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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jan 24, 2024 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

Indore News: बच्चियों को बाल आश्रम केंद्र में रखने को अवैध हिरासत नहीं माना जा सकता

Indore News: वात्सल्यपुरम जैन होस्टल की बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका निरस्त, मामला 21 बच्चियों पर अत्याचार का।

By Sameer DeshpandeEdited By: Sameer Deshpande
Publish Date: Wed, 24 Jan 2024 09:56:11 AM (IST)Updated Date: Wed, 24 Jan 2024 12:21:40 PM (IST)
Indore News: बच्चियों को बाल आश्रम केंद्र में रखने को अवैध हिरासत नहीं माना जा सकता
बच्चियों को बाल आश्रम केंद्र में रखने को अवैध हिरासत नहीं माना जा सकता

Indore News: नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। बगैर पंजीयन अवैध रूप से संचालित हो रहे शहर के वात्सल्यपुरम जैन होस्टल की ओर से प्रस्तुत बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका मप्र हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने निरस्त कर दी। कोर्ट ने जिला प्रशासन और बाल कल्याण समिति द्वारा 12 जनवरी 2024 को की गई कार्रवाई को सही ठहराया है। 21 पेज के फैसले में कोर्ट ने कहा है कि प्रशासन ने बच्चियों को राजकीय बाल आश्रम में रखा है। इसे अवैध हिरासत में रखना नहीं माना जा सकता। न्यायिक मजिस्ट्रेट, बाल कल्याण समिति या किसी समक्ष प्राधिकारी जारी आदेश को इस तरह बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका के माध्यम से चुनौती नहीं दी जा सकती।

जिला प्रशासन और बाल कल्याण समिति की टीम ने 12 जनवरी को वात्सल्यपुरम जैन होस्टल के खिलाफ कार्रवाई की थी। जांच में पता चला था कि होस्टल बगैर पंजीयन के संचालित हो रहा था। टीम को यहां से 21 नाबालिग बच्चियां मिली थीं। इन बच्चियों ने टीम के सदस्यों को बताया था कि होस्टल में उनके साथ मारपीट की जाती है। उन्हें गर्म चिमटों से जलाया जाता है। गर्म तवे पर मिर्ची डालकर धूनी दी जाती है।


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बाल कल्याण समिति अध्यक्ष पल्लवी पोरवाल ने बताया कि बच्चियों को दूसरी मंजिल की रेलिंग से उलटा लटकाने, उन्हें निर्वस्त्र कर भट्टी के पास ले जाकर जलाने के प्रयास करने, भूखा रखने, बाथरूम में बंद करने जैसी बातें भी बच्चियों ने टीम के सदस्यों के सामने बताई थीं।

प्रबंधन ने कार्रवाई को बताया था गलत

जिला प्रशासन ने इन बच्चियों को वात्सल्यपुरम जैन होस्टल से शासकीय राजकीय बाल आश्रम और जीवन ज्योति बालिक गृह इंदौर शिफ्ट कर दिया था। पुलिस ने होस्टल के मैनेजर और अन्य के खिलाफ विभिन्न धाराओं में आपराधिक प्रकरण भी दर्ज कर लिया। वात्सल्यपुरम जैन होस्टल प्रबंधन ने जिला प्रशासन की कार्रवाई को अवैध बताते हुए हाई कोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका प्रस्तुत की थी। इसमें कहा था कि जिला प्रशासन ने बगैर प्रबंधन को नोटिस दिए अवैध तरीके से होस्टल में प्रवेश किया। बच्चियों को अवैध तरीके से होस्टल से अन्य स्थानों पर शिफ्ट किया गया।

न्यायमूर्ति एसए धर्माधिकारी और न्यायमूर्ति देवनारायण मिश्रा ने इस मामले में सभी पक्षकारों की बहस सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था, जो मंगलवार को जारी हुआ। 21 पेज के इस फैसले में कोर्ट ने वात्सल्यपुरम जैन होस्टल की ओर से प्रस्तुत बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका को निरस्त करते हुए माना कि जिला प्रशासन और बाल कल्याण समिति द्वारा होस्टल के खिलाफ की गई कार्रवाई अवैध नहीं थी। कोर्ट ने यह भी माना कि बाल कल्याण समिति या सक्षम प्राधिकारी द्वारा जारी आदेश के खिलाफ इस तरह से बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका प्रस्तुत नहीं की जा सकती।