्होंने कहा अभी तुम खुद बच्ची हो, बच्चा कैसे गोद लोगी। हालांकि मैंने बाद में बच्ची को गोद लिया, जो मेरे जीवन का सबसे शानदार फैसला था।

निरंतर करें सपनों का पीछा

हम अक्सर बच्चों को अच्छी बातें सिखाते हैं। लेकिन हमें यह ध्यान रखना चाहिए कि हम बच्चों को जो सिखाते हैं, उसे वे समय के साथ भूल जाते हैं लेकिन वे हमें देखकर जो सीखते हैं, उसे वह कभी नहीं भूलते। आप बच्चों को सिखाने के लिए स्वयं की आदतों में भी परिवर्तन लाएं। ताकि बच्चे आपको देखकर सीख सकें। सफलता के प्राप्त करने के सवाल पर उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति में दृढ़ विश्वास होना चाहिए। क्योंकि सपनों को पूरा होने में समय बहुत लगता है।

ऐसे में आपको धैर्य रखकर आगे बढ़ना होगा, ये हौसला रखना होगा कि आपका सपना एक दिन पूरा अवश्य होगा। दरअसल, सपनों के पीछे भागना पड़ता है, अगर बैठकर पछताते रहेंगे, तो कुछ नहीं हासिल होने वाला। बल्कि आपको निरंतर प्रतिदिन मेहनत करनी होगी। असफलता से टूटना नहीं होगा, तभी आपको एक दिन सफलता मिलेगी।

अपनी सीमाओं को जानें

हर किसी को खुदसे प्यार करना चाहिए और अपना सम्मान करना चाहिए। क्योंकि जो सम्मान हम दुनिया से मांगते हैं, वह पहले खुद ही करना पड़ेगा। हम बचपन से सुनते आ रहे हैं कि लड़की को त्याग करना पड़ता है उसे दूसरे के अनुसार ढ़लना होता है लेकिन यह सब सही है लेकिन उसकी एक सीमा होनी चाहिए। ठीक हैं लड़की हूं त्याग कर दिया लेकिन यह त्याग क्या सिर्फ लड़की ही करेगी और कबतक करेगी। आपको अपनी बाउंड्री स्वयं तय करना होगा। हालांकि आत्मसम्मान के लिए दुनिया से लड़ जाना जरूरी नहीं है क्योंकि एक महिला अपनी नजाकत से ही दुनिया जीत सकती है।