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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jul 15, 2024 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

इंदौर में कई चौराहों पर तीन मिनट तक रहती है रेड लाइट, जरा सी बारिश में ट्रैफिक जाम... IIM और IIT सुधारेंगे इसे

इंदौर शहर में कई कोशिशों के बाद भी ट्रैफिक सुधर नहीं पा रहा है। बारिश के बाद तो कई प्रमुख सड़कों पर जाम लगना अब आम बात हो गई है। प्रमुख चौराहों पर यात...और पढ़ें

By Prashant PandeyEdited By: Prashant Pandey
Publish Date: Mon, 15 Jul 2024 10:27:52 AM (IST)Updated Date: Mon, 15 Jul 2024 11:00:04 AM (IST)
इंदौर में कई चौराहों पर तीन मिनट तक रहती है रेड लाइट, जरा सी बारिश में ट्रैफिक जाम... IIM और  IIT सुधारेंगे इसे
इंदौर शहर के प्रमुख चौराहों पर सुबह और शाम के समय वाहनों का जाम लग जाता है।

HighLights

  1. शहर में रेड लाइट का समय काफी अधिक है।
  2. कई बार रेड लाइट को क्रास कर जाते हैं लोग।
  3. ग्रीन सिग्नल कुछ ही समय के लिए चालू होता है।

Indore News: नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। आबादी बढ़ने के साथ ही इंदौर शहर में प्रत्येक चौराहे पर यातायात व्यवस्था बुरी तरह चरमरा गई है। जरा-सी बारिश होने या फिर वाहनों के गुत्थमगुथा होते ही सड़क पर जाम की स्थिति बन जाती है। इसकी वजह से गंतव्य तक पहुंचने में लोगों को अधिक समय लग रहा है।

बिगड़े ट्रैफिक को सुधारने की सख्त जरूरत महसूस होने लगी है। इस कार्य के लिए अब शहर की शीर्ष संस्था आईआईटी और आईआईएम इंदौर आगे आई है। ट्रैफिक सिग्नल से लेकर चौराहों को सुव्यवस्थित करने के अलावा वाहन चालकों को यातायात के प्रति जागरूक किया जाएगा। फिलहाल यातायात को बेहतर बनाने आईआईटी के विद्यार्थी जानकारी जुटाने में लगे हैं।


रेड लाइट ज्यादा समय तक रहती है

बीते दिनों महापौर पुष्यमित्र भार्गव और आईआईटी इंदौर के निदेशक प्रो. सुहास जोशी के बीच चर्चा हुई थी। इसमें चौराहों को व्यवस्थित करने सहित लोगों को यातायात के प्रति जागरूक करने पर भी बातचीत की गई। इसके बाद आईआईटी के विद्यार्थियों ने कुछ चौराहों और सिग्नल के बारे में अध्ययन किया, जिसमें पाया कि शहर में रेड लाइट का समय काफी अधिक है।

कई चौराहों पर दो से तीन मिनट तक रेड लाइट

कई चौराहों पर दो से तीन मिनट तक रेड लाइट रहती है। वाहन चालकों में धैर्य नहीं है। कई बार चालक सिग्नल नहीं होने पर भी वाहन निकालते हैं। जबकि जो वाहन चालक चालान के डर से सिग्नल पर खड़े रहते हैं, वे भी रेड लाइट बंद होते ही वाहनों को आगे बढ़ा लेते हैं।

वैसे ग्रीन सिग्नल चंद सेकंड दिया जाता है। इस वजह से चालक वाहन निकलने में जल्दबाजी करते हैं। इससे सिग्नल पर वाहन आपस में गुत्थमगुथा होते हैं और जाम जैसी स्थिति बन जाती है। फिलहाल आईआईटी ने शहर के अलग-अलग चौराहों पर सिग्नल की स्थिति देखी है।

निगम को देना होगा प्रजेंटेशन

आईआईटी और इंदौर नगर निगम में प्रारंभिक स्तर पर यातायात को लेकर चर्चा हुई है। अब निगम की तरफ से प्रजेंटेशन होना बाकी है, जिसमें आईआईटी ने प्राब्लम स्टेटमेंट मांगा है। इसके माध्यम से शहर के किन चौराहों पर यातायात की ज्यादा दिक्कतें है, वह बताना है। आईआईटी ने चुनिंदा चौराहों के बारे में पूछा है।

5-ई पर दिया सुझाव

यातायात को लेकर आईआईएम इंदौर ने 2019 में एक अध्ययन किया था, जिसमें 5-ई के बारे में सुझाव दिया था। इनमें एजुकेशन, इंजीनियिरिंग, एनफोर्समेंट, एन्वायरमेंट, इमरजेंसी प्रमुख था। आईआईएम ने चौराहों को व्यवस्थित करने के लिए इंजीनियरिंग पर जोर दिया था। लोगों में यातायात नियमों का पालन करवाने और जागरूकता के बारे में कहा।

चौराहों पर ट्रैफिक सिग्नल की टाइमिंग ज्यादा

यातायात की समस्या का समाधान निकालने के लिए इंदौर नगर निगम से प्रमुख चौराहों के बारे में पूछा गया है। वैसे शहर में ट्रैफिक सिग्नल का टाइमिंग अधिक है। इन्हें कम करने की जरूरत है, क्योंकि ज्यादा देर तक वाहन खड़े रहने से जाम की स्थिति बनती है। अभी विद्यार्थी चौराहों और सिग्नल के बारे में अध्ययन कर रहे हैं। - प्रो. सुहास जोशी, निदेशक, आईआईटी इंदौर

यातायात को व्यवस्थित करने के लिए दोनों संस्थानों को मिलकर काम करना होगा। इंजीनियरिंग और टेक्नोलॉजी पर आईआईटी अपने सुझाव रखेगी। जबकि चौराहों पर प्रबंधन करने का जिम्मा आइआइएम का रहेगा। साथ ही वाहन चालकों को साक्षर करने की जिम्मेदारी रहेगी। विद्यार्थियों को यातायात नियम बताने होंगे। - प्रो. हिमांशु राय, निदेशक, आईआईएम इंदौर