
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर Indore News। तीन साल बाद फिर तेजी से विलुप्त हो रहे गिद्धों को लेकर वन विभाग ने प्रदेशभर के जंगलों में एक साथ गिद्धों की गिनती का काम शुरू किया है। शुक्रवार से प्रदेशभर के 33 जिलों में आने वाले 900 से अधिक वनक्षेत्रों में वनकर्मियों से गिनती करवाई गई है, जिसमें अकेले इंदौर वनमंडल के 25 स्थानों पर 30 से अधिक वनकर्मी शामिल थे।
पहली मर्तबा इस काम में एनजीओ की मदद भी ली गई है। अधिकारियों के मुताबिक जमीन और पेड़ों पर बैठे गिद्धों को गिनती में शामिल किया जाता है। इस बार दो दिन लगातार गिद्धों को लेकर सर्वे किया जाएगा। वैसे गिद्धों की तस्वीर और जानकारी एप्लीकेशन के माध्यम से देना है। हालांकि प्रत्येक वनमंडल को चार से पांच दिन में सर्वे रिपोर्ट मुख्यालय को भेजना है।

पिछले बार गिनती के दौरान इंदौर, चोरल, महू और मानपुर के 36 स्थानों पर 117 गिद्ध पाए गए थे। वैसे एजिप्सिया, वाइट रम्प्ड, किंग कल्चर, लांग बिल्ड और यूरेशियस और सिलेंडर बिल्ड प्रमुख हैं। इंदौर वनमंडल में ज्यादातर गिद्ध इजिप्सया प्रजाति के पाए जाते हैं, जिनकी गर्दन व शरीर सफेद और चोंच पीले रंग की होती है। शुकवार को इंदौर वनंडमल की 18 टीमें जंगलों में सर्वे करने पहुंची।
इंदौर रेंज में आने वाले देवगुराडिया वनक्षेत्र में गिद्धों को देखने के लिए सीसीएफ नरेंद्र सनोडिया और डीएफओ महेंद्र सिंह सोलंकी भी पहुंची। इस दौरान रेंजर जयवीर सिंह भी मौजूद थे। इंदौर वनमंडल में पेडमी, कजलीगढ़, पातालपानी, देवगुराड़िया (ट्रेंचिंग ग्राउंड), आशापुरा, रतवी, गिद्ध खोह (सिवनी), कंपेल, तिंछाफाल, बड़िया सहित इंदौर, महू, चोरल और मानपुर और रालामंडल अभयारण्य के कई वनक्षेत्र शामिल हैं।
कचरा साफ, नहीं मंडराते गिद्ध
2016 में सबसे ज्यादा गिद्ध इंदौर रेंज के देवगुराड़िया वनक्षेत्र में देखे गए थे, क्योंकि उस दौरान वहां शहर का कचरा फेंका जाता है। ट्रेंचिंग ग्राउंड में गंदगी और बदबू की वजह से गिद्ध मंडराते थे। मगर 2020 के बाद वहां की तस्वीर बदलने से गिद्धों ने भी मंडराना बंद कर दिया है। कचरा नहीं होने से यहां गिद्ध कम नजर आने लगे हैं।
सर्वे के बाद बनाएंगे रिपोर्ट
इंदौर और आसपास के जंगलों में सिर्फ एक या दो प्रजाति वाले गिद्ध नजर आए हैं। सर्वे पूरा होने के बाद रिपोर्ट बनाएंगे। सर्वे के दौरान 18 टीमों के साथ कुछ एनजीओ और विद्यार्थी भी गणना का हिस्सा बने। वैसे प्रारंभिक जानकारी को मोबाइल एप्लीकेशन के माध्यम से भेजी है।
- महेंद्र सिंह सोलंकी, डीएफओ, इंदौर वनमंडल