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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Mar 15, 2023 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

Indore News: रियल एस्टेट निवेशकों को लुभा रहा इंदौर का सुकून, 5 हजार करोड़ का निवेश

Indore News: शहर के कोलाहल से दूर रहने वाले कई संपन्न लोग भी बायपास के दूसरी तरफ बंगले बनाते जा रहे हैं।

By Sameer DeshpandeEdited By: Sameer Deshpande
Publish Date: Wed, 15 Mar 2023 02:10:43 PM (IST)Updated Date: Wed, 15 Mar 2023 02:10:43 PM (IST)
Indore News: रियल एस्टेट निवेशकों को लुभा रहा इंदौर का सुकून, 5 हजार करोड़ का निवेश

Indore News: इंदौर, नईदुनिया प्रतिनिधि। अच्छा खानपान, खुशनुमा मौसम, बेहतर शिक्षा, अच्छा इलाज, रोजगार के अवसर... साथ ही सबको अपने में समाहित करने वाली मालवा की संस्कृति। रहने के लिए इससे बेहतर और कौन-सी जगह होगी। शायद इसीलिए मध्य भारत का सबसे तेजी से विकसित होता शहर इंदौर रियल एस्टेट कारोबारियों और निवेशकों को भी लुभा रहा है। कुछ समय पहले तक रिंग रोड और बायपास रोड के बीच विकसित होता शहर अब आसपास के गांवों तक विस्तार लेता जा रहा है। इंदौर में इस समय लगभग 500 आवासीय प्रोजेक्ट चल रहे हैं। इनमें 5 हजार करोड़ रुपये का निवेश है।

इंदौर ही नहीं, मुंबई, दिल्ली, पुणे, नागपुर के निवेशक भी यहां जमीन लेकर आवासीय प्रोजेक्ट शुरू कर चुके हैं। कोई कंपनी खुद का प्रोजेक्ट लेकर आई है तो कुछ ने इंदौर के निवेशकों के साथ भागीदारी की है। वैसे तो शहर के चारों ओर विकास हो रहा है, लेकिन इंदौर-उज्जैन रोड पर इस समय सर्वाधिक रुझान है। दूसरी तरफ बायपास रोड से तीन किलोमीटर दूर तक के गांवों में भी कालोनियां विकसित होने लगी हैं।


सुपर कारिडोर के पार गांवों तक भी निवेशक पहुंच चुके हैं। घर या फ्लैट खरीदने वाले भी अपने बजट के अनुसार टाउनशिप और कालोनी में जा रहे हैं। कुछ साल पहले तक लाेग बायपास रोड के पार जाना पसंद नहीं करते थे, लेकिन अब कम बजट के खरीदार वहां तक जाने लगे हैं। यही नहीं बड़ा प्लाट चाहने वाले और शहर के कोलाहल से दूर रहने वाले कई संपन्न लोग भी बायपास के दूसरी तरफ बंगले बनाते जा रहे हैं।

इसलिए इंदौर है रहने के लिए पसंदीदा जगह

1. बड़े कार्पोरेट अस्पतालों की पहली पसंद बना इंदौर

मेडिकल क्षेत्र में इंदौर देश के नक्शे पर तेजी से उभर रहा है। कुछ दशक पहले तक यहां के मरीजों को गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए दिल्ली, मुंबई, चैन्नई दौड़ना पड़ता था लेकिन अब हालात पूरी तरह से बदल गए हैं। बड़े-बड़े कार्पोरेट अस्पताल इंदौर में कामकाज करना चाहते हैं। कुछ तो यहां आ भी चुके हैं और कुछ बहुत जल्दी आने की तैयारी में हैं। यहां के अस्पतालों में हर गंभीर बीमारी का अत्याधुनिक उपचार उपलब्ध है। इंदौर को प्रदेश की आर्थिक राजधानी के साथ-साथ अब मेडिकल राजधानी के रूप में पहचान मिलने लगी है। मेडिकल टूरिज्म यहां तेजी से विकसित हो रहा है। देश ही नहीं विदेशों से भी मरीज यहां इलाज कराने आने लगे हैं।

2. स्वच्छता में नंबर वन, मौसम भी बेहतर

इंदौर लगातार छह वर्षों से देश का सबसे स्वच्छ शहर बना हुआ है। स्वच्छता को लेकर यहां के नागरिक जागरूक हैं। यहां की सड़कें तो स्वच्छ हैं ही, बेकलेन भी पूरी तरह से साफ कर दी गई हैं। यहां की बेकलेन बच्चों के खेल मैदान के रूप में इस्तेमाल होने लगी हैं। कई बार वहां पार्टियां तक होती हैं। शहर के ट्रेंचिंग ग्राउंड में विकसित गार्डन में विदेशी मेहमान घूमने आते हैं।

- शहर में गर्मी में न अधिक गर्मी पड़ती है, न सर्दी में अधिक सर्दी होती है। वर्षा भी सामान्य है। कुल मिलाकर हर मौसम यहां खुशनुमा होता है, रहने वालों को परेशानी में नहीं डालता। महानगर हाेने के बावजूद प्रदूषण का स्तर कम है। जबकि इस मामले में दिल्ली, मुंबई और अन्य बड़े शहर प्रदूषण में इंदौर से आगे हैं। चिकित्सक भी मानते हैं कि इंदौर का मौसम स्वास्थ के लिए अच्छा है।

3. तेजी से विकसित हो रहा इंफ्रास्ट्रक्चर

- स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत शहर में अत्याधुनिक सड़कें और पुल-पुलिया का काम तेजी से चल रहा है। स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत ही शहर की पहचान राजबाड़ा को नया स्वरूप दिया जा चुका है। इसके अलावा पुरातात्विक महत्व की धरोहर लालबाग पैलेस, बोलिया छत्री, छत्रीबाग छत्रियां आदि का भी पुनरुद्धार हो चुका है। लोग सिर्फ यहां निवेश ही नहीं करना चाहते बल्कि बसना भी चाहते हैं। सड़क, फ्लायओवर ब्रिज आदि इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करने में आइडीए ने भी अपनी गति बढ़ा दी है।

4. खानपान उम्दा, संस्कृति का अंदाज अलहदा

इंदौर का खानपान भी देश में सबसे अच्छा माना गया है। स्वाद ही नहीं, खानपान की शुद्धता भी यहां सबसे अच्छी है। भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण एफएसएसएआइ ने भी ईट राइट चैलेंज प्रतियोगिता के तहत इस पर मुहर लगाई है। ईट राइट चैलेंज प्रतियोगिता में इंदौर का खानपान देश में सबसे शुद्ध माना गया है। इसके लिए भी इंदौर को पुरस्कार मिल चुका है। शहर की संस्कृति भी सबसे अलग है। इंदौरियों में मेहमाननवाजी और अपनेपन का भाव भी गहरा है। गत जनवरी में प्रवासी भारतीय सम्मेलन के दौरान इंदौरवासियों ने यह देश-दुनिया को दिखा भी दिया।

शिक्षा का बड़ा केंद्र, बनता जा रहा आइटी हब

- इंदौर अब मध्य प्रदेश का एजुकेशन हब बन चुका है। यह देश का एकमात्र एेसा शहर है, जहां आइआइटी और आइआइएम दोनों शीर्ष संस्थान मौजूद हैं। प्रदेश की एकमात्र नैक ए प्लस ग्रेड प्राप्त यूनिवर्सिटी देवी अहिल्या विश्वविद्यालय भी यहीं है। इसके अलावा 8 निजी विश्वविद्यालय भी यहां से संचालित होते हैं। हर साल पांच से छह लाख विद्यार्थी अपना भविष्य बनाने के लिए इंदौर आते हैं। साथ ही टीसीएस, इंफोसिस जैसी बड़ी आइटी कंपनियों के साथ ही यहां छोटी और मध्यम 500 आइटी कंपनियां हैं। इनमें करीब 15 हजार युवा काम करते हैं। यह युवा भी इंदौर में ही निवेश कर बसते जा रहे हैं।

देश के अन्य शहरों से बेहतर जुड़ाव

इंदौर में एयर और रेलवे कनेक्टिविटी भी बेहतर है। इस कारण मुंबई, दिल्ली, पुणे, हैदाराबाद, बंगलुरु आदि बड़े शहरों से भी अच्छा जुड़ाव है। साथ ही मेट्रो प्रोजेक्ट भी आ रहा है। यहां शहर के अंदर पब्लिक ट्रांसपोर्ट की बसों की व्यवस्था भी बेहतर है। आसपास के शहरों से भी सड़क परिवहन तेज है। इसी कारण अन्य शहरों के लोग भी कारोबारी जरूरतों या अन्य कारणों से इंदौर में घर लेकर रहना पसंद कर रहे हैं।

इन इलाकों में सर्वाधिक कीमत, दो से पांच करोड़ के फ्लैट

प्रापर्टी की कीमतों के लिहाज से देखें तो इंदौर में रेसकोर्स रोड सबसे महंगा माना जाता है। इसके अलावा कंचनबाग, साकेत, मनोरमागंज, पलासिया, एबी रोड पर विजय नगर का क्षेत्र सर्वाधिक महंगे हैं। यहां एक करोड़ से लेकर पांच करोड़ रुपये तक के फ्लैट हैं। इन इलाकों में भूखंड की कीमतें सात हजार से लेकर 20 हजार रुपये प्रति वर्गफीट तक पहुंच चुकी है। दूसरी तरफ बिचौली मर्दाना, स्कीम नंबर-140, निपानिया जैसे इलाके भी काफी महंगे हो चुके हैं। इन इलाकों में पिछले पांच-सात साल में संपत्ति की कीमतें दोगुनी हुई हैं। निर्माण की लागत भी करीब 40 प्रतिशत तक बढ़ोतरी हो चुकी है।

क्या कहते हैं जानकार

इंदौर में रियल एस्टेट सेक्टर में इस समय अनूकूलता है। इंदौर में रहने की लागत बहुत किफायती है। यहां के लोगों में अन्य शहरों से आए लोगों की स्वीकार्यता भी है। कट्टरवाद भी नहीं है। हर समुदाय के लोग रहते हैं। कई लोग ऐसे हैं जो रिटायरमेंट के बाद इंदौर में ही बस जाते हैं।

- अतुल झंवर, कोषाध्यक्ष, क्रेडाई


इंदौर की एयर कनेक्टिविटी और यहां से जुड़ने वाले फोरलेन बनने के बाद इंदौर का दिनोदिन विस्तार हो रहा है। यह तेजी से बढ़ता शहर बन चुका है, इसलिए यहां रियल एस्टेट में केवल निवेश नहीं है, बल्कि लोगों की जरूरत है। उज्जैन रोड तो लगभग पैक हो चुका है, अब आसपास के गांवों में भी कालोनियां बन रही हैं। शासन की तरफ से भी सहयोग मिल रहा है।

- विवेक दम्मानी, प्रदेश अध्यक्ष, नेशनल रियल एस्टेट डेवलपमेंट काउंसिल

देश का सबसे स्वच्छ शहर बनने के बाद इंदौर की काफी ब्रांडिंग हुई। फ्लैट तो बिक ही रहे हैं, लेकिन कोरोना के बाद लोगों का रुझान प्लाट में अधिक बढ़ा है। वे खुद का घर लेकर रहना पसंद कर रहे हैं। इसी कारण बायपास रोड के दूसरी तरफ भी लोग रहने जा रहे हैं, पहले ऐसा नहीं था। कम बजट वालों को भी शहर में मकान उपलब्ध हैं।

- विजय गांधी, उपाध्यक्ष, एमपी क्रेडाई

इंदौर में रहने के अनुसार भौगोलिक अनुकूलता भी है। यहां चारों तरफ प्लेन जमीन है, समुद्र या पहाड़ भी नहीं हैं। इसलिए विस्तार के काफी विकल्प हैं। रेरा कानून आने के बाद रियल एस्टेट सेक्टर में भी अच्छे लोग काम के लिए आगे आए हैं। सही काम हाेने से खरीदारों में विश्वास बढ़ा है।

- नितिन अग्रवाल, सीए एवं रेरा के जानकार

संपत्ति की खरीदी-बिक्री में इंदौर हमेशा से ही आगे रहा है। शहर के साथ ग्रामीण क्षेत्र में भी जमीन, मकान अौर प्लाट के कई सौदे गाइडलाइन दर से अधिक पर हो रहे हैं। रियल एस्टेट में ग्रोथ के कारण राज्य शासन को भी यहां से काफी राजस्व मिलता है। स्टाम्प ड्यूटी के संकलन में इंदौर पूरे प्रदेश में पहले नंबर पर है। इस वर्ष भी हम शासन से तय लक्ष्य को हासिल कर लेंगे।

- बालकृष्ण मोरे, उप महानिरीक्षक, पंजीयन एवं मुद्रांक विभा