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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jul 09, 2022 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

Taste Of Indore: व्रत को भी लज्जतदार बना देती है 'इंदौरी साबूदाना खिचड़ी'

Taste Of Indore: इंदौर में खीर और बड़े के अलावा साबूदाने की खिचड़ी, फलाहारी मिक्सचर और पापड़ भी बनते हैं।

By Sameer DeshpandeEdited By: Sameer Deshpande
Publish Date: Sat, 09 Jul 2022 12:19:06 PM (IST)Updated Date: Sat, 09 Jul 2022 12:19:05 PM (IST)
Taste Of Indore: व्रत को भी लज्जतदार बना देती है 'इंदौरी साबूदाना खिचड़ी'

Taste Of Indore: इंदौर, नईदुनिया प्रतिनिधि। केरल, तमिलनाडु और आंध्रप्रदेश में पैदा होने वाले कंद टैपिकोआ से बनने वाला साबूदाना यूं तो पूरी दुनिया में जाना जाता है लेकिन जितनी खपत और प्रसिद्धि इसे इंदौर में मिली उतनी शायद कहीं और नहीं मिल सकी। दक्षिण भारत, उत्तर प्रदेश, पंजाब सहित अन्य प्रदेशों में जहां साबूदाने की खीर बनती है वहीं राजस्थान और महराष्ट्र में इसके बड़े बनाए जाते हैं लेकिन इंदौर में खीर और बड़े के अलावा साबूदाने की खिचड़ी, फलाहारी मिक्सचर और पापड़ भी बनते हैं। खास बात तो यह है कि शहर में साबूदाना खिचड़ी जिस मात्रा में बिकती है उससे कहीं ज्यादा प्रसाद के रूप में बांटी जाती है और यहां की खिचड़ी देशभर में 'इंदौरी साबूदाना खिचड़ी' के नाम से प्रसिद्ध है जो व्रत को भी लज्जतदार बना देती है। गली-मोहल्लों, चौपाटी से लेकर पांच सितारा होटल तक में अब यह खिचड़ी मिलने लगी है और विवाह समारोह आदि में भी अब इसके स्टाल लगने लगे हैं।

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इंदौर की रसोई में साबूदाना खिचड़ी कब से बन रही है यह कहना तो मुश्किल है लेकिन यह जरूर है कि यहां इसकी खिचड़ी का बाजार करीब 40-45 वर्ष पुराना है। यूं तो अमूमन हर घर में साबूदाना खिचड़ी बनती है बावजूद शहर में 150 से अधिक दुकान और ठेलों पर इसका कारोबार फलफूल रहा है। साबूदाना, आलू, मूंगफली दाना, हरीमिर्च, हरा धनिया, नींबू और नमक के साथ कुछ मसालों वाली इस खिचड़ी की खासियत यह है कि इसे न्यूनतम तेल में बघारकर गर्म पानी के भगौने पर रखा जाता है ताकि भाप से वह गर्म और नर्म रहे।


सराफा चौपाटी पर लगने वाले प्रसिद्ध 'श्री सांवरिया फरियाली सेंटर' के संचालक जगन्नाथ व्यास बताते हैं कि उन्होंने 22 जुलाई 1983 में यह दुकान शुरू की थी। पहले वे केवल रसोई बनाते थे। एक दिन उनके मित्र कन्हैयालाल ने उनसे खिचड़ी की दुकान लगाने को कहा और इस तरह इसकी शुरुआत हुई। शुरूआती दिनों में लोग इसे बाजार में खाने से कतराते थे पर धीरे-धीरे सोच बदली और अब रात 1 बजे तक इसकी दीवानगी देखी जा सकती है। मसालों के नाम पर इसमें कालीमिर्च, लौंग, दालचीनी, बड़ी इलायची और सेंधा नमक का चूर्ण ही मिलाया जाता है।

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पहले केवल खिचड़ी ही परोसी जाती थी। बाद में इसके स्वाद में कुछ कुरकुरापन लाने के लिए फलाहारी मिक्सचर मिलाया गया जो लोगों को पसंद आया। इसके बाद आलू की मोटी पपड़ी भी इसमे शामिल हुई जिसका उपयोग लोग चम्मच की तरह करने लगे। इससे इसका स्वाद और भी निखरा और खिचड़ी को पूरी तरह इंदौरी तड़का लग गया। यह खिचड़ी रवींद्र जैन, अरशद वारसी, संजीव कपूर सहित कई नामी लोग खाने आ चुके हैं।

शहर में 50 वर्ष से साबूदाने का कारोबार कर रहे राजकुमार साबू बताते हैं कि आम दिनों में शहर में प्रतिदिन करीब 18 टन साबूदाने की खपत होती है और श्रावण माह, नवरात्र, शिवरात्री, जन्माष्टमी, एकादशी या व्रत विशेष पर इसकी खपत तीन गुना बढ़ जाती है। 50 वर्ष पहले यह खपत महज दो टन ही थी। बात अगर कीमत की करें तो आज 20 से 30 रुपये प्रतिप्लेट खिचड़ी यहां बिक रही है।

फोटो: प्रफुल्ल चौरसिया, आशु