
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर : इंदौर-राघौगढ़ बायपास (ग्रीनफील्ड कॉरिडोर) प्रोजेक्ट दो साल पिछड़ चुका है। अब जाकर राजमार्ग का निर्माण अंतिम चरण में पहुंच गया है। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने इन दिनों राजमार्ग पर लाइटिंग, स्पष्ट रोड मार्किंग, रिफ्लेक्टिव स्टड और सुरक्षा दीवारें बनाई जा रही हैं।
रात में सड़क पर रोशनी और रिफ्लेक्टिव स्टड की मदद से वाहन चालकों को रास्ता और लेन आसानी से दिखाई देगी। इससे अंधेरे में होने वाली दुर्घटनाओं की आशंका कम करने में मदद मिलेगी। ये काम अगले कुछ दिनों में पूरा किया जाएगा। अधिकारियों के मुताबिक 26 किलोमीटर लंबे ग्रीनफील्ड फोरलेन कॉरिडोर को करीब एक हजार करोड़ रुपए की लागत से बनाया जा रहा है।
इंदौर-राघौगढ़ बायपास (ग्रीनफील्ड कॉरिडोर) का सबसे बड़ा फायदा इंदौर से हरदा, बैतूल होते हुए नागपुर की ओर जाने वाले यात्रियों और मालवाहक वाहनों को मिलेगा। साथ ही प्रमुख औद्योगिक और व्यापारिक केंद्र को आगे बढ़ाया जा सकेगा। बेहतर सड़क संपर्क से उद्योगों को कच्चा माल पहुंचाने और तैयार उत्पाद दूसरे शहरों तक भेजने में सुविधा मिल सकती है।
परिवहन में लगने वाला समय और ईंधन खर्च भी कम होने की संभावना है। नया फोरलेन मार्ग तैयार होने से यातायात को एक बेहतर विकल्प मिलेगा। इससे पुराने मार्गों पर वाहनों का दबाव कम करने में भी मदद मिल सकती है। वहीं नया कॉरिडोर बनने से क्षेत्र के विकास को भी पंख लगेंगे और आसपास के ग्रामीण भागों का आर्थिक विकास भी हो सकेगा। इसके चलते यह कॉरिडोर और अधिक महत्वपूर्ण हो गया है। कॉरिडोर बनने से आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के लोग खुश हैं।
यह भी पढ़ें- एमपी को मिलने जा रही बड़ी सौगात, एक और शानदार कॉरिडोर का होगा शुभारंभ, इन इलाकों की चमकेगी किस्मत