नशे के नेटवर्क से विदेशी हस्तक्षेप तक, संघ की इंदौर में होने वाली तीन दिनी बैठक में उठेंगे राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे
नशे के बढ़ते खतरे, देश की सुरक्षा में बाहरी शक्तियों के हस्तक्षेप और बदलते वैश्विक परिदृश्य में सत्ता परिवर्तन की कथित साजिशों जैसे मुद्दे राष्ट्रीय स...और पढ़ें
Publish Date: Fri, 23 Oct 2026 09:45:15 AM (IST)Updated Date: Fri, 23 Oct 2026 09:45:15 AM (IST)
सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत। -फाइल फोटोHighLights
- प्रायोजित प्रदर्शनों और हिंसक आंदोलनों के जरिए समाज में भ्रम फैलाने की चुनौती पर चर्चा
- डिजिटल सुरक्षा और युवाओं को राष्ट्रहित के कार्यों से जोड़ने पर भी रहेगा जोर
- राष्ट्र निर्माण, आंतरिक सुरक्षा और सामाजिक आचरण पर हो सकता है मंथन
रामकृष्ण मुले, नईदुनिया, इंदौर : नशे के बढ़ते खतरे, देश की सुरक्षा में बाहरी शक्तियों के हस्तक्षेप और बदलते वैश्विक परिदृश्य में सत्ता परिवर्तन की कथित साजिशों जैसे मुद्दे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल की बैठक में चर्चा के प्रमुख विषय बन सकते हैं।
तीन दिन तक चलने वाली इस बैठक में प्रायोजित प्रदर्शनों, हिंसक आंदोलनों और वैचारिक भ्रम के जरिए समाज को प्रभावित करने वाली गतिविधियों के प्रति जनजागरण बढ़ाने पर भी विचार होगा। इसके साथ ही डिजिटल माध्यमों पर परोसी जा रही सामग्री, युवाओं पर उसके प्रभाव और नशामुक्त भारत के लक्ष्य को लेकर सामाजिक स्तर पर किए जाने वाले प्रयासों की समीक्षा की जाएगी।
राष्ट्र निर्माण, आंतरिक सुरक्षा और सामाजिक आचरण पर हो सकता है मंथन
संघ प्रमुख डॉ. मोहन भागवत ने विजयादशमी उत्सव के अवसर पर राष्ट्र निर्माण, आंतरिक सुरक्षा और सामाजिक आचरण से जुड़े विषय उठाए थे। कार्यकारी मंडल की बैठक में इन विषयों के संदर्भ में सामाजिक चुनौतियों और उनके समाधान के लिए किए जाने वाले प्रयासों पर विचार हो सकता है।
संघ के शताब्दी वर्ष के दौरान देशभर में आयोजित कार्यक्रमों की समीक्षा भी की जाएगी। वर्षभर चले आयोजनों से मिले अनुभवों, सामाजिक सहभागिता और आगामी कार्ययोजना पर विचार-विमर्श होगा। बदलते राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय हालात के बीच सामाजिक जागरूकता, आंतरिक सुरक्षा और राष्ट्र निर्माण से जुड़े विषयों पर भी चर्चा की पृष्ठभूमि तैयार है।
बैठक में इन मुद्दों पर रह सकता है फोकस
- विदेशी हस्तक्षेप और राष्ट्रीय सुरक्षा : बदलते वैश्विक परिदृश्य, पड़ोसी देशों की राजनीतिक हलचलों और बाहरी शक्तियों की भूमिका से जुड़ी चुनौतियों पर विमर्श। सत्ता परिवर्तन के लिए हिंसक गतिविधियों या हस्तक्षेप की आशंकाओं के प्रति सतर्कता का विषय भी चर्चा में आ सकता है।
- प्रायोजित प्रदर्शनों से समाज को सजग करना : हिंसक आंदोलनों, संवैधानिक संस्थाओं के प्रति अविश्वास बढ़ाने वाली गतिविधियों और वैचारिक भ्रम के प्रभावों को लेकर समाज में जागरूकता बढ़ाने के उपायों पर विचार।
- डिजिटल सुरक्षा और सांस्कृतिक प्रभाव : ओटीटी मंचों पर उपलब्ध सामग्री तथा इंटरनेट मीडिया के बढ़ते प्रभाव के बीच युवाओं में विवेकपूर्ण डिजिटल व्यवहार को प्रोत्साहित करने और सांस्कृतिक-सामाजिक मूल्यों के प्रति जागरूकता बढ़ाने पर जोर।
- युवाओं की रचनात्मक भागीदारी : युवाओं को डिजिटल दुनिया तक सीमित रहने के बजाय सामाजिक सेवा, रचनात्मक गतिविधियों और राष्ट्रहित से जुड़े कार्यों में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित करने के उपाय।
- नशामुक्त भारत की पहल : नशीले पदार्थों के बढ़ते दुष्प्रभावों को गंभीर सामाजिक चुनौती मानते हुए जनजागरण, परिवार और समुदाय की भूमिका तथा नशामुक्ति के प्रयासों को मजबूत करने पर विचार।
संघ के प्रमुख पदाधिकारी होंगे शामिल
अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर के अनुसार संघ की वार्षिक अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल की बैठक 2, 3 और 4 नवंबर को इंदौर के डेली कॉलेज में प्रस्तावित है। इसमें सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत, सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले, सभी छह सह सरकार्यवाह, अखिल भारतीय कार्य विभागों के प्रमुख और कार्यकारिणी के सदस्य शामिल होंगे। संघ की संरचना के सभी 46 प्रांतों के प्रमुख पदाधिकारी और प्रचारक भी बैठक में अपेक्षित हैं। इसके अलावा सभी 11 क्षेत्रों के संघचालक, कार्यवाह, प्रचारक और उनके सह पदाधिकारी उपस्थित रहेंगे।
- 3 दिवसीय बैठक में विभिन्न सत्रों में चर्चा होगी।
- 6 सभी सह सरकार्यवाह भी मार्गदर्शन देंगे।
- 46 प्रांतों के 450 प्रमुख पदाधिकारी रहेंगे।
- 11 क्षेत्रों के संघचालक, कार्यवाह, प्रचारक और उनके सह पदाधिकारी भी भाग लेंगे।
यह भी पढ़ें- भोपाल में RSS का स्वयंसेवक एकत्रीकरण; दत्तात्रेय होसबाले ने कहा- 'जातिगत भेदभाव हिंदू समाज पर कलंक'