
रामकृष्ण मुले, नईदुनिया, इंदौर : राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की इंदौर में तीन दिन चली अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल की बैठक का निचोड़ यह है कि शताब्दी वर्ष में संगठन ने संपर्क और विस्तार के जो बड़े लक्ष्य हासिल किए हैं, अब उन्हें समाज के व्यवहार में बदलाव का आधार बनाने की तैयारी है।
बैठक में प्रस्तुत आंकड़े शाखाओं की बढ़ती संख्या, दस करोड़ से अधिक घरों तक पहुंच और करोड़ों लोगों की सहभागिता का विस्तार बताते हैं, लेकिन चर्चा का सबसे महत्वपूर्ण विषय इन उपलब्धियों से आगे की कार्य दिशा रहा।
संघ अब पंच परिवर्तन के माध्यम से सामाजिक समरसता, परिवार प्रबोधन, पर्यावरण संरक्षण, स्व का बोध और नागरिक कर्तव्य को समाज के दैनिक जीवन में उतारने पर जोर देगा। यानी अगली चुनौती शाखाओं और सम्मेलनों की संख्या बढ़ाने से आगे समाज में स्थायी बदलाव लाने की होगी।
शताब्दी वर्ष में संघ के कार्यकर्ताओं ने 10.22 करोड़ से अधिक घरों तक संपर्क किया। प्रत्येक घर में 15 से 20 मिनट बैठकर संवाद किया गया। हिंदू सम्मेलन में 4.93 करोड़ से अधिक लोगों की सहभागिता रही। इनमें सवा दो करोड़ से अधिक महिलाएं शामिल हुईं।
बैठक में इन कार्यक्रमों की समीक्षा के साथ पंच परिवर्तन को समाज के व्यवहार में प्रभावी रूप से उतारने और उसके निरंतर अनुवर्तन की योजना पर विचार किया गया। यह संकेत है कि अब संपर्क को एक बार के अभियान के बजाय लगातार सामाजिक सहभागिता में बदलने पर जोर रहेगा।
देश में 63,208 स्थानों पर 99,423 दैनिक शाखाएं संचालित हो रही हैं। एक वर्ष में 12,025 शाखाओं की वृद्धि हुई है। इसके अलावा साप्ताहिक मिलन और मासिक मंडलियां भी चल रही हैं। इस तरह कुल 1,03,397 स्थानों पर प्रत्यक्ष संघ कार्य पहुंच चुका है।
पिछले वर्ष यह संख्या 93,156 थी। शाखा के साथ साप्ताहिक मिलन और मासिक मंडलियों का विस्तार बताता है कि संगठन अलग-अलग सामाजिक और व्यावसायिक परिस्थितियों वाले लोगों तक पहुंच के विविध माध्यम विकसित कर रहा है।इसी क्रम में 46 प्रांतों की जगह देशभर में 88 संभाग बनाने का निर्णय भी महत्वपूर्ण है। इससे संगठन की भौगोलिक संरचना अधिक स्थानीय इकाइयों में विभाजित होगी और कार्य के समन्वय तथा विस्तार को व्यवस्थित करने का अवसर मिलेगा।
बैठक में युवाओं के लिए आयोजित कार्यक्रमों में युवाओं की सहभागिता का उल्लेख किया गया। इसके साथ युवाओं में बढ़ते नशे को गंभीर चुनौती मानते हुए सामाजिक चेतना और पुनर्वास के लिए सामाजिक संगठनों के साथ काम करने की योजना बनाई गई। सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने नई पीढ़ी की आकांक्षाओं को समझने, उससे सकारात्मक संवाद करने और उसकी ऊर्जा को रचनात्मक कार्यों से जोड़ने पर जोर दिया।परिवारों में मोबाइल के बढ़ते प्रभाव और घटते संवाद पर भी चिंता जताई गई।
इंदौर की बैठक का मूल संदेश यही है कि शताब्दी वर्ष में बना व्यापक संपर्क आधार अब निरंतर सामाजिक सक्रियता में बदलना चाहिए। शाखाओं और सम्मेलनों की संख्या संगठन की पहुंच बताती है, लेकिन पंच परिवर्तन का समाज के जीवन में कितना प्रभाव पड़ता है, यही आगे संघ के कार्य की वास्तविक कसौटी होगी।
सप्ताहभर से शहर में जुटे संघ के पदाधिकारियों का शुक्रवार दोपहर से लौटने का दौर शुरू हो गया है। इस सरसंघचालक डा. मोहन भागवत एवं सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने क्षेत्रीय प्रचारकों से चर्चा की। शताब्दी वर्ष की उपलब्ध को बनाए रखने के साथ ही आने वाली चुनौतियों पर प्रभावी ढंग से बात की गई।
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