• Jagran.com
  • Jagran Josh
  • Her Zindagi
  • Onlymyhealth
  • Jagran TV
  • Vishvas News
  • Inextlive
मेरी खबरें
  • होम
  • ताजा खबरें
  • मध्यप्रदेश
  • छत्तीसगढ़
  • उत्तर प्रदेश
  • देश
  • धर्म
  • मनोरंजन
  • राशिफल
  • लाइफस्टाइल
  • अन्य
    • बिज़नेस
    • बड़ी खबरें
    • खेल
    • विदेश
    • करियर
    • टॉपिक्स
    • टेक्नोलॉजी
    • शिक्षा
  • राज्य चुनें
  • ई-पेपर
  • राशिफल
  • राज्य चुनें
  • ई-पेपर
  • फटाफट
  • राशिफल
  • वेब स्टोरीज
नईदुनिया ट्रेंडिंग
  • बढ़ता यूपी
  • समृद्ध उत्तराखंड
  • Mutual Funds मास्टरी
  • होम
  • मध्य प्रदेश
  • इंदौर

यह एक आर्काइव लेख है, जिसे May 21, 2022 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

Lalbagh Palace Indore: जहां से चली हुकूमत, निखर रही उस पैलेस की सूरत

Lalbagh Palace Indore: होलकर राजशाही की झलक दिखाता है इंदौर का लालबाग पैलेस।

By Sameer DeshpandeEdited By: Sameer Deshpande
Publish Date: Sat, 21 May 2022 10:40:12 AM (IST)Updated Date: Sat, 21 May 2022 10:40:12 AM (IST)
Lalbagh Palace Indore: जहां से चली हुकूमत, निखर रही उस पैलेस की सूरत

Lalbagh Palace Indore: इंदौर, नईदुनिया प्रतिनिधि। शहर की खूबसूरती और गौरव में चार चांद लगाता लालबाग पैलेस एक बार फिर अपनी भव्यता की चांदनी से जगमगाने जा रहा है। चार एकड़ क्षेत्र में बने भवन की बाहरी और भीतरी सुंदरता को निखारने का जिम्मा वर्ल्ड मान्यूमेंट्स फंड, पुरातत्व विभाग और स्मार्ट सिटी उठा रहे हैं। धवल इमारत की बाहरी खूबसूरती को रंग-रोगन के जरिए पहले की तरह खूबसूरत बनाया जा रहा है तो भवन के अंदर बनी पेंटिंग्स, नक्काशी, फर्नीचर, पर्दे आदि को निखारने की कवायद भी जोरों से जारी है। इन कार्यों पर करीब 19 करोड़ रुपये खर्च होंगे। जबकि स्मार्ट सिटी द्वारा परिसर की बाउंड्रीवाल के दुरुस्तीकरण और पेवर ब्लाकिंग के जरिए और भी आकर्षक बनाने की कवायद की जा रही है।

शहर का यह एक ऐसा पैलेस है जहां होलकर शासक अपने शासनकाल के अंतिम दौर में रहे। तुकोजीराव तृतीय द्वारा पूर्ण कराए गए इस भवन में 1978 तक राज परिवार का वास रहा और बाद में यह संग्रहालय में तब्दील हो गया। यहां के कालीन, सोफे के कपड़े, पर्दे समय के साथ तार-तार हो गए और दीवारों के साथ यहां की गई यूरोपियन शैली की चित्रों की चमक धूमिल हुई। पर अब फिर इनकी रंगत लौटने लगी है। जिन दीवारों से प्लास्टर गिर चुका था, उन्हें सुधार दिया गया है। यहां का क्राउन हाल, सिटिंग रूम, वेस्टर्न डायनिंग रूम और महाराजा आफिस फिर अपने वैभव की गवाही देने लगे हैं।


naidunia_image

भोजन लाने के लिए होता था लिफ्ट का उपयोग

72 एकड़ में फैले लालबाग का बाहरी बगीचा करीब 25 एकड़ का है और भीतरी बगीचा करीब 12 एकड़ में बना है। सरस्वती नदी के किनारे बने इस महल की सुरक्षा को लेकर शासक कितने गंभीर थे इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पैलेस की रसोई नदी के दूसरे छोर पर बनवाई गई थी। पैलेस में तीन भोजन कक्ष हैं और वह प्रथम मंजिल पर बनवाए गए थे। तल मंजिल से प्रथम मंजिल तक भोजन पहुंचाने के लिए यहां लिफ्ट लगवाई गई थी। यहां बने भोजन कक्ष पाश्चात्य और भारतीय दोनों शैलियों के हैं।

50 लोगों का दल कर रहा कार्य

वर्ल्ड मान्यूमेंट्स फंड द्वारा मुंबई की संस्था आभा नारायण लांबा एसोसिएट को इसके भीतरी भाग के सुधार का जिम्मा दिया गया है। संस्था की आभा लांबा बताती हैं उनके साथ तीन कंजर्वेशन आर्किटेक्ट, तीन प्रोजेक्ट आर्किटेक्ट सहित करीब 50 लोगों की टीम यह कार्य कर रही है। इसमें चित्रकार, बुनकर, शिल्पकार भी शामिल हैं। समूह द्वारा महल के तल मंजिल के सात कक्षों में सुधार कार्य किया जा रहा है। इसमें सोफे के कपड़े, कालीन, झूमर, पेंटिंग्स, छत पर बने म्यूरल्स और प्लास्टर को ठीक किया गया है।

दूसरे चरण का कार्य जारी

लालबाग पैलेस के प्रभारी डीपी पांडे के अनुसार महल की खूबसूरती लौटाने का काम चार चरणों में हो रहा है। पहला और दूसरा चरण वर्ल्ड मान्यूमेंट्स फंड कर रहा है। पहला चरण पूरा हो चुका है और दूसरे चरण का कार्य जारी है। तीसरे और चौथे चरण का कार्य राज्य पुरातत्व विभाग द्वारा किया जाएगा। पहला चरण करीब नौ करोड़ रुपये की लागत से पूरा हुआ और दूसरे चरण में करीब 10 करोड़ रुपये खर्च आएगा।