यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Aug 28, 2023 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
Indore News: ब्रेन को समझे बिना बीमारियों का इलाज असंभव
Indore News: न्यूरो संबंधी बीमारियों में सटीक काम कर रही एफएनटी तकनीक।
By Sameer DeshpandeEdited By: Sameer Deshpande
Publish Date: Mon, 28 Aug 2023 02:15:50 PM (IST)Updated Date: Mon, 28 Aug 2023 02:15:50 PM (IST)
नई तकनीक के बारे में जानकारी देते हुए विशेषज्ञ। सौ.आयोजकIndore News: इंदौर, नईदुनिया प्रतिनिधि। पूरे शरीर का नियंत्रण ब्रेन से होता है। शरीर में होने वाली प्रत्येक बीमारी का संबंध भी ब्रेन से होता है। यदि शरीर में कहीं दर्द होता है तो उस दर्द का संदेश भी ब्रेन से ही मिलता है। इसलिए जब तक ब्रेन को ठीक से न समझा जाएगा तब तक बीमारियों का सटीक इलाज संभव नहीं हो सकेगा। यह बात रविवार को फिजियोथैरेपिस्ट की दो दिवसीय वर्कशाप के समापन पर विशेषज्ञों ने कही।
वर्कशाप में सेरेब्रल पाल्सी, पैरालिसिस, पार्किंसंस, स्लिप डिस्क, ब्रेन इंजुरी, स्पाइन इंजुरी, चक्कर आना आदि बीमारियों पर विशेषज्ञों ने विस्तार से चर्चा की। स्विट्जरलैंड से आए न्यूरोथैरेपिस्ट एंड्रीज फिलिप्स ने कहा कि जो लोग न्यूरो से संबंधित बीमारियों से पीड़ित हैं उनके इलाज के लिए एक नई तकनीक फेसिलिटेसन न्यूरोसेपटिव टेक्निक (एफएनटी) है। ब्रेन में जब कुछ अनियमितता होती है तो उसका प्रभाव पूरे शरीर पर पड़ता है।
जिसे ठीक करने के लिए एफएनटी का उपयोग करते हैं। शरीर में जो अक्षमता है, उसका सीधा संबंध ब्रेन से है। दर्द हमारे शरीर के किसी एक हिस्से मे होता है, लेकिन उसका संदेश ब्रेन देता है। ब्रेन को समझे बगैर बीमारी को ठीक नहीं किया जा सकता है। ब्रेन का स्ट्रक्चर एक ही होता है लेकिन बीमारियां अलग-अलग होती हैं।
फिजियोथैरेपिस्ट डा. महेश साहू ने कहा कि
मध्य प्रदेश के अलावा
हिमाचल प्रदेश, छत्तीसगढ़, दिल्ली, राजस्थान आदि स्थानों से लकवा, स्लिप डिस्क, पार्किंसंस आदि बीमारियों के 50 से अधिक मरीज कार्यशाला में आए थे। सभी को डा. फिलिप्स ने बारीकी से देखा और उनका एफएनटी तकनीक से इलाज भी किया। कार्यशाला में मरीजों ने बीमारी से संबंधित प्रश्न भी पूछे जिनके विशेषज्ञों ने संतोषजनक जवाब दिए। विशेषज्ञों ने बताया कि फिजियोथैरेपी का उपयोग दर्द को कम करने और कमजोर मांसपेशियों की ताकत को बहाल करने के लिए उपयोग किया जाता है।
इसमें
व्यायाम, मालिश और शारीरिक उत्तेजनाओं जैसे अल्ट्रासाउंड, गर्मी, ठंड और विद्युत धाराओं का उपयोग शामिल है। फिजियोथैरेपी इनपेशेंट और आउटपेशेंट दोनों के लिए की जाती है। इनमें अस्पताल, नर्सिंग होम और पुनर्वास देखभाल केंद्र शामिल हैं। उपचार पर्याप्त रूप से योग्य और प्रशिक्षित भौतिक चिकित्सक या फिजियोथैरेपिस्ट द्वारा किया जाता है। इस दौरान फिजियोथैरेपिस्ट डा. नीतू वर्मा, डा. पूजा गोयल, डा. कृष्णा जलोदिया, डा. दिव्या जैन आदि मौजूद रहे।
फिजियोथैरेपी इन बीमारियों के लिए कारगर
- बच्चों में विकासात्मक असामान्यताएं जो उनकी हड्डियों या मांसपेशियों को प्रभावित करती हैं।
- पीठ दर्द
- पुराने आस्टियोआर्थराइटिस
- रूमेटाइड गठिया
- मांसपेशियों और जोड़ों की चोट
- हृदय संबंधी विकार
- श्वसन प्रणाली के विकार
- कमजोर मांसपेशियों को मजबूत करना