
विनय यादव, नईदुनिया, इंदौर। दूषित पानी का दंश झेल रहे भागीरथपुरा की गरीब जनता के सामने अब रोजगार का भी संकट खड़ा हो गया है। यहां नर्मदा के पानी के साथ ही बोरिंग के पानी में भी गंदगी मिली है। बीमारी के बढ़ते मामलों को देखते हुए प्रशासन ने प्रभावित इलाकों में खानपान की सामग्री बेचने वाले ठेलों पर रोक लगा दी है। खासतौर पर पानी पुरी, छोले-टिकिया, गोलगप्पे और अन्य ऐसे खाद्य पदार्थ जिनमें पानी का अत्यधिक उपयोग होता है, उनकी बिक्री पर प्रतिबंध लगाया गया है।
भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पानी के कारण अब तक तीन हजार से अधिक लोग बीमार हो चुके हैं, जबकि 16 लोगों की मौत हो चुकी है। एक सप्ताह बीतने के बाद भी जिम्मेदार स्वच्छ पानी उपलब्ध नहीं करा सके हैं। जो टैंकर पानी के लिए भेजे गए, उनमें भी काई और जंग लगी थी। अब ताजा मौखिक निर्देशों से यहां रहने वाले गरीब लोगों के सामने रोजगार का संकट पैदा हो गया है।
लोगों का कहना है कि जिम्मेदार अधिकारी जब स्वयं पीने के लिए आरओ का पानी उपलब्ध नहीं करा सकते तो उसी काम के लिए हम पर बंदिश क्यों? इस बीच यहां ठेले नहीं लगाने दिए जा रहे जबकि खानपान की अन्य दुकानों को आरओ का ही पानी इस्तेमाल करने के लिए निर्देशित किया गया है।
प्रशासन का कहना है कि दूषित पानी के कारण संक्रमण तेजी से फैल रहा है और इस तरह के खाद्य पदार्थ बीमारी को और बढ़ा सकते हैं। क्योंकि यहीं के पानी से खाद्य सामग्री बनाई जा रही है और उन्हें बेचा जा रहा है। वर्तमान में क्षेत्र में लोगों में पानी पीने के साथ-साथ बाहर का खाना खाने को लेकर भी डर बना हुआ है।
लोगों का कहना है कि पहले बाहर का खाना बेफिक्र होकर खा लेते थे, लेकिन अब स्थिति पूरी तरह बदल गई है। बच्चों को बाहर का कुछ भी खाने नहीं देते। पानी पुरी, समोसा हम कुछ भी नहीं खा रहे हैं। पानी को उबालकर या आरओ से शुद्ध कर ही इस्तेमाल कर रहे हैं। बता दें कि उल्टी-दस्त, पेट दर्द, बुखार और कमजोरी की शिकायत लेकर रोजाना बड़ी संख्या में मरीज इलाज के लिए पहुंच रहे हैं। कई परिवारों में एक साथ दो-तीन लोग बीमार पड़ गए हैं।