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इंदौर में पांच साल से पानी जांच बंद, दूषित जल ने छीन ली कई जिंदगियां... निगम की लापरवाही उजागर, सिस्टम पर सवाल

इंदौर शहर में नर्मदा पेयजल की गुणवत्ता को लेकर गंभीर लापरवाही सामने आई है। नगर निगम द्वारा वर्षों से पानी की नियमित जांच नहीं की जा रही, जिसका नतीजा भ...और पढ़ें

By Udaypratap SinghEdited By: Akash Sharma
Publish Date: Sun, 04 Jan 2026 08:53:51 PM (IST)Updated Date: Sun, 04 Jan 2026 09:02:00 PM (IST)
इंदौर में पांच साल से पानी जांच बंद, दूषित जल ने छीन ली कई जिंदगियां... निगम की लापरवाही उजागर, सिस्टम पर सवाल
Indore water contamination: 500 कर्मचारियों के बावजूद नर्मदा जल की जांच ठप। फाइल फोटो

HighLights

  1. पांच साल से नियमित जल जांच व्यवस्था बंद
  2. अब महीने में सिर्फ 100-150 सैंपल जांच
  3. भागीरथपुरा की 35 बोरिंग में हैजा बैक्टीरिया

नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर: इंदौर शहर में नगर निगम द्वारा वितरित किए जा रहे नर्मदा पेयजल की गुणवत्ता जांच व्यवस्था बीते पांच वर्षों से लगभग ठप पड़ी है। पहले प्रतिदिन प्रत्येक वार्ड से पानी के सैंपल लेकर मूसाखेड़ी स्थित प्रयोगशाला में जांच के लिए भेजे जाते थे, लेकिन अब हालात यह हैं कि जहां पहले प्रतिदिन 700 से 800 सैंपल पहुंचते थे, वहीं अब पूरे महीने में सिर्फ 100 से 150 सैंपल ही जांच के लिए भेजे जा रहे हैं।

यदि नगर निगम द्वारा टंकियों से जलप्रदाय शुरू करने के बाद रहवासी क्षेत्रों में नियमित सैंपल जांच की प्रक्रिया अपनाई जाती, तो भागीरथपुरा में दूषित पानी समय रहते पकड़ में आ जाता और कई निर्दोष लोगों की जान बचाई जा सकती थी।


नगर निगम के नर्मदा जल प्रदाय विभाग में 22 जोन, 35 अधिकारी और लगभग 500 कर्मचारी कार्यरत हैं। शहर की 105 पानी की टंकियों से जल आपूर्ति की जाती है। नियमानुसार, प्रत्येक टंकी से जलप्रदाय शुरू करने से पहले क्लोरीन की मात्रा की जांच की जानी चाहिए, लेकिन कई टंकियों पर इस प्रक्रिया का पालन नहीं किया जा रहा है।

हालांकि निगम के पास पर्याप्त अमला है, फिर भी वार्ड स्तर पर पानी के सैंपल लेकर जांच के लिए भेजने की जिम्मेदारी का पालन नहीं हो रहा।

ड्रेनेज का पानी बना दूषित जल का कारण

भागीरथपुरा क्षेत्र की 35 बोरिंग की जांच में हैजा फैलाने वाला बैक्टीरिया पाया गया। ड्रेनेज पाइप लाइन और चेम्बरों के ओवरफ्लो या रिसाव के कारण नर्मदा पाइप लाइन और बोरिंग में गंदा पानी पहुंच जाता है। पुराने ड्रेनेज चेम्बरों में कच्ची ईंटों की जुड़ाई होने से वे चोक हो जाते हैं और पानी जमीन में रिसता रहता है, जिससे पेयजल स्रोत दूषित हो जाते हैं।

ड्रेनेज शिकायतें ज्यादा, नियंत्रण जरूरी

इंदौर नगर निगम की इंदौर-311 हेल्पलाइन पर पेयजल की तुलना में ड्रेनेज संबंधी शिकायतें लगभग दोगुनी हैं। 3 जनवरी तक पेयजल की 1121 शिकायतें, जबकि ड्रेनेज से जुड़ी 2089 शिकायतें लंबित थीं। इससे स्पष्ट है कि यदि ड्रेनेज लाइन और चेम्बरों की व्यवस्था सुधारी जाए, तो पेयजल को सुरक्षित किया जा सकता है।

जोन नंबर जोन नाम शिकायतें (कुल) ड्रेनेज लाइन चोक ध्वस्त ड्रेनेज चेम्बर सीवरेज रिसाव
1 किला मैदान 200 – – –
4 संगम नगर 167 – – –
6 सुभाष नगर 112 – – –
8 विजयनगर 119 – – –
10 साकेत नगर 113 – – –
12 हरसिद्धि 145 – – –
13 बिलावली 140 – – –
14 हवा बंगला 105 – – –
16 एरोड्रम 108 – – –
18 कृषि विहार 136 – – –
19 स्कीम नंबर 94 119 – – –
20 जिंसी 105 – – –
22 संपूर्ण जोन 2089 823 823 103

नोट : इंदौर-311 हेल्पलाइन पर 3 जनवरी 2026 तक उपलब्ध ड्रेनेज संबंधित की शिकायतों के आंकड़े