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इंदौर-खंडवा राजमार्ग: बाईग्राम सुरंग से वाहनों को निकलने के लिए तीन महीने का करना होगा इंतजार

216 किलोमीटर लंबे इंदौर-खंडवा राजमार्ग पर तीन बड़ी सुरंगों का निर्माण किया जा रहा है। इनमें बाईग्राम, चोरल और भेरुघाट सुरंग शामिल हैं। इन तीनों सुरंगो...और पढ़ें

By Kapil NileyEdited By: Ramnath Mutkule
Publish Date: Wed, 17 Jun 2026 10:46:21 AM (IST)Updated Date: Wed, 17 Jun 2026 11:02:25 AM (IST)
इंदौर-खंडवा राजमार्ग: बाईग्राम सुरंग से वाहनों को निकलने के लिए तीन महीने का करना होगा इंतजार
सिमरोल से चोरल के बीच बनने वाले वायडक से घाट सेक्शन होगा खत्म। (फाइल फोटो)

HighLights

  1. सुरंग में पानी के रिसाव को रोकने के लिए वाटरप्रूफिंग का चल रहा काम, आगे बढ़ाई डेडलाइन
  2. भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने डेडलाइन आगे बढ़ाई है
  3. अधिकारियों के अनुसार अब सितंबर से बाईग्राम सुरंग में यातायात शुरू होने की संभावना है

नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। इंदौर-खंडवा राजमार्ग को लेकर काम की रफ्तार धीमी हो गई है। इसका असर अब निर्माणकार्य की समय सीमा पर दिखाई देने लगा है। पहले उम्मीद थी कि जुलाई से बाईग्राम सुरंग से वाहन निकलना शुरू हो जाएंगे, लेकिन अब वाहन चालको को और दो से तीन महीने और इंतजार करना पड़ सकता है।

भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने डेडलाइन आगे बढ़ाई है। अधिकारियों के अनुसार अब सितंबर से बाईग्राम सुरंग में यातायात शुरू होने की संभावना है।

216 किलोमीटर लंबे इंदौर-खंडवा राजमार्ग पर तीन बड़ी सुरंगों का निर्माण किया जा रहा है। इनमें बाईग्राम, चोरल और भेरुघाट सुरंग शामिल हैं। इन तीनों सुरंगों की लंबाई करीब 1300 मीटर है। प्रोजेक्ट के अंतर्गत जुलाई से दिसंबर के बीच अलग-अलग समय पर इन सुरंगों से वाहनों की आवाजाही शुरू होनी थी, लेकिन कुछ हिस्सों में निर्माण कार्य धीमा चलने के कारण समय बढ़ाना पड़ा है।


पानी के रिसाव को रोकने के लिए वाटरप्रूफिंग का काम भी चल रहा है

निर्माण एजेंसी मेघा इंजीनियरिंग अभी सुरंगों के अंदर कई महत्वपूर्ण काम कर रही है। बाईग्राम सुरंग के अंदर पेडेस्टल ट्रैक बनाने का काम चल रहा है। यह ट्रैक सुरंग के अंदर की सड़क व्यवस्था को मजबूत बनाने का अहम हिस्सा है। सीमेंट और कंक्रीट से इसे तैयार किया जा रहा है ताकि लंबे समय तक वाहन सुरक्षित तरीके से गुजर सकें। वहीं सुरंग के अंदर पानी के रिसाव को रोकने के लिए वाटरप्रूफिंग का काम भी चल रहा है। इसके लिए विशेष मेम्ब्रेन लगाई जा रही है, जिससे बारिश या जमीन के पानी का असर सुरंग की संरचना पर न पड़े। शटरिंग और मेम्ब्रेन जंबो लगाने का काम भी जारी है।

कंक्रीट से आएगी मजबूती

सुरंग के प्रवेश वाले हिस्से में अंडर कट चिपिंग का काम किया जा रहा है। साथ ही नई डाली गई कंक्रीट को मजबूत बनाने के लिए क्योरिंग की जा रही है। इसमें कंक्रीट को पर्याप्त नमी दी जाती है, जिससे उसकी मजबूती और टिकाऊपन बढ़ता है। निर्माण एजेंसी के प्रोजेक्ट हेड नागेश्वर राव ने बताया कि पेडेस्टल ट्रैक, वाटरप्रूफिंग, गैंट्री लगाने, कंक्रीट और अन्य तकनीकी काम लगातार चल रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि सभी जरूरी काम पूरे होने के बाद ही सुरंगों को यातायात के लिए खोला जाएगा, ताकि वाहन चालकों को सुरक्षित और बेहतर सुविधा मिल सके।

घाट सेक्शन होगा खत्म

सुरंगों और वायडक्ट से यात्रियों को बड़ी राहत मिलेगी। इसके चलते सफर करीब 10 से 12 किलोमीटर कम हो जाएगा। साथ ही सिमरोल से चोरल के बीच आने वाले दो बड़े घाट सेक्शन भी खत्म हो जाएंगे, जिससे यात्रा ज्यादा आसान और सुरक्षित होगी। बाइग्राम में बन रही पहली सुरंग के बाद वाहन सीधे वायडक्ट से गुजरेंगे।

पहाड़ों के बीच दो वायडक्ट बनाए जा रहे हैं

पहाड़ों के बीच दो वायडक्ट बनाए जा रहे हैं, जिनका करीब 60 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है। इन्हें नवंबर-दिसंबर तक पूरा करने का लक्ष्य रखा है। वायडक्ट और नए मार्ग से इंदौर से ओंकारेश्वर पहुंचने का समय घटकर करीब एक घंटा 40 मिनट रह जाएगा। जबकि अभी 80 किलोमीटर का सफर तय करने में लगभग पौने तीन घंटे लगते हैं। एनएचएआइ के प्रोजेक्ट डायरेक्टर प्रवीण यादव का कहना है कि राजमार्ग के निर्माण कार्य को लेकर अगले महीने समीक्षा की जाएगा। एजेंसी को जल्द काम पूरा करने के लिए निर्देश दिए गए है।

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