यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jan 29, 2024 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
Indore News: बाधा से बढ़ती है प्रभु के लिए भक्त की भक्ति : राजेंद्रदास देवाचार्य महाराज
Indore News: खातीपुरा राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा।
By Sameer DeshpandeEdited By: Sameer Deshpande
Publish Date: Mon, 29 Jan 2024 10:25:28 AM (IST)Updated Date: Mon, 29 Jan 2024 10:25:28 AM (IST)
बाधा से बढ़ती प्रभु के लिए भक्त की भक्ति : राजेंद्रदास देवाचार्य महाराज Indore News: नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। भगवत से आत्मशुद्धि हो जाती है। भागवत प्रेम सर्वोपरि है। इससे भगवान के प्रति निरंतर प्रेम बढ़ता जाता है वहीं भक्ति होती है। भगवत प्रेम और कृष्ण प्रेम हर व्यक्ति को होना चाहिए, अगर भक्ति में बाधा आती है तो उतना ही प्रेम बढ़ जाता है। हर व्यक्ति को भगवान की शरण में रहकर ही जीवन जीकर संतों की कृपा प्राप्त होती है। संसार में जो व्यक्ति प्रसन्न है वो स्वार्थ तक ही प्रसन्न रहता है, जहां स्वार्थ खत्म होता है वहां प्रसन्नता खत्म हो जाती है।
यह बात राजेंद्रदास महाराज ने
अभय प्रशाल में कही। वे सात दिवसीय
भागवत कथा में संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि ज्ञान में कभी कामना नहीं होना चाहिए। हर व्यक्ति को भगवान का प्रतिदिन स्मरण कर गुरुओं की सेवा हमेशा करना चाहिए। कपट छोड़कर हर व्यक्ति को भक्ति और नारी का सम्मान करना चाहिए। धर्म का श्रद्धापूर्वक अनुष्ठानकर मानव जीवन को सार्थक करे।
मनुष्य को इच्छा करना ही छोड़ देना चाहिए, इच्छाओं पर विराम लगा देना चाहिए। संतो की सेवा, गौ सेवा, माता पिता की सेवा ही सबसे बड़ी सेवा है। व्यक्ति को धन का सदुपयोग करे। धर्म का फल मोक्ष है, भगवत प्राप्ति ही धर्माचरण का फल है अच्छे कर्म में धन का उपयोग करना और अर्थ धर्म के लिए है यह समझना होगा। व्यक्ति के जीवन में राम नाम ही आधार है। कामना की पूर्ति हो जाती है तब तक ही व्यक्ति भक्ति करता है। उसके बाद व्यक्ति भक्ति करना बंद कर देता है लेकिन भक्ति जारी रहना चाहिए, कामना वाली भक्ति निरंतर नही चलती है।
पीठाधीश्वर महामंडलेश्वर रामगोपालदास महाराज ने बताया कि 350 वर्ष प्राचीन खातीपुरा श्री राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव में वास्तु पूजन, क्षेत्रपाल मंडल पूजन सहित अन्य पूजन वेद मंत्रों के बीच हुआ। उसके बाद आचार्य श्री विष्णुकांत शास्त्री महाराज के आचार्यत्व में मूर्तियों का अन्नाधिवास, जलाधिवास आचार्यों विद्वानों की उपस्थिति में वैदिक मंत्रोच्चार के बीच किया। मुख्य यजमान अशोक बिदासरिया ने पूजन अर्चन किया। सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा में वृंदावन अयोध्या, चित्रकूट सहित देशभर आए साधु संतों और ब्राह्मणों ने कथा का श्रवण किया। जय श्रीराम के जयकारों से पूरा परिसर गूंज उठा। कथा के मंच पर खातीपुरा श्रीराम मंदिर की प्रतिकृति बनाई गई। कथा सुनने हजारों की संख्या में भक्त उमड़े।
कथा में महामंडलेश्वर दीनबंधुदास महाराज, मदनमोहनदास महाराज, शिवरामदास महाराज, गंगादास महाराज, राघवेंद्रदास महाराज, रामगोपालदास महाराज, केदारनाथ महाराज, जानकीवल्लभ दास महाराज सहित बड़ी संख्या में साधु संत मोजूद थे।