Iron Rod Rate in MP: इंदौर (नईदुनिया प्रतिनिधि)। सरिये के दामों में करीब 15 दिन से गिरावट जारी है। तेजी की ओर जाते सरिये के दामों आई इस मंदी ने व्यापारियों को तोड़कर रख दिया है। बाजार में तमाम व्यापारियों ने स्टाक भरना ही बंद कर दिया है। खास बात है कि दाम में गिरावट के बाद भी बाजार में मांग घटती दिख रही है। उतार-चढ़ाव से परेशानी व्यापारियों ने सरकार से हस्तक्षेप की मांग की है। सरिये के दाम मार्च में 70 हजार रुपये प्रति टन के आसपास थे। अप्रैल में 76,000 रुपये प्रतिटन तक पहुंच गए। मई में दामों में गिरावट का दौर शुरू हुआ। 11 मई को सरिये के दाम 61,525 प्रतिटन पर पहुंच गए।
बुधवार को इंदौर के बाजार में सरिया 59,525 रुपये प्रतिटन था। सरिया विक्रेता यूसुफ लोखंडवाला के अनुसार पहले लोहे के दामों में 100 से 200 रुपये की दो-चार दिन के अंतर में घटत-बढ़त होती थी। अब एक दिन में 1000-2000 रुपये का उतार-चढ़ाव आम हो गया है। बीते दिनों में 3000 रुपये तक की गिरावट भी रही। इसके चलते व्यापारियों ने माल लेना बंद कर दिया है। मई और जून सरिये की मांग के लिहाज से वर्ष के बेहतर महीने रहते हैं। इन दिनों में निर्माण के काम शुरू भी होते हैं और बारिश के पहले तेजी पकड़ते हैं। इससे सरिये की बिक्री भी खूब होती है। बीते दो साल से कोरोना के कारण व्यापार अटका रहा। इस साल तेजी-मंदी के कारण व्यापार करीब 40 प्रतिशत रह गया है।
माल लेते ही घाटा : कारोबारियों के मुताबिक ताजा स्थिति ये है कि उनके गोदाम पर माल पहुंचने के पहले ही उन्हें घाटा हो जाता है। लोखंडवाला के अनुसार कंपनी में माल बुक करवाकर पैसा देते हैं। दो-तीन दिन में गाड़ी आती है। दाम गिरते हैं और गोदाम तक पहुंचते हुए ही हमें एक-सवा लाख का घाटा हो जाता है। पहले अचानक बढ़ी महंगाई से छोटे व्यापारी माल खरीद नहीं पा रहे थे। रोज हजारों में हो रही गिरावट से वे घाटे से डूब रहे हैं। लोहा व्यापारी और कांग्रेस व्यापारी प्रकोष्ठ के प्रदेश सचिव मोहम्मद पीठावाला के अनुसार बड़े सट्टेबाजों के दबाव में सरकार कार्रवाई नहीं कर रही है। गिरावट से डरे व्यापारी माल खरीदने को तैयार नहीं है। बाजार में खेरची ग्राहक भी यह सोचकर नहीं आ रहा कि आगे दाम और गिरेंगे।
एसोसिएशन से नाराज कारोबारी
लोहा बाजार में फैली अनिश्चितता से व्यापारी परेशान हैं। अपनी एसोसिएशन से भी उनकी नाराजगी बढ़ती जा रही है। लोहा कारोबारी मनोज शर्मा के अनुसार इंदौर में लोहे की बड़ी मंडी है। व्यापार थम गया है, लेकिन लोहा व्यापारी एसोसिएशन ने अब तक सरकार के सामने व्यापारियों की परेशानी नहीं बताई। बाजार में ऐसे लोग एसोसिएशन का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं जो खुद ही कारोबार नहीं करते। ऐसे में व्यापारियों की आवाज भी सरकार तक नहीं पहुंच पा रही।