Indore-Ujjain Metro Project: इंदौर के लवकुश चौराहे से रवाना होकर उज्जैन के महाकाल लोक तक जाएगी मेट्रो…बनेंगे कुल 8 स्टेशन
मध्य प्रदेश में इंदौर और उज्जैन के बीच प्रस्तावित मेट्रो प्रोजेक्ट का अलायमेंट तय हो गया है। अब दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (डीएमआरसी) द्वारा जल्द डीपीआर प्रस्तुत की जाएगी। यह तय हुआ है कि दोनों शहरों के बीच में 8 स्टेशन बनाए जाएंगे। कुल 47 किलोमीटर हिस्से में मेट्रो चलेगी।
Publish Date: Tue, 17 Dec 2024 10:56:30 AM (IST)
Updated Date: Tue, 17 Dec 2024 11:29:01 AM (IST)
डीएमआरसी की टीम अब मप्र मेट्रो रेल कारपोरेशन के अफसरों के सामने प्रेजेंटेशन देगी। (फाइल फोटो)HighLights
- 10 हजार करोड़ की लागत
- चलेगी हाइब्रिड मोड मेट्रो
- सिंहस्थ के बाद मिलेगा लाभ
उदय प्रताप सिंह, इंदौर (Indore-Ujjain Metro Project)। इंदौर से महाकाल मंदिर तक 47 किलोमीटर हिस्से में मेट्रो चलाने के लिए कवायद शुरू हो गई। इंदौर-उज्जैन के हाइब्रिड मोड पर मेट्रो का संचालन किया जाएगा। इस पर करीब 10 हजार करोड़ रुपये खर्च का आकलन किया गया है।
इसका लाभ इंदौर व उज्जैन वासियों को सिंहस्थ के बाद ही मिल पाएगा। लवकुश चौराहे से महाकाल मंदिर तक मौजूदा फोर लेन सड़क के डिवाइडर पर पिलर खड़े कर वायडक्ट के माध्यम से मेट्रो का मार्ग तैयार किया जाएगा। दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (डीएमआरसी) द्वारा सर्वे की प्रक्रिया पूर्ण कर रुट अलायमेंट तय कर लिया है।
अब जल्द ही डीएमआरसी की टीम मप्र मेट्रो रेल कारपोरेशन के अफसरों के सामने इसका प्रेजेंटेशन देगी। इसके बाद इंदौर-उज्जैन आरआरटीएस की डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट को अंतिम रूप दिया जाएगा।
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दिल्ली एयरपोर्ट एक्सप्रेस लाइन की तर्ज पर 135 की स्पीड पर दौड़ेगी हाइब्रिड मोड मेट्रो
- इंदौर शहर में निर्माणाधीन मेट्रो रूट पर मेट्रो मेट्रो 80 से 85 किलोमीटर प्रतिघंटा की गति से चलेगी। दो शहरों के बीच रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम (आरआरटीएस) में 135 किलोमीटर प्रतिघंटा की गति से मेट्रो चलती है।
- इंदौर व उज्जैन के बीच हाइब्रिड मोड में मेट्रो का संचालन किया जाएगा। यह 135 किलोमीटर प्रतिघंटा की गति से चलेगी। वर्तमान में दिल्ली एयरपोर्ट एक्सप्रेस लाइन में इस तरह हाइब्रिड मोड में मेट्रो का संचालन किया जा रहा है।
- पूर्व में सिंहस्थ के पहले इंदौर से उज्जैन के बीच मेट्रो चलाने की योजना बनाई जा रही थी लेकिन 10 हजार करोड़ रुपये का बजट जुटाना राज्य शासन के लिए आसान नहीं होगा। यही वजह है कि यह प्रोजेक्ट सिंहस्थ के पहले पूरा नहीं हो पाएगा।